ऋतुओ का राजा बसंत आ गया है। इस मौसम में कुदरत एकदम निखरे अंदाज़ में स्वागत करती है। गुनगुनी धूप, रंग बिरंगे फूल.पूरी कायनात ख़ूबसूरत दिखायी देती है। सर्द रातों के बाद नेचर में ताज़गी भर जाती है। मौसम सुहाना हो जाता है लेकिन मैं बता दूं कि वसंत में खिले पीले फूलों का अलग ही महत्व होता है। पीला रंग मन का रंग कहा जाता है पॉज़िटिव सोच लाता है। मां सरस्वती को भी तो पीले फूल ही चढ़ाए जाते हैं। मां सरस्वती के आशीर्वाद की ज़रूरत तो उन बच्चों को भी है जो बोर्ड एक्ज़ाम की तैयारी में जुटे हैं क्योंकि परीक्षा शुरू होने में सिर्फ 11 दिन रह गए हैं। उन बच्चों पर जो एक़्ज़ाम का मेंटल प्रेशर है वो शिक्षा की देवी मां सरस्वती ही अपनी कृपा से घटाएंगी। पढ़ाई का ये प्रेशर नहीं घटा तो बच्चों की मेंटल हेल्थ पर असर पड़ सकता हैं कई बच्चे तो जब प्रेशर नहीं झेल पाते तो खुदकुशी तक के ख्याल मन में लाने लगते हैं। स्कूल की ये टेंशन उन्हें 10-12 साल की उम्र में ही हाइपरटेंशन का मरीज़ बना रही है.
एक स्टडी के मुताबिक देश में हर 3 या 4 में से एक बच्चा हाई बीपी लिए घूम रहा है बचपन में डिप्रेशन, हाइपरटेंशन तो 25 की उम्र आते आते युवा दिल और किडनी की बीमारियों का शिकार हो जाते हैं। ऐसे में बच्चों की हेल्थ पर निगेटिव इफेक्ट ना पड़े इसलिए पेरेंट्स को भी पढ़ाई के इस प्रेशर से बच्चों को निकालने के तरीके सीखने होंगे।बच्चों के नंबर कम आए या ज़्यादा..माता-पिता को उनके साथ खड़े होना होगा, उनका हौंसला बढ़ाना होगा। और ये बताएंगे स्वामी रामदेव जो खुद गुरुकुल चलाते हैं। हज़ारो बच्चों की ज़िंदगी बेहतर बनाते हैं योगगुरू कैसे उन बच्चों को जीवन में आगे बढ़ने का पाठ पढ़ाते हैं उन्हें कामयाब बनाते हैं ये उन्ही से जानते हैं।
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