दुनिया जैसे ही कोरोना वायरस को भूलने लगती है कि वैसे ही कोरोना का एक और वेरिएंट आता है और लोगों की नींद उड़ा देता है। ऐसा ही कुछ कोरोना वायरस के इस नए वेरिएंट ने भी किया है। दरअसल, कोरोना स्ट्रेन जेएन.1 (coronavirus variant JN.1) ने इस समय देश और दुनिया में खलबली मचा रखी है। पहले तो सिर्फ अमेरिका, चीन और सिंगापुर में इसके मामले सामने आए थे लेकिन अब भारत में भी इसके मामले पाए गए हैं। केरल में इसके मामले सामने आने के बाद राज्य को अलर्ट कर दिया गया है। यही नहीं, उत्तराखंड में भी अलर्ट जारी किया गया है और आज स्वास्थ्यय मंत्रालय की इसे लेकर बैठक होगी। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या ये वेरिएंट इतना खतरनाक है? जानते हैं इस बारे में विस्तार से।
कोरोना का नया वेरिएंट JN.1 सब-वेरिएंट है, जिसे पहली बार लक्जमबर्ग में पहचाना गया था। ये कोरोना के पिरोला वेरिएंट (BA.2.86) का वंशज है, जो खुद ओमिक्रॉन के सब वेरिएंट से बना है। दरअसल, बाकी कोरोना के वेरिएंट के तुलना में इसमें ज्यादा म्यूटेशन है जो कि परेशानी का कारण है। यह स्पाइक प्रोटीन में म्यूटेन करता है जो इसकी संक्रामकता और प्रतिरक्षा प्रतिक्रियाओं से बचने की क्षमता को बढ़ा सकता है।
हाल के मामले को देखें तो केरल में एक 78 वर्षीय महिला जिसमें JN.1 वैरिएंट का पता चला है उसमें इन्फ्लूएंजा जैसी बीमारी के हल्के लक्षण मिले हैं। इसके अलावा खबरों की मानें तो इसके लक्षण बहुत ज्यादा अलग नहीं है। इसमें लोगों के गले में खराश, नाक बहना, सिर दर्द और बुखार जैसे लक्षण देखे जा रहे हैं।

कोरोना के किसी भी वेरिएंट से बचाव का यही उपाय है कि संक्रमण के प्रसार को रोकने के लिए बार-बार हाथ धोएं, मास्क पहनें और सोशल डिस्टेंसिंग बनाए रखने जैसे निवारक उपायों का पालन करें। साथ ही अगर आपने कोरोना का टीका अब तर नहीं लगवाया है तो इस लगवा लें।
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