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गजब! मुंबई में UKG क्लास की फीस ₹4 लाख ? IIT के एक्स स्टूडेंट ने बताई सच्चाई; वायरल हो रही पोस्ट

 Written By: Shaswat Gupta
 Published : Feb 20, 2026 11:59 am IST,  Updated : Feb 20, 2026 11:59 am IST

Viral Post : सोशल मीडिया पर इन दिनों एक पोस्ट काफी वायरल हो रही है। इस पोस्ट में IIT बॉम्बे के एक्स स्टूडेंट ने UKG क्लास की फीस से सम्बन्धित एक खुलासा किया है।

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क्लास में पढ़ाई करती बच्ची। Image Source : FREEPIK

Viral Post : दिल्ली, मुंबई और बेंगलुरू जैसे महानगरों में शिक्षा महंगी होने के मुख्य कारण उच्च परिचालन लागत, बेहतर बुनियादी ढांचा, शिक्षकों के उच्च वेतन और निजी संस्थानों द्वारा ली जाने वाली भारी फीस है। इसके अतिरिक्त, इन शहरों में जीवनयापन की उच्च लागत, मांग के मुकाबले सीटों की कमी और तकनीकी विकास के लिए निरंतर निवेश की आवश्यकता भी शिक्षा को महंगा बनाती है। इन बातों को लेकर अक्सर सोशल मीडिया पर बहस छिड़ती रहती है। इसी से जुड़ी एक पोस्ट सोशल मीडिया पर वायरल हुई है जिसमें प्री-स्कूल की फीस की तुलना एक प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग डिग्री की फीस से की गई है। पोस्ट में बताया गया है कि अपर किंडरगार्टन की वार्षिक फीस 4 लाख रुपये है। 

एक्स पर पोस्ट हुई वायरल 

इस पोस्ट को एक्स पर @aviralbhat नामक हैंडल से शेयर किया गया है। पोस्ट में IIT बॉम्बे के पूर्व छात्र ने लिखा, 'मेरी चचेरी बहन ने बताया कि मुंबई में उसकी बेटी की यूके ग्रेड की फीस 4 लाख रुपये प्रति वर्ष से अधिक हो रही है।' आईआईटी के पूर्व छात्र का कहना है कि उनकी इंजीनियरिंग डिग्री की फीस यूकेजी की फीस की आधी थी। उन्होंने इसकी तुलना भारत के प्रमुख संस्थान में अपने स्वयं के खर्चों से करते हुए कहा, 'आईआईटी बॉम्बे में मेरी फीस चार साल की पूरी पढ़ाई के लिए आधी थी। शिक्षा की लागत एक छिपी हुई महंगाई है जिसके बारे में कोई बात नहीं कर रहा है। शायद एआई ट्यूटर इसे फिर से किफायती बना देंगे।' 

यूजर्स ने दी प्रतिक्रियाएं 

इस पोस्ट के वायरल होते ही इस पर कई यूजर्स ने प्रतिक्रियाएं दी हैं। एक यूजर ने लिखा कि, 'मैंने हाल ही में अपनी बेटी का गुरुग्राम में प्रीप (यूकेजी) में दाखिला कराया है। उन्होंने 1 लाख रुपये प्रवेश शुल्क, 70,000 रुपये वापसी योग्य शुल्क, 20,000 रुपये प्रति माह ट्यूशन शुल्क और बस के लिए लगभग 7,000 रुपये प्रति माह लिए। कुल मिलाकर लगभग 5 लाख रुपये हो गए, और इसके अलावा यूनिफॉर्म, किताबें, गतिविधियां आदि का खर्च भी होगा।' दूसरे ने लिखा कि, 'दोहरी मार यह है कि जहां फीस कई गुना बढ़ रही है, वहीं शिक्षा की गुणवत्ता उसी दर से गिर रही है। बहुत कम स्कूल हमारे बच्चों को हर स्तर पर अच्छी तरह से तैयार कर रहे हैं, और जो स्कूल ऐसा करने के लिए स्थापित हैं, उन पर माता-पिता शायद ही भरोसा करते हैं।' तीसरे ने लिखा कि, 'शिक्षा, विवाह, चिकित्सा – भारत में सबसे अधिक लाभदायक व्यवसाय। निजी स्कूलों और अस्पतालों को बढ़ावा देने के लिए सरकारी स्कूल और अस्पताल सबसे खराब स्थिति में हैं। भारत केवल अमीर लोगों के लिए है।' चौथे यूजर ने लिखा कि, 'सबसे महत्वपूर्ण समस्या यह है कि शिक्षा एक मौलिक अधिकार है, और इसका मतलब यह है कि इसे पैसे कमाने का साधन नहीं बनाया जाना चाहिए। फिर भी स्कूल खुलेआम ऐसा कर रहे हैं।'

डिस्क्लेमर: इस खबर में दी गई जानकारी सोशल मीडिया और रिपोर्ट्स में किए गए दावों पर आधारित है। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रमाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।

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