Sunday, January 11, 2026
Advertisement
  1. Hindi News
  2. भारत
  3. राष्ट्रीय
  4. अगले पांच साल में भारत 52 जासूसी सैटेलाइट्स करेगा लॉन्च, पाकिस्तान समेत दुश्मन देशों की उड़ेगी नींद

अगले पांच साल में भारत 52 जासूसी सैटेलाइट्स करेगा लॉन्च, पाकिस्तान समेत दुश्मन देशों की उड़ेगी नींद

ये जासूसी उपग्रह भारतीय सेना, नौसेना और वायु सेना को दुश्मन की गतिविधियों पर नज़र रखने, सीमाओं की निगरानी करने और सैन्य अभियानों के दौरान काफी मददगार साबित होंगे।

Edited By: Niraj Kumar @nirajkavikumar1
Published : May 07, 2025 08:10 pm IST, Updated : May 07, 2025 08:10 pm IST
Satellite- India TV Hindi
Image Source : FILE सैटेलाइट

नई दिल्ली: पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों को निशाना बनाकर जहां एक ओर भारत ने दुनिया को अपनी मारक क्षमता का अहसास दिला दिया है वहीं अपनी डिफेंस क्षमता को और अधिक बढ़ाने की योजना पर भी वह तेजी से काम कर रहा है। भारत अगले पांच वर्षों में अंतरिक्ष आधारित निगरानी क्षमताओं को बढ़ाने के लिए 52  सैटेलाइट्स को कक्षा में स्थापित करेगा। यह जानकारी भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन एवं प्राधिकरण केंद्र (आईएन-स्पेस) के अध्यक्ष पवन कुमार गोयनका ने बुधवार को दी। उन्होंने कहा कि इस कदम से निजी क्षेत्र की मजबूत भागीदारी देखने को मिलेगी।

निगरानी क्षमता में होगा इजाफा

ग्लोबल स्पेस एक्सप्लोरेशन कॉन्फ्रेंस 2025 के मौके पर गोयनका ने कहा, "हमारे पास पहले से ही काफी मजबूत क्षमताएं हैं। बस इसे लगातार बढ़ाने की जरूरत है।" उन्होंने कहा कि इस योजना का उद्देश्य रक्षा क्षेत्र की निगरानी क्षमताओं को बढ़ाना है। उन्होंने कहा, "अब तक यह मुख्य रूप से इसरो (भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन) द्वारा किया गया है। हम आगे बढ़ने के साथ निजी क्षेत्र को भी इसमें शामिल करेंगे।"

सीमाओं की निगरानी, सैन्य अभियानों में मिलेगी मदद

उन्होंने बताया कि ये जासूसी उपग्रह भारतीय सेना, नौसेना और वायु सेना को दुश्मन की गतिविधियों पर नज़र रखने, सीमाओं की निगरानी करने और सैन्य अभियानों के दौरान वास्तविक समय के समन्वय में सुधार करने में मदद करेंगे। गोयनका ने कहा, "निजी क्षेत्र 52 सैटेलाइड्स में से आधे सैटेलाइट्स का निर्माण करेगा, जबकि बाकी के सैटेलाइट्स का निर्माण इसरो द्वारा किया जाएगा।" हालांकि, गोयनका ने स्पष्ट किया कि निगरानी क्षमताओं को और बढ़ाने का फैसला केंद्रीय गृह मंत्रालय और रक्षा बलों द्वारा लिया जाना। 

डिफेंस फोर्सेज के लिए बेहद अहम 

उन्होंने कहा कि इसरो लघु उपग्रह प्रक्षेपण यान (एसएसएलवी) प्रौद्योगिकी को निजी क्षेत्र को हस्तांतरित करने की प्रक्रिया में भी है। एसएसएलवी को कम समय में छोटे सैटेलाइट्स को पृथ्वी की निचली कक्षा में प्रक्षेपित करने के लिए विकसित किया गया है, जो इमरजेंसी के समय में डिफेंस फोर्सेज के लिए बेहद अहम है। वे 10-500 किलोग्राम वजन वाले उपग्रहों को 500 किलोमीटर की गोलाकार कक्षा में प्रक्षेपित करने में सक्षम हैं। गोयनका ने कहा, "एसएसएलवी प्रौद्योगिकी का हस्तांतरण अब शीघ्र ही होने वाला है।" उन्होंने संकेत दिया कि इसकी घोषणा अगले पखवाड़े में की जा सकती है। (इनपुट- पीटीआई)

Latest India News

Google पर इंडिया टीवी को अपना पसंदीदा न्यूज सोर्स बनाने के लिए यहां
क्लिक करें

India TV हिंदी न्यूज़ के साथ रहें हर दिन अपडेट, पाएं देश और दुनिया की हर बड़ी खबर। National से जुड़ी लेटेस्ट खबरों के लिए अभी विज़िट करें भारत

Advertisement
Advertisement
Advertisement