आप जो भी खाते हैं उससे यूरिक एसिड बनता है। इसमें से ज़्यादातार यूरिक एसिड किडनी द्वारा फिल्टर होकर मूत्र मार्ग से बाहर निकल जाता है। लेकिन जब आपके शरीर में यूरिक एसिड ज़्यादा बनने लगता है तब किडनी इसे फिल्टर नहीं कर पाती तो इस वजह से खून में यूरिक एसिड का लेवल बढ़ जाता है। कुछ समय बाद यह हड्डियों में जमा होने लगता है जिसके कारण गाउट की समस्या हो जाती है। ऐसे में इसे कंट्रोल करने के लिए आप अपनी डाइट में ऐसे खाद्य पदार्थों का चुनाव करे जिनमें प्यूरिन की मात्रा ज़्यादा न हो साथ ही इसे कंट्रोल करने के लिए आप अपनी डाइट में अजवाइन का भी सेवन करें। इस मसाले में ऐसे औषधीय गुण पाए जाते हैं जो यूरिक एसिड को कंट्रोल कर सकते हैं। तो, चलिए जानते हैं यूरिक एसिड में अजवाइन कैसे फायदेमंद है और इसका सेवन कैसे करें?
प्रोटीन, वसा, फाइबर और कैल्शियम, फास्फोरस, आयरन और निकोटिनिक एसिड जैसे खनिजों के अलावा, अजवाइन में भरपूर मात्रा में एंटी-ऑक्सीडेंट और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं जो यूरिक एसिड को नियंत्रित करने में मदद करते हैं। अजवाइन में ल्यूटोलिन, 3-एन-ब्यूटाइलफथालाइड और बीटा-सेलिनिन नामक यौगिक रक्त में यूरिक एसिड के स्तर को कम करते हैं और सूजन पैदा करने वाले नाइट्रिक ऑक्साइड के उत्पादन को कम करते हैं जो गाउट को ट्रिगर करता है।
यूरिक एसिड से पीड़ित व्यक्ति को रोजाना खाली पेट एक गिलास अजवाइन का पानी पीना चाहिए। सोने से पहले एक गिलास में एक चम्मच अजवाइन के बीज डालकर रात भर के लिए छोड़ दें। सुबह इस पानी को छानकर पी लें। इसके अलावा आप चाहें तो अजवाइन में अदरक मिलाकर भी खा सकते हैं। ये दोनों ही उपाय कारगर हैं। अजवायन का सेवन करने से यूरिक एसिड का स्तर धीरे-धीरे कम होने लगता है।
अगर आप एसिडिटी और कब्ज से परेशान हैं तो अजवाइन आपके लिए फायदेमंद साबित होगी। इसमें एंटीस्पास्मोडिक और कार्मिनेटिव गुण होते हैं जो इन दोनों समस्याओं से राहत दिलाते हैं। अगर आप जोड़ों के दर्द से परेशान हैं तो अजवाइन भी कारगर है। इसमें एंटी-इंफ्लेमेटरी तत्व होते हैं जो गठिया से जुड़ी समस्याओं से भी राहत दिलाने में मदद करते हैं। अजवाइन में एंटी-बैक्टीरियल तत्व मौजूद होते हैं। ये एंटी-बैक्टीरियल तत्व शरीर को सर्दी-खांसी जैसे वायरल संक्रमण से बचाने में मदद करते हैं।
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