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बिहार चुनाव 2025: राजपूत और यादव बहुल सीट है आरा विधानसभा क्षेत्र, जानिए पिछले 3 बार के चुनावी नतीजे

 Published : Sep 26, 2025 10:37 pm IST,  Updated : Nov 12, 2025 03:54 pm IST

आरा विधानसभा सीट पर राजपूत और यादव वोटरों का बोलबाला है। यहां पर मुस्लिम वोटर भी गेम चेंजर साबित होते हैं। जन सुराज जैसी नई पार्टियां जाति आधारित एजेंडे पर वोटरों को लुभाने की कोशिश कर रही हैं।

आरा विधानसभा चुनाव- India TV Hindi
आरा विधानसभा चुनाव Image Source : INDIA TV

बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर सरगर्मियां तेज हैं। सभी सीटों पर संभावित उम्मीदवारों ने चुनावी जनसभाएं करना शुरू कर दिया है। भोजपुर जिले की आरा विधानसभा सीट पर सियासी दलों की नजरें टिकी हुई हैं। यह सीट सामान्य श्रेणी की है। ये सीट भोजपुर जिले के मुख्यालय आरा शहर को समेटे हुए है। आरा विधानसभा क्षेत्र ग्रामीण-शहरी मिश्रित सीट है। 

राजपूत-यादव के वोटरों की संख्या ज्यादा

इस सीट पर असली खेल जातिगत समीकरण पर टिका है। आरा विधानसभा सीट में राजपूत-यादव के वोटरों की संख्या ज्यादा है। यहां पर मुस्लिम वोटर भी 10 प्रतिशत से अधिक हैं। भाजपा का लंबे समय से कब्जा रहा यह गढ़ अब महागठबंधन और जन सुराज जैसी नई ताकतों के लिए अग्निपरीक्षा बन सकता है।

जानिए इस सीट का जातीय समीकरण

आरा सीट पर जाति का बोलबाला है। राजपूत (भूमिहार-भट्ट) मतदाता करीब 25-30 प्रतिशत हैं, जो भाजपा का मजबूत आधार बने हुए हैं। यादव (15-20 प्रतिशत) महागठबंधन (आरजेडी-कांग्रेस) के पक्ष में झुकते हैं। मुस्लिम वोटर (10-12 प्रतिशत) अक्सर महागठबंधन को सपोर्ट करते हैं, जबकि अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) जैसे कोएरी-कुशवाहा (10-15 प्रतिशत) और दलित (एससी, 15 प्रतिशत) वोट एनडीए या वाम दलों के बीच बंटते हैं। जन सुराज जैसी नई पार्टियां जाति आधारित एजेंडे पर ईबीसी और युवा वोटरों को लुभाने की कोशिश कर रही हैं। 

2020 में यहां से बीजेपी उम्मीदवार ने दर्ज की जीत

आरा विधानसभा सीट पर पिछले तीन विधानसभा चुनावों (2010, 2015, 2020) में सियासी रंग बदलते रहे हैं। 2020 विधानसभा चुनाव में भाजपा के अमरेंद्र प्रताप सिंह ने 71,781 वोट (45.05 प्रतिशत) हासिल कर जीत दर्ज की। महागठबंधन की भाकपा-माले के कयामुद्दीन अंसारी 68,779 वोट (43.17 प्रतिशत) के साथ 3,002 वोट (1.91 प्रतिशत) से हार गए। निर्दलीय हाकिम प्रसाद तीसरे नंबर पर रहे। कुल 15 उम्मीदवार मैदान में थे और भाजपा ने अपनी पकड़ मजबूत की।

2015 में मोहम्मद नवाज आलम की हुई जीत

2015 विधानसभा चुनाव में महागठबंधन (तत्कालीन आरजेडी-जेडीयू) के मोहम्मद नवाज आलम ने 70,004 वोट (44.94 प्रतिशत) से भाजपा के अमरेंद्र प्रताप सिंह (69,338 वोट, 44.51 प्रतिशत) को महज 666 वोट (0.44 प्रतिशत) से हराया। यादव-मुस्लिम समीकरण ने यहां महागठबंधन को फायदा पहुंचाया, जबकि भाजपा राजपूत वोटों पर अड़ी रही।

20110 में बीजेपी उम्मीदवार अमरेंद्र प्रताप चुनाव जीते

2010 विधानसभा चुनाव में भाजपा के अमरेंद्र प्रताप सिंह ने फिर जीत हासिल की थी। जदयू के साथ एनडीए गठबंधन ने राजपूत-ओबीसी वोटों का ध्रुवीकरण कर आरजेडी को पीछे धकेला। वोट शेयर में भाजपा को करीब 49 प्रतिशत मिला, जबकि विपक्ष 39 प्रतिशत के आसपास रहा था।

 

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