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कश्मीर मामले में अमेरिका दक्षिण एशिया में संतुलित रुख रखना चाहता है: रिपोर्ट

 Reported By: Bhasha
 Published : Aug 22, 2019 02:35 pm IST,  Updated : Aug 22, 2019 02:35 pm IST

भारत द्वारा जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे को समाप्त करने तथा राज्य को दो केंद्रशासित प्रदेशों में बांटे जाने के बाद अमेरिका दक्षिण एशिया में संतुलित रुख चाहता है।

कश्मीर मामले में अमेरिका दक्षिण एशिया में संतुलित रुख रखना चाहता है: रिपोर्ट- India TV Hindi
कश्मीर मामले में अमेरिका दक्षिण एशिया में संतुलित रुख रखना चाहता है: रिपोर्ट

वाशिंगटन: भारत द्वारा जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे को समाप्त करने तथा राज्य को दो केंद्रशासित प्रदेशों में बांटे जाने के बाद अमेरिका दक्षिण एशिया में संतुलित रुख चाहता है। यह बात कांग्रेसनल रिसर्च सर्विस (सीआरएस) की एक रिपोर्ट में कही गई है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कश्मीर संबंधी इस कदम के समय में अमेरिकी राष्ट्रपति की मध्यस्थता संबंधी पेशकश का भी योगदान रहा होगा। सीआरएस की हालिया रिपोर्ट में कहा गया है कि कश्मीर को लेकर लंबे समय से अमेरिका का रुख यही रहा है कि यह मामला भारत और पाकिस्तान के बीच बातचीत के जरिए कश्मीरी लोगों की भावनाओं पर गौर करते हुए सुलझाया जाना चाहिए। 

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15 से अधिक पन्नों की इस रिपोर्ट में कहा गया है, ‘‘अमेरिका मानवाधिकारों की रक्षा करते हुए और अमेरिका-भारत की व्यापक साझेदारी को देखते हुए संतुलित रुख रखना चाहता है। वहीं वह पाकिस्तान के साथ भी सहयोगात्मक संबंध बरकरार रखना चाहता है।’’ इस रिपोर्ट में कहा गया है कि ट्रंप प्रशासन ने संबंधित क्षेत्र में मानवाधिकारों की रक्षा और शांति का आह्वान किया है तथा कश्मीर को लेकर मध्यस्थता के लिए ट्रंप के बयान ने जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा समाप्त करने संबंधी भारत सरकार के फैसले के समय में योगदान दिया होगा। 

सीआरएस की रिपोर्ट को अमेरिकी कांग्रेस का आधिकारिक रुख नहीं माना जाता है। कश्मीर को लेकर सीआरएस की रिपोर्ट 17 साल के बाद आई है। यह रिपोर्ट कश्मीर मामले के हालिया घटनाक्रम में अमेरिकी सांसदों की दिलचस्पी दिखाती है। कश्मीर: बैकग्राउंड, रिसेंट डेवलपमेंट्स एंड यूएस पॉलिसी की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कश्मीर में बढ़ा अलगाववादी आतंकवाद अफगानिस्तान की शांति वार्ता को प्रभावित कर सकता है, जिसमें पाकिस्तान मदद कर रहा है। 

रिपोर्ट के अनुसार, नई दिल्ली की प्रक्रिया भी संवैधानिक सवाल उठाती है क्योंकि जम्मू-कश्मीर में कड़े सैन्य सुरक्षा कदम उठाए गए हैं, जो मानवाधिकार आधार पर भारत की तीव्र आलोचना को जन्म देते हैं। इस रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कश्मीर में संभावित अशांति और हिंसा को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंताएं हैं और इसका असर क्षेत्रीय स्थिरता पर भी पड़ सकता है। 

इसमें यह भी कहा गया है कि ट्रंप सरकार ने अपने सार्वजनिक बयान को शांति और स्थिरता बरकरार रखने तथा मानवाधिकारों की रक्षा करने की टिप्पणी तक सीमित कर लिया है। इसमें यह भी कहा गया है कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की ओर से सभी पक्षों से शांति बनाए रखने की अपील की गई और अनौपचारिक तौर पर हुई सुरक्षा परिषद की बैठक के बाद संयुक्त राष्ट्र ने कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया।

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