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SCO बैठक में एस जयशंकर ने आतंकवाद पर दुनिया को चेताया, बोले- 'कोई लीपापोती नहीं, कोई बहाना नहीं'

SCO समिट में भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने आतंकवाद खे खिलाफ कड़ा रुख दिखते हुए सख्त संदेश दिया है। जयशंकर ने कहा कि हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि SCO की स्थापना आतंकवाद, अलगाववाद, अतिवाद की समाप्ति के लिए हुआ था।

Edited By: Amit Mishra @AmitMishra64927
Published : Nov 18, 2025 06:23 pm IST, Updated : Nov 18, 2025 06:37 pm IST
S Jaishankar- India TV Hindi
Image Source : AP S Jaishankar

S Jaishankar SCO Summit Moscow: भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने मंगलवार को रूस में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन में आतंकवाद पर दुनिया को कड़ा संदेश दिया। उन्होंने कहा कि दुनिया को इस खतरे के सभी रूपों और अभिव्यक्तियों के प्रति जीरो टॉलरेंस दिखानी चाहिए। उन्होंने कहा आतंकवाद के मामले में ना लीपापोती ना ही कोई बहाना होना चाहिए। उन्होंने कहा कि आतंकवाद को ना तो नजरअंदाज नहीं किया जा सकता और ना ही छिपाया जा सकता है। विदेश मंत्री ने इस बात पर भी जोर दिया कि भारत को आतंकवाद के खिलाफ अपने लोगों की रक्षा करने का अधिकार है और वह इसका प्रयोग करेगा।

एस जयशंकर ने क्या कहा?

एस जयशंकर ने कहा कि आतंकवाद से मुंह नहीं मोड़ा जा सकता, इसपर लीपापोती नहीं की जा सकती है। उन्होंने इस बात भी पर जोर दिया कि भारत को आतंकवाद के खिलाफ अपने लोगों की रक्षा करने का अधिकार है और वह इसका प्रयोग करेगा। भारत की सामूहिक और बिना किसी समझौते वाली कार्रवाई की मांग दोहराते हुए, उन्होंने एससीओ नेताओं से कहा कि आतंकवाद का मुकाबला साझा प्राथमिकता बनी रहनी चाहिए और इसमें सहिष्णुता के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए। यह जरूरी है कि दुनिया आतंकवाद के सभी रूपों और अभिव्यक्तियों के खिलाफ सख्त रुख अपनाए। आतंकवाद को ना तो उचित ठहराया जा सकता है, ना ही नजरअंदाज किया जा सकता है।

'खतरे और भी गंभीर हो गए हैं'

एस जयशंकर ने कहा कि बीते वर्षों में खतरे और भी गंभीर हो गए हैं। जयशंकर ने कहा, ‘‘यहां मौजूद कई लोगों के साथ मुक्त व्यापार समझौते करने के भारत के प्रयास प्रासंगिक हैं।’’ जयशंकर ने कहा कि SCO सदस्यों के साथ भारत के दीर्घकालिक संबंध इसे विशेष रूप से प्रासंगिक बनाते हैं। उन्होंने कहा, ‘‘एक सभ्यागत राष्ट्र के रूप में, भारत का दृढ़ विश्वास है कि लोगों के बीच आदान-प्रदान किसी भी वास्तविक संबंध का मूल है। हमारे बुद्धिजीवियों, कलाकारों, खिलाड़ियों और सांस्कृतिक हस्तियों के बीच बेहतर संपर्क को सुगम बनाने से SCO में बेहतर समझ का मार्ग प्रशस्त होगा।’’ 

क्यों हुई थी SCO की स्थापना?

SCO समिट में सभी सदस्य देशों के प्रतिनिधियों के सामने एस जयशंकर ने कहा कि हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि SCO की स्थापना आतंकवाद, अलगाववाद, अतिवाद की समाप्ति के लिए हुआ था। SCO की स्थापना 2001 में शंघाई में एक शिखर सम्मेलन में रूस, चीन, किर्गिज गणराज्य, कजाकिस्तान, ताजिकिस्तान और उजबेकिस्तान के राष्ट्रपतियों द्वारा की गई थी। भारत और पाकिस्तान 2017 में इसके स्थायी सदस्य बने। जुलाई 2023 में, भारत द्वारा आयोजित ऑनलाइन शिखर सम्मेलन में ईरान को एससीओ के नए स्थायी सदस्य का दर्जा दिया गया था। 

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