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किसान नेता बोले- छोटी समिति बनाने का मकसद आंदोलन को लटकाना, दिल्ली के रास्ते बंदकर आंदोलन करेंगे और तेज

Written by: IndiaTV Hindi Desk Published : Dec 02, 2020 06:08 pm IST, Updated : Dec 02, 2020 08:11 pm IST

नए कृषि कानूनों को लेकर विरोध-प्रदर्शन कर रहे किसान नेताओं ने सिंधु बॉर्डर पर प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए बुधवार (2 दिसंबर) को कहा कि सरकार संसद का विशेष सत्र बुलाकर तीनों नए कृषि कानूनों को रद्द करे।

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Image Source : ANI Farmers Protest

नई दिल्ली। नए कृषि कानूनों को लेकर विरोध-प्रदर्शन कर रहे किसान नेताओं ने सिंधु बॉर्डर पर प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए बुधवार (2 दिसंबर) को कहा कि सरकार संसद का विशेष सत्र बुलाकर तीनों नए कृषि कानूनों को रद्द करे। किसान नेताओं ने कहा कि छोटी समिति बनाने का मकसद आंदोलन को लटकाना है, सरकार किसानों को बांटना चाहती है। किसान आंदोलन के छठे दिन आज किसान नेताओं ने उग्र प्रदर्शन की चेतावनी देते हुए कहा कि जल्द ही तीनों नए कृषि कानून वापस नहीं हुए तो पूरी दिल्ली के रास्ते बंद कर देंगे। किसान नेताओं ने कहा कि नया कृषि कानून किसानों की मौत का फरमान है। किसान नेताओं ने सरकार को अल्टीमेटम देते हुए कहा कि सरकार संसद में लगातार झूठ बोल रही है। सरकार जो भी ज़ुल्म करे हमारा हाथ नहीं उठेगा लेकिन हमारा आंदोलन जारी रहेगा। 

5 दिसंबर को मोदी सरकार का पुतला दहन करेंगे किसान

किसान यूनियन हरियाणा प्रेसिडेंट दर्शन पाल ने कहा कि हम तीन कानूनों को लिखकर देंगे, क्या दिक्कत है इन कानूनों से। हमारी बात मानते हैं तो ठीक, नहीं तो प्रदर्शन जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि इस कानून को रद्द करें। टिकरी बॉर्डर, सिंघु बॉर्डर के साथ सभी बॉर्डर सील कर दिए जाएंगे। देश भर में प्रदर्शन शुरू हो जाएगा। इस मीटिंग के साथ-साथ राकेश टिकैत का साथ भी मिल गया है। किसान नेताओं ने कहा कि पूरे देश मे किसान 5 दिसंबर को मोदी सरकार का पुतला दहन करेंगे। 

संसद का विशेष सत्र बुलाकर रद्द किए जाएं तीनों नए कृषि कानून

किसान नेता दर्शन पाल ने संवाददाता सम्मेलन में कहा कि केंद्र को नए कृषि कानूनों को निरस्त करने के लिए संसद का विशेष सत्र आहूत करना चाहिए। कृषि कानूनों को निरस्त किए जाने तक हम अपना आंदोलन जारी रखेंगे। किसान नेता गुरनाम सिंह चढूनी ने कहा कि अगर सरकार हमारी मांगें नहीं मानेगी तो हम और कदम उठाएंगे। चिल्ला बॉर्डर पर किसान नेता भानु प्रताप सिंह ने कहा कि जब तक हमारी PM मोदी से आमने-सामने बैठकर बात नहीं होगी तब तक आंदोलन जारी रहेगा। जब हरियाणा-पंजाब के किसानों को दिल्ली आने से रोका गया तो हमने जल्दबाजी में दिल्ली कूच किया। हम तैयारी से नहीं आए थे पर अब यहीं रहेंगे और तैयारी करते रहेंगे। 

7 दिसंबर को अवार्ड वापसी होगी

इसके बाद 7 दिसंबर को अवार्ड वापसी होगी। संयुक्त किसान मोर्चा गुरनाम सिंह ने कहा कि सैनिक और खिलाड़ी अवार्ड वापसी करेंगे। अभी स्पष्ट नहीं है हालांकि, शुरुआत में सैनिक और जवान बोले थे, लेकिन अभी क्लियर करने के लिए कहा है। किसान नेता शिवकुमार कक्का ने कहा कि अगर कानून को खत्म नहीं किया तो दिल्ली को चारों तरफ से जाम कर देंगे। किसान संगठन के नेता अक्षय कुमार ने कहा कि ओड़ीसा में भी किसान आंदोलन चलेगा। इस बीच राहत की बात ये है कि किसान आंदोलन के चलते दिल्ली-नोएडा बॉर्डर (गौतमबुद्ध मूर्ति) पर दिल्ली से नोएडा की तरफ आने वाला रास्ता खोल दिया गया है। 

वहीं नोएडा से किसान आंदोलन में शामिल होने के लिए दिल्ली कूच कर रहे किसानों को पुलिस ने डॉ. अंबेडकर मेमोरियल पार्क में शिफ्ट कर दिया है। किसान नेता ने बताया, "हमें गिरफ्तार कर अस्थायी ज़ेल में डाल दिया गया है। जिस दिन ये हमें रिहा करेंगे हम वापिस दिल्ली कूच करेंगे।" आंदोलनकारी किसानों को डॉ. अंबेडकर मेमोरियल पार्क में शिफ्ट किए जाने को लेकर नोएडा DCP राजेश कुमार सिंह ने कहा कि अस्थायी ज़ेल बिलकुल भी नहीं है। रोड पर बैठ गए थे तो पब्लिक परेशान हो गई थी लिहाजा हम इन्हें पार्क में ले आए ताकि हम इनसे निवेदन कर सकें कि ऐसा कोई कदम न उठाएं कि जनता को परेशानी हो। हम इन्हें दिल्ली में प्रवेश नहीं करने देंगे। 

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