ढाका: पाकिस्तान ने बांग्लादेश के साथ JF-17 फाइटर जेट की बिक्री और एक रक्षा समझौते पर बातचीत की पुष्टि की है। बांग्लादेशी मीडिया की रिपोर्ट्स के मुताबिक, दोनों देशों के वायुसेना प्रमुखों ने इस्लामाबाद में इस पर विस्तार से चर्चा की। पाकिस्तान की सेना की प्रेस विंग के हवाले से डेली स्टार अखबार ने बुधवार को बताया कि पाकिस्तान के एयर चीफ मार्शल जहीर अहमद बाबर सिद्धू और बांग्लादेश के एयर चीफ मार्शल हसन महमूद खान ने JF-17 थंडर नाम के इस मल्टी-रोल कॉम्बैट एयरक्राफ्ट की खरीद पर गहन बातचीत की।
बांग्लादेश को सपोर्ट सिस्टम भी देगा पाकिस्तान
बता दें कि JF-17 थंडर को पाकिस्तान और चीन ने मिलकर बनाया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि मंगलवार को जारी किए गए बयान में पाकिस्तान ने बांग्लादेश को सुपर मुश्शाक ट्रेनर एयरक्राफ्ट की तेजी से डिलीवरी का आश्वासन दिया है। इसके साथ ही, बांग्लादेश को पूरी ट्रेनिंग और लंबे समय तक सपोर्ट सिस्टम भी मुहैया कराया जाएगा। बता दें कि पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की सत्ता से बेदखली के बाद पिछले कुछ महीनों में बांग्लादेश ने पाकिस्तान से नजदीकी बढ़ाने की कोशिश की है। एक समय दुश्मन के तौर पर एक-दूसरे को देखने वाले ये दोनों देश अब तेजी से करीब आते दिख रहे हैं।
ढाका और कराची के बीच डायरेक्ट फ्लाइट्स
दोनों देशों के वायुसेना प्रमुखों की बैठक 28 दिसंबर को पाकिस्तान के हाई कमिश्नर इमरान हैदर की बांग्लादेश के चीफ एडवाइजर प्रोफेसर मुहम्मद यूनुस से हुई मुलाकात के ठीक बाद हुई है। यह मुलाकात ढाका के स्टेट गेस्ट हाउस में हुई थी। चीफ एडवाइजर की प्रेस विंग के मुताबिक, पाकिस्तान के हाई कमिश्नर ने कहा कि ढाका और कराची के बीच डायरेक्ट फ्लाइट्स जनवरी में शुरू होने की उम्मीद है। दोनों पक्षों ने ट्रेड, इन्वेस्टमेंट और एविएशन में सहयोग बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा की। इसके अलावा, कल्चरल, एजुकेशनल और मेडिकल एक्सचेंज को बढ़ावा देकर दोनों दक्षिण एशियाई देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने पर जोर दिया गया।
JF-17 फाइटर जेट की खासियतें और कमियां
JF-17 थंडर एक हल्का मल्टी-रोल फाइटर जेट है, जो पाकिस्तान एयरोनॉटिकल कॉम्प्लेक्स (PAC) और चीन की चेंगदू एयरक्राफ्ट कॉर्पोरेशन (CAC) ने मिलकर बनाया है। यह जेट मुख्य रूप से एक्सपोर्ट के लिए डिजाइन किया गया है और इसे सस्ता रखा गया है, ताकि विकासशील देश इसे आसानी से खरीद सकें। इसकी कुछ मुख्य खासियतें इस प्रकार हैं:
- सिंगल इंजन डिजाइन: इसमें सिर्फ एक इंजन है, जो मेंटेनेंस का समय और खर्च कम करता है। ट्विन-इंजन वाले जेट्स की तुलना में यह ज्यादा किफायती है।
- एडवांस्ड एवियोनिक्स और कॉकपिट: इसमें ग्लास कॉकपिट है, जिसमें डिजिटल एवियोनिक्स सिस्टम हैं। फ्लाई-बाय-वायर फ्लाइट कंट्रोल सिस्टम इसे आसानी से उड़ाने में मदद करता है।
- कॉम्बैट कैपेबिलिटी: यह बियॉन्ड-विजुअल-रेंज (BVR) कॉम्बैट में सक्षम है, यानी दूर से दुश्मन पर हमला कर सकता है। इसमें PL-10E और PL-15 जैसी एडवांस्ड एयर-टू-एयर मिसाइलें लगाई जा सकती हैं। इसमें हेलमेट-माउंटेड डिस्प्ले (HMD) और रडार वॉर्निंग रिसीवर (RWR) भी हैं, जो पायलट को बेहतर सिचुएशनल अवेयरनेस देते हैं।
- इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर: यह दुश्मन के कम्युनिकेशन और सेंसर्स को बाधित करने की क्षमता रखता है।
- मल्टी-रोल फंक्शन: एयर-टू-एयर कॉम्बैट के अलावा एयर-टू-ग्राउंड हमले भी कर सकता है। इसमें एक्टिव इलेक्ट्रॉनिकली स्कैन्ड ऐरे (AESA) रडार है, जो अच्छा वीपन्स पैकेज सपोर्ट करता है।
- परफॉर्मेंस: इसकी एयरफ्रेम लाइफ 3,000 घंटे की है, और अगर सालाना 150-200 घंटे उड़ाया जाए तो यह लंबे समय तक काम कर सकता है। इसकी तुलना F-16 जैसे जेट्स से की जाती है, लेकिन यह उससे ज्यादा सस्ता है।
हालांकि, JF-17 की कुछ कमियां भी हैं, जो इसे कुछ आधुनिक फाइटर जेट्स से पीछे रखती हैं:
- AESA रडार की कूलिंग: इसका रडार एयर-कूल्ड है, जो लिक्विड-कूल्ड रडार की तुलना में कम असरदार है। इससे इसका मतलब टाइम बिटवीन फेल्यर्स (MTBF) कम हो सकता है, यानी यह जल्दी खराब हो सकता है।
- सिंगल इंजन की सीमाएं: हालांकि मेंटेनेंस में फायदा है, लेकिन अगर इंजन फेल हो जाए तो रिस्क ज्यादा है, जबकि ट्विन-इंजन वाले जेट्स में बैकअप होता है।
- सीमित एडवांसमेंट: यह यूरोफाइटर या राफेल जैसे टॉप-टियर जेट्स की तुलना में कम एडवांस्ड है। इसका डिजाइन मुख्य रूप से एक्सपोर्ट के लिए है, इसलिए इसमें कुछ हाई-एंड टेक्नोलॉजी गायब है।
- एयरफ्रेम लाइफ: 3,000 घंटे की लाइफ कुछ अन्य जेट्स से कम है, जिससे लंबे समय में ज्यादा मेंटेनेंस की जरूरत पड़ सकती है।
इस सौदे का भारत पर क्या असर पड़ेगा?
अगर यह सौदा होता है और बांग्लादेश JF-17 खरीदता है, तो भारत को कोई बड़ा फर्क नहीं पड़ने वाला। भारत की एयरफोर्स काफी मजबूत है, जिसमें राफेल, सुखोई-30एमकेआई और तेजस जैसे एडवांस्ड फाइटर जेट्स हैं। भारत का डिफेंस बजट और टेक्नोलॉजी दोनों ही पाकिस्तान और बांग्लादेश से कहीं आगे हैं। भारत की रणनीतिक स्थिति भी मजबूत है, और वह क्षेत्रीय सुरक्षा को बनाए रखने में सक्षम है। यह सौदा दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ाएगा, लेकिन भारत की सैन्य ताकत पर इसका कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा। हालांकि यह घटनाक्रम दक्षिण एशिया में बदलते रिश्तों को दिखाता है, जहां पाकिस्तान और बांग्लादेश पुराने मतभेदों को भुलाकर आर्थिक और सैन्य सहयोग की ओर बढ़ रहे हैं।