
20 साल में कैसे कमाए 45000 करोड़ ?
पर्ल्स ग्रुप के जिस मालिक के पास आज खरबों की प्रॉपर्टी है वो पैदाइशी रईस नहीं है उसकी कहानी फिल्मी है। अपनी जवानी के दिनों में वो साइकिल पर दूध बेचता था, फिर उसने तकिए बेचने शुरु किए और उसके बाद उसने एक ऐसी कंपनी में नौकरी की जहां से उसे जालसाजी का आइडिया मिल गया। फिर क्या था वो दूधवाला बन गया खरबपति जालसाज।
पंजाब के बरनाला जिले का रहने वाला है पर्ल्स ग्रुप का मालिक निर्मल सिंह भंगू। निर्मल शुरु में अपने भाई के साथ दूध बेचता था लेकिन इसी के साथ उसने पॉलिटिकल साइंस में पोस्ट ग्रेजुएशन कर लिया और नौकरी के लिए 70 के दशक में कोलकाता चला गया। निर्मल सिंह ने कोलकाता में एक इनवेस्टमेंट कंपनी पियरलेस में कुछ साल तक काम किया। उसके बाद निर्मल ने हरियाणा की कंपनी गोल्डन फॉरेस्ट इंडिया लिमिटेड में भी काम किया। गोल्डन फॉरेस्ट इंडिया लिमिटेड प्लांटेशन के लिए लोगों से निवेश करवाती थी। निवेशकों से करोडों रुपए ऐंठने के बाद गोल्डन फॉरेस्ट कंपनी बंद हो गई। गोल्डन फॉरेस्ट कंपनी बंद होने के बाद निर्मल सिंह बेरोजगार हो गया।
इसी दौरान ने अपना शातिर दिमाग दौड़ाना शुरु किया और उसने गोल्डन फॉरेस्ट की तरह 1980 के दशक में पर्ल्स गोल्डन फॉरेस्ट (पीजीएफ) नाम की कंपनी बनाई। वो कंपनी भी वृक्षारोपण के लिए निवेशकों से पैसा जुटाती थी और अच्छा मुनाफा लौटाने का दावा करती थी।
'मकड़जाल' में फंसे 6 करोड़ लोग ?
साल 1996 तक निर्मल सिंह भंगू प्लांटेशन के लिए लोगों से रुपए लेता और उन्हें मोटे रिटर्न का भरोसा देता रहा। इस दौरान इनकम टैक्स और दूसरी जांचों के चलते निर्मल सिंह ने 80 के दशक में बनाई गई कंपनी पर्ल्स गोल्डन फॉरेस्ट यानी पीजीएफ को बंद कर दिया लेकिन उसे पॉन्जी स्कीम से रुपए कमाने का फॉर्मूला मिल चुका था। लिहाजा उसने एक नई कंपनी बनाई जिसका नाम रखा PACL यानी पर्ल्स एग्रोटेक कॉर्पोरेशन लिमिटेड।
निर्मल सिंह भंगू ने अपने गृह जिले पंजाब के बरनाला से पॉन्जी स्कीम की शुरुआत की और कमाई के लिए पिरामिड मॉडल अपनाया यानी निर्मल सिंह ने शुरु में दो एजेंट बनाएं जिनसे हजार-हजार रुपए लिए गए और उन्हें ग्राहक लाने पर कमीशन का वादा किया गया। अगले महीने उन दो एजेंट्स ने दो-दो एजेंट कंपनी के साथ जोड़े। एक महीने बाद कुल 6 एजेंट तैयार हो गए। तीसरे महीने 4 एजेंट्स ने 8 नए लोगों को लालच देकर अपने साथ जोड़ लिया। चौथे महीने में उन 8 इनवेस्टर्स ने 16 नए एजेंट तैयार कर लिए।
इस तरह से निर्मल सिंह की कंपनी पर्ल्स ग्रुप में लोग हर महीने के हिसाब से पैसे लगा रहे थे इस लालच में कि उन्हें कमीशन के तौर पर मोची रकम मिलेगी। पर्ल्स ग्रुप निवेश के बदले सालाना 12.5 फीसदी ब्याज का वादा करती थी। कंपनी के एजेंट 6 साल में रकम दोगुनी करने का सपना दिखाते थे जबकि 10 साल बाद रकम के चार गुना तक होने का लालच दिया जाता था। मोटे कमीशन के चक्कर में पूरे देश में करीब 60 लाख एजेंट कंपनी के साथ जुड़ गए थे। देखते देखते करीब 6 करोड़ लोगों ने पर्ल्स ग्रुप में अपना पैसा लगा दिया। इस तरह जमीन के लालच में लोग पर्ल्स ग्रुप में अपनी गाढ़ी कमाई लगाते गए और निर्मल सिंह की जालसाजी का धंधा फलने फूलने लगा। उसने करीब 20 सालों में 45000 करोड़ रुपए कमा लिए। इतना ही नहीं काली कमाई को सफेद बनाने के लिए उसे देश से बाहर ऑस्ट्रेलिया भेजकर निवेश कर दिया।
एक तरफ निवेशक मोटा मुनाफा मिलने की उम्मीद लगाए बैठे थे तो दूसरी तरफ निर्मल सिंह उनकी गाढ़ी कमाई से अपना साम्राज्य विदेशों तक फैला रहा था। जब वादे के मुताबिक लोगों को उनका पैसा नहीं मिला तो निर्मल सिंह के खिलाफ विरोध की आवाजें उठनी शुरु हो गईं और आखिरकार लोगों की शिकायत और जांच के बाद इस जालसाज पर कानून का शिकंजा कस दिया गया।