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पोंजी घोटाला मामले में पश्चिम बंगाल में 22 स्थानों पर सीबीआई की छापेमारी

छापेमारी सुबह में शुरू हुई और यह सात जिलों में की गई जिसमें बांकुरा, हुगली, हावड़ा, बर्धमान, जलपाईगुड़ी, पश्चिम मेदिनीपुर, पूर्व मेदिनीपुर और कोलकाता शामिल है।

Reported by: Bhasha
Published : Jul 01, 2019 09:44 pm IST, Updated : Jul 01, 2019 09:44 pm IST
cbi- India TV Hindi
Image Source : PTI प्रतिकात्मक तस्वीर

नई दिल्ली। सीबीआई ने सोमवार को पश्चिम बंगाल में 22 स्थानों पर छापेमारी की जिसमें न्यू लैंड एग्रो इंडस्ट्रीज के निदेशक एवं प्रमोटरों के कार्यालय एवं आवासीय परिसर शामिल हैं। न्यू लैंड एग्रो इंडस्ट्रीज पोंजी घोटाला मामले में आरोपी कंपनियों में से एक है। यह जानकारी अधिकारियों ने दी।

अधिकारियों ने बताया कि छापेमारी सुबह में शुरू हुई और यह सात जिलों में की गई जिसमें बांकुरा, हुगली, हावड़ा, बर्धमान, जलपाईगुड़ी, पश्चिम मेदिनीपुर, पूर्व मेदिनीपुर और कोलकाता शामिल है। उन्होंने बताया कि कंपनी पर आरोप है कि उसने उन निवेशकों से 140 करोड़ रुपये की ठगी की जिन्होंने अपनी बचत का निवेश आकर्षक रिटर्न का वादा किये जाने पर कंपनी की योजनाओं में किया था। उन्होंने कहा कि निवेशकों को परिपक्व राशि का भुगतान नहीं किया गया।

अधिकारियों ने बताया कि उच्चतम न्यायालय ने एजेंसी को पोंजी घोटाले में कथित रूप से शामिल सभी कंपनियों की जांच करने का निर्देश दिया था जिसकी जांच तब पश्चिम बंगाल की एक विशेष जांच टीम कर रही थी। शिकायत में यह आरोप लगाया गया कि 250 से अधिक एजेंटों से एजेंसी के प्रमोटर और निदेशकों द्वारा आकर्षक वापसी का वादा करके धोखा किया गया था। इन एजेंटों में से प्रत्येक ने करीब एक करोड़ रुपये जमा किये थे। 

उन्होंने कहा कि एजेंसी ने कंपनी और उसके चेयरमैन दीपांकर डे, प्रबंध निदेशकों कौशिक रॉय, पिंकू कुमार दास, सौरभ डे, प्रसेनजीत सरकार और कार्तिक चरण के अलावा सीईओ सौरभ दत्त और अरूप कुमार घोष, आशीष घोष, अरुण दास और सूरज जैन सहित अन्य के खिलाफ मामला दर्ज किया है।

उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल, ओडिशा और उत्तर पूर्व भारत में पोंजी घोटाले का खुलासा तब सामने आया था जब सारदा समूह द्वारा चलाई गई जमा योजनाएं निवेशकों को रिटर्न देने में विफल रहीं। उन्होंने कहा कि इसके चेयरमैन और प्रबंध निदेशक सुदीप्तो सेन को पश्चिम बंगाल पुलिस ने जम्मू-कश्मीर से गिरफ्तार किया था। 

घोटाले को सारदा घोटाला कहा गया जिसमें पोंजी योजना संचालकों और राजनेताओं की मिलीभगत थी जिसके बाद उच्चतम न्यायालय ने जांच सीबीआई को सौंप दी । 

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