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भाव 2025: द आर्ट ऑफ लिविंग ने लॉन्च किया 'सीता चरितम', कला और संस्कृति का एक अद्भुत समागम

Edited By: Vineet Kumar Singh @VickyOnX Published : Jan 25, 2025 09:15 am IST, Updated : Jan 25, 2025 09:17 am IST

भाव-दी एक्सप्रेशंस समिट 2025 के पहले दिन, द आर्ट ऑफ लिविंग ने 'सीता चरितम' की शुरुआत की। इसमें 500 कलाकारों द्वारा 30 नृत्य, संगीत और कला रूपों का संगम हुआ। यह समागम 180 देशों में आयोजित होगा।

Art of Living, Bhav The Expressions Summit 2025, Sita Charitam- India TV Hindi
Image Source : INDIA TV महोत्सव में दीप प्रज्ज्वलन पर आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रवि शंकर एवं केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत।

बेंगलुरु: भारत के सबसे बड़े कला और सांस्कृतिक शिखर सम्मेलन, भाव-दी एक्सप्रेशंस समिट 2025 के पहले दिन, द आर्ट ऑफ लिविंग ने ‘सीता चरितम’ की शुरुआत की। यह भारत का सबसे बड़ा लाइव प्रदर्शन कला समागम है, जिसमें 500 कलाकारों द्वारा 30 नृत्य, संगीत और कला रूपों का संगम हुआ। इस आयोजन का उद्देश्य भारतीय सांस्कृतिक धरोहर को दुनियाभर में प्रदर्शित करना है। इस समागम का आयोजन 180 देशों में होगा और इसके 20 से अधिक संस्करणों में स्थानीय भाषाओं में गाए गए गीत और संवाद शामिल होंगे।

भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विविधता का अद्भुत प्रदर्शन

भाव 2025 में भारतीय कला की समृद्धता का अद्भुत प्रदर्शन देखने को मिला, जिसमें पश्चिम बंगाल से 10 ट्रांसजेंडर कलाकारों द्वारा प्रस्तुत भारतीय शास्त्रीय नृत्य भारतनाट्यम ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। साथ ही ‘आर्ट ऑफ लिविंग’ के ‘आउट ऑफ बॉक्स’ संगीत बैंड की धुनों पर पूर्व कैदी कलाकारों का समूह भी शामिल था, जिन्होंने समागम को और रंगीन बना दिया।

वैश्विक मानवतावादी और आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रवि शंकर ने इस महोत्सव के महत्व पर विचार व्यक्त करते हुए कहा, 'अगर एक भी संस्कृति, धर्म या सभ्यता समाप्त हो जाए, तो दुनिया निर्धन हो जाएगी। हर संस्कृति दुनिया की धरोहर का हिस्सा है और हमें इन्हें संरक्षित रखना चाहिए।' भारतीय पर्यटन और संस्कृति मंत्री श्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने भी कला के विविध रूपों को स्वीकारते हुए इस अवसर को एक सांस्कृतिक कुंभ बताया।

संगीत, नृत्य और कला के विविध रूपों की प्रस्तुति

भाव 2025 की शुरुआत एक भावनात्मक अनुभव के रूप में हुई, जिसमें काव्या मुरलीधरन और उनकी मंडली द्वारा प्रस्तुत भावुक भारतनाट्यम ने दर्शकों को दिल छू लिया। कथक सम्राट मनीषा साठे के नेतृत्व में तीन पीढ़ियों ने एक साथ मंच पर आकर कथक की शानदार प्रस्तुति दी। राम भजन की प्रस्तुति और 30 कलाकारों की टोली द्वारा सजीव संगीत का आयोजन दर्शकों को भावुक कर गया। गरबा गीतों की प्रस्तुति ने भी उपस्थित दर्शकों को झूमने पर मजबूर कर दिया।

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Image Source : INDIA TVकलाकारों के साथ आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रवि शंकर।

‘कला जाति, धर्म और लिंग की सभी सीमाओं को पार कर जाती है’, सुषांत दिविकर ने उद्घाटन समारोह के अंत में यह विचार व्यक्त किया। इस उत्सव में 600 से अधिक प्रतिनिधि एकजुट हुए और कला के इस विशाल समुदाय का हिस्सा बने। यह एकता की भावना केवल आध्यात्मिकता के माध्यम से ही संभव हो सकती है, और भाव इस जीवन के पहलुओं का अन्वेषण करने के लिए कलाकारों को वह स्थान प्रदान करता है।

कला पुरस्कार 2025: भारतीय संस्कृति के रक्षकों को सम्मान

इस दौरान, कला पुरस्कार 2025 का आयोजन भी हुआ, जिसमें भारतीय कला में उनके जीवन भर के योगदान के लिए प्रसिद्ध कलाकारों को सम्मानित किया गया। गुरुदेव श्री श्री रवि शंकर ने इस पुरस्कार को प्रस्तुत किया। सम्मानित कलाकारों में 94 वर्षीय वीणावादक आर. विश्वेश्वरन, मृदंगम के दिग्गज विद्वान ए. आनंद, यक्षगान के नायक बन्नगे सुर्वण और गरबा कलाकार अतुल पुरोहित शामिल थे।

कला महापुरुषों और परंपराओं का उत्सव

श्लोकों के उच्चारण के बीच महोत्सव का भव्य उद्घाटन दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। इस अवसर पर गुरुदेव श्री श्री रवि शंकर, पद्मश्री मंजम्मा जोगथी, पद्मश्री ओमप्रकाश शर्मा, पद्मश्री उमा महेश्वरी, और संगीत सम्राट चित्रवीणा एन. रवीकिरण जैसे प्रतिष्ठित कलाकार उपस्थित थे।

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Image Source : INDIA TVअपनी कला का प्रदर्शन करते कलाकार।

अगले संस्करणों में और अधिक विस्तार

भाव 2025 का आयोजन भविष्य में 180 देशों में किया जाएगा, जिसमें भारतीय कला और संस्कृति का प्रचार-प्रसार किया जाएगा। इसका उद्देश्य न सिर्फ कला के प्रेमियों को एक मंच प्रदान करना है, बल्कि सांस्कृतिक धरोहर को नई पीढ़ी तक पहुंचाना भी है।

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