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सेना के लिए ये रेलवे लाइन बनी वरदान! अब सीधे बॉर्डर तक ऐसे पहुंच रहे टैंक और हथियार

 Reported By: Manish Prasad, Edited By: Vinay Trivedi
 Published : Dec 17, 2025 07:23 pm IST,  Updated : Dec 17, 2025 07:23 pm IST

USBRL की वजह से कश्मीर की सैन्य तस्वीर बदल गई है। रेल मार्ग से वहां टैंक और हथियारों की ऐतिहासिक तैनाती हो रही है। अब बिना मौसम की चिंता किए और बिना कठिन रास्तों से गुजरते हुए सेना का सामान बॉर्डर तक पहुंच रहा है।

Indian Army Logistics Milestone- India TV Hindi
भारतीय सेना ने कश्मीर में ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की। Image Source : REPORTER'S INPUT

नई दिल्ली: भारतीय सेना ने 16 दिसंबर 2025 को लॉजिस्टिक्स के मामले में अहम उपलब्धि हासिल की, जब स्पेशल ट्रेन का इस्तेमाल करके कश्मीर वैली में हमारी मिलिट्री में टैंक, आर्टिलरी गन और इंजीनियरिंग उपकरणों को शामिल किया गया। उत्तरी बॉर्डर पर आर्मी की मोबिलिटी, ऑपरेशनल तैयारी और त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता को मजबूत करने में भारत का यह ऐतिहासिक मूवमेंट एक बड़ा कदम है।

बिना बाधा के दक्षिण कश्मीर जाएंगे टैंक और हथियार

सेना की क्षमता और तैयारी की वास्तविक परिस्थितियों में जांच के तहत टैंक, आर्टिलरी गन और Dozers को जम्मू से दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग तक बिना किसी बाधा के ले जाया गया। इस ऑपरेशन की कामयाबी ने ये साबित कर दिया कि इंडियन आर्मी अब चुनौती भरे भौगोलिक इलाकों और कठिन मौसम वाली परिस्थितियों के बावजूद ऊंचाई वाले और संवेदनशील इलाकों में भारी मात्रा में उपकरणों को तेजी से तैनात करने में सक्षम है।

उधमपुर–श्रीनगर–बारामुला रेल लिंक क्यों है खास

जान लें कि रेल मंत्रालय के साथ घनिष्ठ समन्वय की वजह से ही यह उपलब्धि मुमकिन हो सकी, जो उधमपुर-श्रीनगर-बारामुला रेल लिंक यानी USBRL प्रोजेक्ट के रणनीतिक महत्व को बताती है। एक जमाना था कि जब इसे केवल कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट के तौर पर देखा जाता था लेकिन अब USBRL एक महत्वपूर्ण Force Multiplier के तौर पर उभरकर सामने आई है, जो जम्मू-कश्मीर में लॉजिस्टिक्स पहुंचाने को तेज और सैन्य अभियानों की निरंतरता में मदद करती है।

अब बिगड़ते मौसम और कठिन इलाकों की चिंता नहीं

गौरतलब है कि रेल मार्ग के जरिए भारी बख्तरबंद वाहनों और तोपखानों की तैनाती में लगने वाला वक्त काफी कम हो गया है, इसके अलावा कठिन मौसम और दुर्गम भूभाग से प्रभावित होने वाली सड़कों पर निर्भरता भी घटती है। कश्मीर घाटी में बख्तरबंद और आर्टिलरी संसाधनों की सफल तैनाती से भारतीय सेना के ऑपरेशनल लचीलापन और प्रतिरोधक क्षमता को मजबूती मिली है।

सुरक्षबलों की मजबूती होगी मुमकिन

रेल मार्ग के जरिए कम समय में तेज मोबिलाइजेशन से अलग-अलग सेक्टर्स में सुरक्षबलों की मजबूती मुमकिन है, जिससे सामान्य तैनाती से लेकर मुश्किल हालातों तक हर लेवल पर तैयारी बेहतर होती है। यह Validation Exercise जॉइंट ऑपरेशन और इंटर-एजेंसी कोऑर्डिनेशन पर सेना के जोर को भी दिखाता है, जिसमें नेशनल इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट को मिलिट्री लॉजिस्टिक्स प्लानिंग के साथ प्रभावी रूप से जोड़ा गया है।

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