World Top-10 Cities: साल 2025-26 के लिए दुनिया के टॉप-10 शहरों की सूची जारी हो चुकी है। इसमें लंदन ने लगातार 11वीं बार फिर पहला स्थान हासिल किया है। जबकि अमेरिका का न्यूयॉर्क शहर दूसरे पायदान पर है। न्यूयॉर्कको “अमेरिका की शाश्वत धड़कन” भी कहा जाता है। वहीं फ्रांस की राजधानी पेरिस तीसरे स्थान पर है।
लंदन 11 वीं बार टॉप पर
लंदन लगातार 11 बार से टॉप पायदान पर कायम है। Resonance Consultancy और Ipsos के सहयोग से यह वार्षिक रिपोर्ट जारी की गईहै। “World’s Best Cities Report 2026” के अनुसार “राजधानियों की राजधानी” लंदन ने सभी प्रतिद्वंद्वियों को पीछे छोड़ते हुए तीनों प्रमुख पैमानों पर शानदार प्रदर्शन किया है: समृद्धि और प्यार करने योग्य (Lovability) में दूसरा स्थान तथा रहने योग्यता (Liveability) में तीसरा स्थान। रिपोर्ट में 2025-2026 के लिए रहने, काम करने और घूमने के लिए दुनिया के टॉप-100 सर्वश्रेष्ठ शहरों की सूची दी गई है। इस सूची में यूरोपीय शहरों का दबदबा है; केवल दो एशियाई शहर ही टॉप-100 में जगह बना पाए।
टॉप-10 शहर इस प्रकार हैं:
- लंदन
- न्यूयॉर्क (“अमेरिका की शाश्वत धड़कन”)
- पेरिस
- टोक्यो
- मैड्रिड
- सिंगापुर
- रोम
- दुबई (पश्चिम एशिया का सबसे ऊंचे रैंक वाला शहर)
- बर्लिन
- बार्सिलोना
टॉप-10 में कौन से दो एशियाई शहर हैं?
टोक्यो (चौथा) और सिंगापुर (छठा) और भारत का सबसे ऊंचे रैंक वाला शहर बेंगलुरु है, जिसे देश की तकनीकी राजधानी कहा जाता है। इसके अलावा बेंगलुरु को “भारत की सिलिकॉन वैली” भी कहा जाता है, जिसने वैश्विक स्तर पर 29वां स्थान हासिल किया। इसके बाद मुंबई (वित्तीय राजधानी) 40वें, दिल्ली (राष्ट्रीय राजधानी) 54वें और हैदराबाद 82वें स्थान पर है।
रैंकिंग कैसे तय की गई?
रिपोर्ट में 10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों में से 270 से ज्यादा शहरों का मूल्यांकन किया गया। शिक्षा, संस्कृति, कनेक्टिविटी, नाइटलाइफ़, सुरक्षा, स्वच्छता, स्वास्थ्य सेवाएं आदि कई पैमानों पर अध्ययन किया गया। सभी कारकों के विश्लेषण के बाद हर शहर को तीन मुख्य स्तंभों, रहने की योग्यता (Liveability), प्यार करने योग्यता (Lovability) और समृद्धि (Prosperity) के आधार पर “प्लेस पावर स्कोर” दिया गया। यहां रहने योग्यता का मतलब- जीवन यापन की सुविधा, रहन-सहन की लागत, स्वच्छता और स्वास्थ्य सेवाएं हैं। जबकि प्यार करने योग्यता से मतलब वहां रहने वाले लोग कितने खुश हैं। समृद्धि का अर्थ नौकरियों के अवसर, शिक्षा का स्तर, आय, कॉर्पोरेट उपस्थिति, स्टार्टअप इकोसिस्टम और वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता की क्या स्थिति है। इस तरह लंदन एक बार फिर दुनिया का नंबर-1 शहर बना रहा।