Friday, February 13, 2026
Advertisement
  1. Hindi News
  2. विदेश
  3. एशिया
  4. काबुल पर कब्जे के लिए तालिबान को दिया गया था न्यौता, हामिद करजई ने किया खुलासा

काबुल पर कब्जे के लिए तालिबान को दिया गया था न्यौता, हामिद करजई ने किया खुलासा

Reported by: Agency Published : Dec 15, 2021 05:02 pm IST, Updated : Dec 15, 2021 05:02 pm IST

करजई और अब्दुल्ला ने गनी के साथ बैठक की तथा उनके बीच इस बात पर सहमति बनी कि सत्ता साझेदारी समझौते पर बातचीत के लिए 15 अन्य की सूची के साथ अगले दिन वे दोहा रवाना होंगे। 

Taliban was invited to capture Kabul, revels Hamid Karzai- India TV Hindi
Image Source : AP राष्ट्रपति अशरफ गनी के अफगानिस्तान छोड़ने से ठीक पहले तालिबान को काबुल बुलाया गया था।

Highlights

  • तेरह वर्षों तक देश के राष्ट्रपति रहे करजई ने काबुल छोड़ने से इनकार कर दिया था।
  • करजई ने कहा कि 15 अगस्त तड़के उन्होंने सूची तैयार करने का इंतजार किया।
  • अपराह्न पौने तीन बजे यह करीब करीब स्पष्ट हो गया कि गनी शहर से जा चुके हैं।

काबुल: राष्ट्रपति अशरफ गनी के अफगानिस्तान छोड़ने से ठीक पहले तालिबान को काबुल बुलाया गया था। यह बात उन्हें निमंत्रण देने वाले शख्स ने कही है और वो शख्स हैं पूर्व अफगान राष्ट्रपति हामिद करजई। करजई ने अफगान राष्ट्रपति अशरफ गनी की अफगानिस्तान से गुप्त एवं आकस्मिक रवानगी के बारे में रहस्योद्घाटन किया। उन्होंने बताया कि कैसे उन्होंने लोगों की रक्षा की खातिर तालिबान को शहर में आने का न्यौता दिया ताकि देश एवं शहर अराजकता में न फंस जाए तथा, जो अवांछित तत्व देश को लूटते, वे दुकानों को नहीं लूटने लगें। जब गनी देश से गये तब उनके सुरक्षा अधिकारी भी चले गये। करजई ने जब यह जानने के लिए रक्षा मंत्री बिस्मिल्ला खान से संपर्क किया कि क्या सरकार का कोई अवशेष अब भी बचा है, तब खान ने उनसे यह पूछा भी कि क्या वह काबुल छोड़ना चाहते हैं।

करजई को पता चला कि कोई नहीं बचा, यहां तक कि काबुल के पुलिस प्रमुख भी नहीं रूके। तेरह वर्षों तक देश के राष्ट्रपति रहे करजई ने काबुल छोड़ने से इनकार कर दिया। वह 9/11 के हमले के आलोक में तालिबान को सत्ताच्युत किये जाने के बाद राष्ट्रपति बने थे। शहर के मध्य में अपने परिसर में करजई इस बात पर कायम थे कि उनकी, सरकार के मुख्य वार्ताकार अब्दुल्ला अब्दुल्ला और दोहा में तालिबान नेतृत्व की आखिरी घड़ी तक कोशिश थी कि किसी समझौते के तहत तालिबान राजधानी में कदम रखे, लेकिन गनी की रवानगी ने आखिरी वक्त पर इसपर पानी फेर दिया। 

इस संभावित सौदे की उल्टी गिनती तालिबान के सत्ता पर काबिज होने से एक दिन पहले 14 अगस्त को शुरू हुई। करजई और अब्दुल्ला ने गनी के साथ बैठक की तथा उनके बीच इस बात पर सहमति बनी कि सत्ता साझेदारी समझौते पर बातचीत के लिए 15 अन्य की सूची के साथ अगले दिन वे दोहा रवाना होंगे। करजई ने बताया कि तालिबान तब तक काबुल के बाहरी हिस्से में पहुंच चुके थे लेकिन कतर में उसके नेतृत्व ने वादा किया कि जबतक समझौता हो नहीं जाता तबतक वे बाहर ही रहेंगे। करजई ने कहा कि 15 अगस्त तड़के उन्होंने सूची तैयार करने का इंतजार किया। लेकिन शहर में बेचैनी थी और नाजुक घड़ी थी। तालिबान के काबिज हो जाने की अफवाहें फैलने लगीं। 

करजई ने दोहा से संपर्क किया, उन्हें बताया गया कि तालिबान शहर में दाखिल नहीं होंगे। करजई के अनुसार पूर्वाह्न को तालिबान नेता यह कहने लगे कि सरकार अपनी जगह बनी रहे और वह नहीं जाए एवं उनका शहर में दाखिल होने का इरादा नहीं है। उन्होंने कहा, ‘‘मैंने एवं अन्य ने विभिन्न अधिकारियों से बात की तथा हमें आश्वासन दिया गया कि हां, यही बात है और यह कि अमेरिकी एवं सरकारी (सैन्य) बल अपनी जगह पर डटे हैं तथा काबुल फतह नहीं होगा।’’ लेकिन अपराह्न पौने तीन बजे यह करीब करीब स्पष्ट हो गया कि गनी शहर से जा चुके हैं। 

एसोसिएटेड प्रेस (एपी) के साथ साक्षात्कार में करजई ने बताया कि उन्होंने रक्षा मंत्री, गृहमंत्री से संपर्क किया, उन्होंने काबुल के पुलिस प्रमुख के बारे में पता किया। पता चला कि सारे जा चुके हैं। करजई ने कहा, ‘‘राजधानी में कोई अधिकारी नहीं था, पुलिस प्रमुख, कोर कमांडर, अन्य इकाइयां कोई शहर में नहीं था। सभी शहर से चुके थे।’’ गनी की अपनी सुरक्षा इकाई के उपप्रमुख ने करजई से संपर्क कर उन्हें महल में आने एवं राष्ट्रपति का पद संभालने को कहा। लेकिन उन्होंने ऐसा करने से इनकार कर दिया एवं कहा कि कानूनी रूप से उन्हें ऐसा करने का अधिकार नहीं है। 

उसके विपरीत पूर्व राष्ट्रपति ने चीजें सार्वजनिक करने का फैसला किया एवं टेलीविजन पर संदेश प्रसारित किया ताकि अफगान लोग जान पायें कि हम सभी यहां हैं। इस दौरान उनके बच्चे भी उनके साथ थे। करजई इस बात पर कायम हैं कि यदि गनी काबुल में बने रहते तो शांतिपूर्ण सत्ता परिवर्तन का समझौता होता। वह यहां अपनी पत्नी एवं बच्चों के साथ रहते हैं। उन्होंने कहा, ‘‘बिल्कुल। बिल्कुल। इसी बात की हम तैयारी कर रहे थे, हम उस शाम या अगली सुबह शांति परिषद के अध्यक्ष के साथ दोहा जाने एवं समझौते को अंतिम रूप देने की की उम्मीद कर रहे थे।’’

उन्हेांने कहा, ‘‘और मुझे विश्वास है कि तालिबान नेता उसी, उसी उद्देश्य के लिए दोहा में हमारा इंतजार कर रहे थे। आज करजई नियमित रूप से तालिबान नेतृत्व से मिलते हैं और कहते हैं कि दुनिया उसके साथ सहयोग करे। उन्होंने कहा कि यह बात भी उतना ही अहम है कि अफगानों को साथ आना होगा। उन्होंने कहा कि 40 साल से अधिक समय से अफगानिनस्तान पर युद्ध छाया रहा और पिछले 20 साल में अफगानों ने हर तरफ से नुकसान उठाया। करजई ने कहा, ‘‘अफगानों ने सभी तरफ से जिंदगियां खोयी हैं। अफगान सेना ने नुकसान उठाया, अफगान पुलिस ने नुकसान उठाया, तालिबान सैनिकों ने भी नुकसान उठाया।’’ उन्होंने कहा, ‘‘उसका अंत बस यही हो सकता है कि अफगान साथ आएं और अपना मार्ग खुद ढूंढे।’’

Latest World News

Google पर इंडिया टीवी को अपना पसंदीदा न्यूज सोर्स बनाने के लिए यहां
क्लिक करें

India TV हिंदी न्यूज़ के साथ रहें हर दिन अपडेट, पाएं देश और दुनिया की हर बड़ी खबर। Asia से जुड़ी लेटेस्ट खबरों के लिए अभी विज़िट करें विदेश

Advertisement
Advertisement
Advertisement