परीक्षा को लेकर बच्चों में बढ़ने लगती है टेंशन, बाबा रामदेव से जानें एग्जाम के फोबिया से कैसे बचें?
वैसे तो जिंदगी हर कदम पर इम्तिहान लेती है लेकिन इसका पहला एहसास, हमें बोर्ड एग्जाम से होता है। जब हमें अच्छा करने का, ज्यादा से ज्यादा नंबर लाने का प्रेशर महसूस होता है। तभी तो प्रधानमंत्री मोदी को बच्चों से ये कहना पड़ा कि 24 घंटे सबके पास हैं। जीवन बोलना चाहिए, मार्क्स नहीं। जो खुद से कंपीटिशन करता है, उसका भरोसा कभी टूटता नहीं है। लेकिन ये बातें ना तो माता-पिता समझते हैं। ना ही टीचर्स या फिर कई बार स्टूडेंट्स भी टॉपर बनने। ज्यादा नंबर पाने की ख्वाहिश में पता ही नहीं चलता, कब इम्तिहान नाम का भूत उन पर हावी हो गया। और फिर प्रेशर इस कदर बढ़ता है कि बच्चे उसे हैंडल नहीं कर पाते। और कई बार कुछ तो जीवन से हार मान लेते हैं। तभी तो परीक्षा से पहले उनका हौसला बढ़ाने के लिए पीएम मोदी बच्चों से चर्चा करते हैं। उनकी दिक्कतें सुनते हैं और अपने एक्सपीरियस अपने ज्ञान से उनको रास्ता दिखाते हैं। स्टूडेंट्स को ऐसे गाइडेंस की जरूरत भी है ताकि उनका तनाव कम हो सके।
स्कूल डेज में एक्जाम का ये डर उन्हें छोटी उम्र में हाइपरटेंशन का मरीज बना रहा है। इसी का नतीजा है कि 25 की उम्र आते-आते दिल और किडनी की बीमारियां अपनी गिरफ्त में ले लेती हैं। यही वजह है कि 25 से 40 की उम्र में हार्ट अटैक, किडनी फेलियर और ब्रेन हैमरेज के मामले बढ़ रहे हैं। बिल्कुल, ऐसे में हमें ये समझना होग कोई भी एक्जाम जिंदगी से बड़ा नहीं होता और शायद तभी प्रधानमंत्री मोदी ने भी बच्चों से हेल्दी डाइट और मेडिटेशन को रुटीन में शामिल करने को कहा। तमाम वहीं बातें जो हर दिन योगगुरु स्वामी रामदेव हमें बताते हैं योगगुरु हमारे साथ जुड़ भी गए हैं। स्वामी जी आप जो बातें बताते हैं, परीक्षा पे चर्चा में स्टूडेंट्स से प्रधानमंत्री मोदी ने भी तमाम वही बातें बताई हैं।
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