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तस्वीरों में देखें पाकिस्तान का सबसे ऊंचा पर्वत, नाम भी जान लीजिए

Published : Jul 22, 2025 02:59 pm IST,  Updated : Jul 22, 2025 02:59 pm IST
पाकिस्तान एक ऐसा देश है जहां हिमालय, काराकोरम और हिंदू कुश जैसी विशाल पर्वत श्रृंखलाएं मिलती हैं। इन पर्वतों में विश्व के कुछ सबसे ऊंचे शिखर स्थित हैं। यहां एक ऐसा पर्वत है जो किसी भौगोलिक चमत्कार से कम नहीं है।
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पाकिस्तान एक ऐसा देश है जहां हिमालय, काराकोरम और हिंदू कुश जैसी विशाल पर्वत श्रृंखलाएं मिलती हैं। इन पर्वतों में विश्व के कुछ सबसे ऊंचे शिखर स्थित हैं। यहां एक ऐसा पर्वत है जो किसी भौगोलिक चमत्कार से कम नहीं है।
पाकिस्तान का सबसे ऊंचा पर्वत K2 है जिसे माउंट गॉडविन ऑस्टिन के नाम से भी जाना जाता है। यह ना केवल पाकिस्तान का, बल्कि पूरी दुनिया का दूसरा सबसे ऊंचा पर्वत भी है। K2 की ऊंचाई: 8,611 मीटर (28,251 फीट) है।
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पाकिस्तान का सबसे ऊंचा पर्वत K2 है जिसे माउंट गॉडविन ऑस्टिन के नाम से भी जाना जाता है। यह ना केवल पाकिस्तान का, बल्कि पूरी दुनिया का दूसरा सबसे ऊंचा पर्वत भी है। K2 की ऊंचाई: 8,611 मीटर (28,251 फीट) है।
1856 में ब्रिटिश सर्वेक्षण अभियान के दौरान थॉमस मोंटगमरी नाम के सर्वेक्षक ने काराकोरम की चोटी का नामकरण "K2" किया। इसमें "K" का मतलब है Karakoram (काराकोरम) और "2" का मतलब था उस क्षेत्र में दूसरी ऊंचाई वाली चोटी।
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1856 में ब्रिटिश सर्वेक्षण अभियान के दौरान थॉमस मोंटगमरी नाम के सर्वेक्षक ने काराकोरम की चोटी का नामकरण "K2" किया। इसमें "K" का मतलब है Karakoram (काराकोरम) और "2" का मतलब था उस क्षेत्र में दूसरी ऊंचाई वाली चोटी।
K2 को पर्वतारोहण की दुनिया में सबसे कठिन चोटी माना जाता है। माउंट एवरेस्ट की तुलना में यहां चढ़ाई कहीं ज्यादा खतरनाक है। K2 बर्फ से ढकी चट्टानों, ग्लेशियरों और तेज हवाओं के लिए प्रसिद्ध है। यह पर्वत ट्रेकर्स और पर्वतारोहियों के लिए रोमांच से भरा स्वप्न है।
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K2 को पर्वतारोहण की दुनिया में सबसे कठिन चोटी माना जाता है। माउंट एवरेस्ट की तुलना में यहां चढ़ाई कहीं ज्यादा खतरनाक है। K2 बर्फ से ढकी चट्टानों, ग्लेशियरों और तेज हवाओं के लिए प्रसिद्ध है। यह पर्वत ट्रेकर्स और पर्वतारोहियों के लिए रोमांच से भरा स्वप्न है।
K2 पर मौसम बहुत ही अस्थिर और जानलेवा होता है। ठंडी हवाएं, बर्फीले तूफान और पत्थरों के गिरने की घटनाएं आम हैं। यहां पहली बार सफल चढ़ाई 31 जुलाई 1954 को इटली के पर्वतारोही अचिल कॉम्पग्नोनी और लिनो लासेडेली ने की थी।
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K2 पर मौसम बहुत ही अस्थिर और जानलेवा होता है। ठंडी हवाएं, बर्फीले तूफान और पत्थरों के गिरने की घटनाएं आम हैं। यहां पहली बार सफल चढ़ाई 31 जुलाई 1954 को इटली के पर्वतारोही अचिल कॉम्पग्नोनी और लिनो लासेडेली ने की थी।
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