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यूरोपीय संघ की अदालत ने हंगरी पर ठोका 21.6 करोड़ अमेरिकी डॉलर का जुर्माना, जानें क्या है पूरा मामला

 Published : Jun 13, 2024 08:53 pm IST,  Updated : Jun 13, 2024 08:53 pm IST

एक मामले में यूरोपीय संघ की अदालत की अवमानना करना हंगरी को भारी पड़ गया है। यूरोपियन यूनियन कोर्ट ने हंगरी पर 21.6 करोड़ अमेरिकी डॉलर से अधिक का जुर्माना लगाया है। अगर इस बार भी अदालत के आदेशों की अनदेखी की गई तो सजा और बढ़ सकती है।

यूरोपीय संघ की कोर्ट। - India TV Hindi
यूरोपीय संघ की कोर्ट। Image Source : REUTERS

ब्रसेल्सः यूरोपीय संघ की शीर्ष अदालत ने हंगरी पर बृहस्पतिवार को 21.6 करोड़ अमेरिकी डॉलर (20 करोड़ यूरो) का जुर्माना ठोका है। इससे हंगरी की सरकार हरकत में आ गई है। कोर्ट ने जल्द यह जुर्माना भरने का आदेश दिया है। हंगरी पर यह जुर्माना यूरोपीय न्यायालय के पिछले फैसले के बावजूद यूरोपीय संघ के शरण संबंधी नियमों का उल्लंघन करने के आरोप में किया गया है। इसके अलावा, भविष्य में नियमों का पालन न करने पर हंगरी को प्रतिदिन 10 लाख यूरो का जुर्माना भी भरना होगा।

यूरोपियन कोर्ट ऑफ जस्टिस (ईसीजे) ने एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि हंगरी ने लक्जमबर्ग में शीर्ष यूरोपीय संघ के न्यायाधीशों के 2020 के फैसले को लागू नहीं किया है। इसमें कहा गया है कि यह यूरोपीय संघ के कानूनों का गंभीर उल्लंघन है। इस बीच हंगरी के प्रधानमंत्री विक्टर ऑर्बन ने इस फैसले की निंदा करते हुए इसे “अपमानजनक और अस्वीकार्य” बताया। उन्होंने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर कहा, ‘‘ऐसा लगता है कि ब्रसेल्स के नौकरशाहों के लिए अवैध प्रवासी अपने यूरोपीय नागरिकों से अधिक महत्वपूर्ण हैं।’’

हंगरी सरकार हुई सख्त

हंगरी की सरकार ने देश में प्रवेश करने वाले लोगों के प्रति कड़ा रुख अपनाया है, क्योंकि 2015 में 10 लाख से अधिक लोग यूरोप में प्रवेश कर चुके थे, जिनमें से ज्यादातर सीरिया में संघर्ष से भागकर आये थे। यह मामला उस संकट के मद्देनजर हंगरी द्वारा अपनी शरण संबंधी प्रणाली में किये गये बदलावों से संबंधित है, जब लगभग 4,00,000 लोग पश्चिमी यूरोप जाने के लिए हंगरी से होकर गुजरे थे।

वर्ष 2020 में कोविड-19 महामारी के बाद, हंगरी सरकार ने भी एक कानून पारित किया था, जिसके तहत बेलग्रेड या कीव की यात्रा करने के लिए अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा चाहने वाले लोगों के लिए हंगरी में प्रवेश करने के वास्ते वहां के दूतावासों में यात्रा परमिट के लिए आवेदन करना अनिवार्य कर दिया गया था। यूरोपीय आयोग इस कानून को लेकर यूरोपीय न्यायालय का रुख किया था तथा इस बात पर जोर दिया था कि हंगरी ईयू के नियमों के तहत अपने दायित्वों को पूरा करने में विफल रहा है। (एपी) 

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