यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमिशन (UGC) द्वारा जारी नये नियमों के खिलाफ सवर्ण समाज का विरोध बढ़ता जा रहा है। दिल्ली में UGC मुख्यालय से लेकर लखनऊ, पटना, रायबरेली, गोरखपुर, मुज़फ्फरपुर, जयपुर समेत उत्तर भारत के कई शहरों में सवर्ण समुदाय के छात्रों ने प्रदर्शन किया।
प्रदर्शनकारियों का कहना था कि नये नियमों का इस्तेमाल सवर्ण छात्रों के खिलाफ हो सकता है। उनका कहना है कि वे समाज के किसी भी वर्ग के साथ अन्याय के पक्ष में नहीं हैं, अगर कहीं दलित, आदिवासी या पिछड़ा वर्ग के छात्रों के साथ ज्यादती होती है तो इसके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन न्याय की प्रक्रिया भी पारदर्शी हो।
विरोध करने वालों का कहना है कि UGC अधिनियम के तहत जो बदलाव किए गए हैं, वे पूरी तरह से सवर्णों के खिलाफ हैं, न तो समता कमेटी में सवर्ण वर्ग का प्रतिनिधि होना जरूरी है, न ही झूठी शिकायत करने वाले के खिलाफ कार्रवाई का कोई प्रावधान है।
ऐसे में अगर किसी दलित, आदिवासी या OBC वर्ग के छात्र के साथ किसी सवर्ण छात्र का मामूली झगड़ा होता है, तो सवर्ण छात्र के खिलाफ इन नियमों का इस्तेमाल हथियार की तरह होगा, उसके खिलाफ झूठी शिकायत की जाएगी। फिर वो छात्र पढ़ाई के बजाए खुद को बेगुनाह साबित करने में लगा रहेगा, ये तो अन्याय है, इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
UGC के अध्यक्ष विनीत जोशी ने सवर्ण सेना के प्रतिनिधियों से मुलाकात की। सवर्ण सेना ने कहा है कि अगर UGC ने 15 दिन के भीतर नियमों में सुधार नहीं किया तो आंदोलन होगा।
शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने कहा कि UGC एक्ट में बदलाव सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर किया गया है, जो इसका विरोध कर रहे हैं, सरकार उनकी चिंताओं से वाकिफ है और उनका समाधान निकालेगी। धर्मेन्द्र प्रधान ने आश्वस्त किया कि सरकार इस कानून का दुरूपयोग नहीं होने देगी, इसलिए किसी को डरने की ज़रूरत नहीं है।
धर्मेंद्र प्रधान भले ही ये कह रहे हों कि UGC एक्ट का दुरुपयोग नहीं होने देंगे लेकिन सिर्फ आश्वासन से काम नहीं चलेगा क्योंकि अब ये मामला सियासी हो गया है और अफसरों के इस्तीफे होने लगे हैं।
अयोध्या में GST के डिप्टी कमिश्नर ने सरकार का समर्थन करते हुए इस्तीफा दे दिया, उससे एक दिन पहले बरेली के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए इस्तीफा दे दिया।
गुणों के आधार पर देखें तो UGC कानून में बदलाव के गलत इस्तेमाल होने की पूरी संभावनाएं हैं। ये कहना काफी नहीं है कि सरकार किसी पर जुल्म नहीं होने देगी लेकिन ये मामला राजनीतिक भी है।
ब्राह्मण और राजपूत समाज का वोट ज्यादा नहीं है, इसलिए उनकी अनदेखी की जाती है। ये राजनीतिक दलों की अपनी विवशता है। इसीलिए समाजवादी पार्टी, कांग्रेस, बसपा सब पर्दे के पीछे से इस मुद्दे को हवा दे रहे हैं, ये सोचकर कि इससे बीजेपी को नुकसान होगा।
बीजेपी में भी ब्राह्मण समाज के कई ऐसे नेता हैं जो काफी पहले से कह रहे हैं कि उनके साथ अन्याय हो रहा है। उनको अब एक और बहाना मिल गया है। वो इस मामले का इस्तेमाल दबाव बनाने के लिए करेंगे, इसीलिए इस मसले को लटका कर नहीं छोड़ा जा सकता।
समाज समतामूलक हो, सबको बराबरी का हक मिले, जिनके साथ पहले अन्याय हुआ है, उनका ज्यादा ध्यान रखा जाए, ये सब ठीक है, लेकिन इसके साथ-साथ अब अन्याय और परेशानी के नए रास्ते न खुलें, इसका भी ध्यान रखना जरूरी है। वरना आगे जाकर बड़ी समस्या होगी। (रजत शर्मा)
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