Wednesday, January 28, 2026
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अमेरिका से जंग हुई तो ईरान का खुलकर साथ देगा यह मुस्लिम देश, सुप्रीम लीडर ने जारी किया VIDEO

अगर अमेरिका ने किसी भी सूरत में तेहरान पर हमला किया तो पड़ोसी मुस्लिम देश तेहरान के साथ खड़ा होगा। लेबनान के शिया लीडर ने एक वीडियो बयान जारी करके यह घोषणा की है।

Written By: Dharmendra Kumar Mishra @dharmendramedia
Published : Jan 28, 2026 10:51 pm IST, Updated : Jan 28, 2026 10:51 pm IST
ईरान (प्रतीकात्मक फोटो)- India TV Hindi
Image Source : AP ईरान (प्रतीकात्मक फोटो)

बेरुतः ईरान पर अगर अमेरिका ने हमला किया तो लेबनान सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के पक्ष में खड़ा होगा। लेबनान के सुप्रीम इस्लामिक शिया काउंसिल के इमाम ने ईरान के साथ खड़े होने की घोषणा की है। लेबनान के सुप्रीम इस्लामिक शिया काउंसिल (अल-मजलिस अल-इस्लामी अल-शिया अल-अलाई) ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण बयान जारी किया है, जिसमें कहा गया है कि वे इमाम खामेनेई के साथ खड़े हैं। 

खामेनेई पर हमला, पूरे शिया समुदाय पर हमला

लेबनान के सुप्रीम लीडर का यह बयान ऐसे समय में आया है, ईरान पर अमेरिकी हमले की धमकी के बीच क्षेत्रीय तनाव चरम पर है। खासकर इजरायल के हमलों और ईरान-समर्थित समूहों के बीच जारी संघर्ष के बीच यह बयान काफी अहम है। काउंसिल के उपाध्यक्ष शेख अली अल-खतीब ने स्पष्ट किया कि आयतुल्लाह खामेनेई को कोई भी नुकसान पहुंचाना पूरी शिया उम्माह पर युद्ध की घोषणा के समान होगा। उन्होंने कहा कि ईरान के इस्लामी क्रांति के नेता के खिलाफ कोई भी कार्रवाई शिया समुदाय के खिलाफ वैश्विक हमला मानी जाएगी। 

ईरान के खुले समर्थन में आया लेबनान

लेबनान खुलकर ईरान के समर्थन में आ गया है। शिया नेता का यह बयान लेबनान में शिया समुदाय की एकजुटता और ईरान के साथ उनके गहरे वैचारिक एवं राजनीतिक जुड़ाव को दर्शाता है। सुप्रीम इस्लामिक शिया काउंसिल लेबनान की शिया समुदाय की आधिकारिक संस्था है, जिसकी स्थापना 1969 में इमाम मूसा सद्र ने की थी। यह संस्था शिया धर्मीय मामलों, सामाजिक कल्याण, शिक्षा और राजनीतिक प्रतिनिधित्व की देखरेख करती है। लेबनान में शिया आबादी काफी प्रभावशाली है, और यह काउंसिल हिजबुल्लाह जैसे संगठनों के साथ निकट संबंध रखती है, जो ईरान के मजबूत समर्थक हैं।

खामेनेई इस्लामिक न्यायविद के संरक्षक

बता दें कि ईरान के सुप्रीम लीडर खामेनेई को शिया दुनिया में विलायत-ए-फकीह (इस्लामी न्यायविद् की संरक्षकता) का प्रमुख प्रतीक मानते हैं। लेबनान के शिया नेतृत्व का यह रुख दर्शाता है कि वे ईरान के साथ अपनी प्रतिबद्धता को कभी कमजोर नहीं होने देंगे। ऐसे बयानों से क्षेत्रीय राजनीति पर गहरा असर पड़ता है। यह न केवल लेबनान में शिया एकता को मजबूत करता है, बल्कि ईरान के "प्रतिरोध अक्ष" को भी समर्थन प्रदान करता है। हालांकि, यह लेबनान के आंतरिक राजनीतिक संतुलन को भी प्रभावित कर सकता है, जहां विभिन्न संप्रदायों के बीच तनाव पहले से मौजूद है। 

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