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युद्ध का मैदान भी हमारे लिए ‘धर्मक्षेत्र’, जहां धर्म और कर्तव्य होगा वहीं जीत होनी है: योगी आदित्‍यनाथ

 Edited By: Niraj Kumar
 Published : Nov 23, 2025 06:09 pm IST,  Updated : Nov 23, 2025 06:09 pm IST

योगी आदित्यनाथ ने कहा, ‘‘किसी को गुरुर नहीं पालना चाहिए कि अधर्म के मार्ग पर चलकर विजय प्राप्त हो जाएगी। यह भारत के सनातन धर्म की परंपरा है कि प्रकृति का अटूट नियम है, सदैव से यही होता आया है। इसलिए हमें हमेशा यह ध्यान रखना चाहिए।’’

Mohan bhagwat, Yogi Adityanth- India TV Hindi
मोहन भागवत और योगी आदित्यनाथ Image Source : PTI

लखनऊ: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को कहा कि युद्ध का मैदान भी हमारे लिए ‘‘धर्मक्षेत्र’’ है और जहां धर्म व कर्तव्य होगा, वहीं जय होनी है। उन्होंने लखनऊ के जनेश्वर मिश्र पार्क में आयोजित ‘दिव्य गीता प्रेरणा उत्सव’ को संबोधित करते हुए यह बात कही।  इस कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक डॉ.मोहन राव भागवत भी मौजूद थे।

किसी को गुरुर नहीं पालना चाहिए

योगी आदित्यनाथ ने कहा, ‘‘पूरे भारत को हमने धर्मक्षेत्र माना, इसलिए युद्ध का मैदान भी हमारे लिए धर्मक्षेत्र ही है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘कर्तव्यों से जुड़ा क्षेत्र है और धर्मक्षेत्र में जो युद्ध लड़ा जा रहा है, वह कर्तव्यों के लिए लड़ा जा रहा है। यही भाव सामने आता है तो अंत में परिणाम यह होता है कि जहां धर्म और कर्तव्य होगा, वहीं विजय होगी, इससे इतर कुछ नहीं हो सकता।’’ योगी आदित्यनाथ ने कहा, ‘‘किसी को गुरुर नहीं पालना चाहिए कि अधर्म के मार्ग पर चलकर विजय प्राप्त हो जाएगी। सनातन धर्म की परंपरा है कि प्रकृति का अटूट नियम है, सदैव से यही होता आया है। इसलिए हमें हमेशा यह ध्यान रखना चाहिए।’’ 

अच्छा करेंगे तो पुण्य के भागीदार बनेंगे 

उन्होंने कहा, ‘‘दुनिया के अंदर कोई जगह नहीं होगी, जहां युद्ध का मैदान धर्मक्षेत्र के रूप में जाना जाता हो, लेकिन हमारे यहां हर कर्तव्य को पवित्र भाव से माना गया है।'' मुख्यमंत्री ने नसीहत देते हुए कहा, ‘‘अच्छा करेंगे तो पुण्य के भागीदार बनेंगे और बुरा करेंगे तो पाप के भागीदार बनेंगे। ऐसा जब हर धर्मावलंबी सोचता है तो वह अच्छा करने का प्रयास करता है।’’ योगी आदित्यनाथ ने कहा, ‘‘भारत ने विश्व मानवता को प्राचीन काल से संदेश दिया है। हमने कभी यह नहीं कहा कि हम जो कह रहे वही सही है, हमारी ही उपासना विधि सर्वोत्तम है। हमने सब कुछ होते हुए भी कभी अपनी श्रेष्ठता का डंका नहीं पीटा।’’ उन्होंने कहा, ‘‘जो आया उसे शरण दिया, जिसके ऊपर विपत्ति आई, उसके साथ खड़े हो गए। 'जियो और जीने दो' की प्रेरणा किसी ने दी है तो वह भारत की भूमि ने दी है। 'वसुधैव कुटुंबकम्' की प्रेरणा भी भारत की धरती ने ही दी है।’’ 

गीता के साथ जीने की आदत बनाने की प्रेरणा 

आयोजन के मुख्य वक्ता स्वामी ज्ञानानंद जी महाराज ने कहा कि लोगों के मन में सवाल हो सकता है कि आयोजन का प्रयोजन क्या है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह किसी प्रकार का प्रदर्शन नहीं है, बल्कि प्रेरणा है और जियो गीता संस्था एक आह्वान है। स्वामी ज्ञानानंद ने कहा, ‘‘जियो गीता, गीता के साथ जीने की आदत बनाने की प्रेरणा है। समय की आवश्यकता है और भौतिकवाद ने कई संसाधन दिए हैं, लेकिन इसके साथ समस्याएं भी तेजी से बढ़ी हैं। पूरे विश्व में अलग-अलग प्रकार से महाभारत फिर से दिखाई दे रहा है। समाधान क्या है? उस महाभारत में गीता का उपदेश दिया गया था।’’ 

कार्यक्रम के मुख्य आयोजक, रिटायर्ड आईएएस अधिकारी मणि प्रसाद मिश्र ने कहा, ‘‘राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर गीता और गोविंद के माध्यम से कल्याण और लोक भावना से प्रेरित संत परंपरा के अद्भुत रत्न स्वामी ज्ञानानंद जी का संकल्प है कि इस देश में ही नहीं, अपितु समस्त धरा मंडल पर गीता न केवल पढ़ी और समझी जाए, बल्कि गीता को गुनगुनाते हुए यह लोक दोबारा भवसागर में न पड़े। यह पूरा प्रदेश गीतामय और गोविंदमय हो जाए।’’ मिश्र ने कहा, ‘‘गीता सब कुछ है। अगले वर्ष 20 दिसंबर, 2026 को गीता जयंती है और उस दिन पूरे प्रदेश में एक मिनट एक साथ 11 बजे गीता पाठ होगा। शासन और समाज नदी की सफाई में सहयोग करेंगे।’’ इसके पहले मोहन भागवत के समारोह में पहुंचने पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और स्वामी ज्ञानानंद समेत कई संतों ने उनका स्वागत किया। (इनपुट-भाषा)

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