बेंगलुरु: कर्नाटक के बेंगलुरू में लोकायुक्त पुलिस ने रिश्वत लेने के आरोप में आबकारी विभाग के डिप्टी कमिश्नर समेत तीन कर्मचारियों को रंगेहाथ गिरफ्तार किया है। कर्नाटक लोकायुक्त पुलिस की टीम ने बताया कि आरोपियों ने एक शख्स से बार का लाईसेंस देने के बदले 80 लाख रुपये की रिश्वत मांगी थी। शिकायत के बाद आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।
80 लाख रुपये मांगी थी रिश्वत
लोकायुक्त पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक, लक्ष्मीनारायण नाम के एक व्यक्ति ने C7 यानी बॉर लाइसेंस के लिए एक्साइज डिपार्टमेंट में अप्लाई किया था। शिकायत के मुताबिक लाइसेंस देने के लिये एक्साइज विभाग के डेप्युटी कमिश्नर जगदीश नायक और सुपरिंटेंडेंट KM तम्मअण्णा ने 80 लाख रुपए की रिश्वत मांगी।
इस सिलसिले में लक्ष्मीनारायण ने लोकायुक्त पुलिस से सम्पर्क किया। इसके बाद जाल बिछाया गया। 25 लाख रुपये रिश्वत की रकम देने के दौरान लोकायुक्त पुलिस ने डेप्युटी कमिश्नर और सुपरिंटेंडेंट को रंगे हाथ पकड़ा। साथ ही इस राशि को लेकर आने वाले एक्साइज कॉन्सटेबल लक्कप्पा गनी को भी अरेस्ट कर लिया गया।
सरकारी डॉक्टर गिरफ्तार
इससे पहले विजिलेंस अधिकारियों ने शुक्रवार को ओडिशा के अंगुल जिले में एक सरकारी डॉक्टर को रिश्वत के आरोप में गिरफ्तार किया। वह कथित तौर पर महिला कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर (CHO) से उनके इंसेंटिव पेमेंट क्लियर करने के बदले 49,000 रुपये की रिश्वत ले रहा था। 46 साल का आरोपी कनिहा के कम्युनिटी हेल्थ सेंटर (CHC) में मेडिकल ऑफिसर के पद पर तैनात था। एक विजिलेंस अधिकारी ने बताया, "नेशनल हेल्थ मिशन (NHM) के तहत CHO को हर महीने 12,000 से 15,000 रुपये का इंसेंटिव मिलता है। हालांकि, आरोपी ने उनका बकाया जारी करने के लिए हर CHO से लगभग 3,000 रुपये की मांग की।