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Partition Horrors Remembrance Day: बंटवारे के दौरान कैसे पाकिस्तान से भागकर आया था सीएम खट्टर का परिवार, हरियाणा के मुख्यमंत्री ने बताया किस्सा

 Published : Aug 14, 2022 09:13 pm IST,  Updated : Aug 14, 2022 09:19 pm IST

Partition Horrors Remembrance Day: हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने रविवार को उन लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित की जिन्होंने देश के विभाजन के दौरान अपनी जान गंवाई। इस मौके पर उन्होंने अपने परिवार को याद किया जो मौजूदा पाकिस्तान से विस्थापित होकर भारत आया था।

CM Khattar recalls displacement of his family from Pakistan - India TV Hindi
CM Khattar recalls displacement of his family from Pakistan Image Source : INDIA TV

Highlights

  • खट्टर ने विभाजन के दौरान जान गंवाने वालों को किया याद
  • पाकिस्तान से विस्थापित होकर भारत आया था खट्टर का परिवार
  • अपने परिवार की कहानी बताते हुए सीएम खट्टर हुए भावुक

Partition Horrors Remembrance Day: हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने रविवार को उन लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित की जिन्होंने देश के विभाजन के दौरान अपनी जान गंवाई। इस मौके पर उन्होंने अपने परिवार को याद किया जो मौजूदा पाकिस्तान से विस्थापित होकर भारत आया था। खट्टर ने ‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’ के मौके पर कुरुक्षेत्र में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘यह केवल जमीन के टुकड़े का बंटवारा नहीं था बल्कि हमारी भावनाओं का बंटवारा था।’’ उन्होंने बंटवारे के दौरान अपनी जान गंवाने वालों की याद में कुरुक्षेत्र में एक स्मारक बनाने की भी घोषणा की। 

पाकिस्तान के झांग जिले से आया था परिवार

आजादी के सात साल बाद जन्में भाजपा नेता खट्टर ने बताया कि उनका परिवार साल 1947 में खाली हाथ ही मौजूदा पाकिस्तान के झांग जिले से भागकर आया था और बाद में रोहतक जिले के निंदाना गांव में बस गया। उन्होंने याद किया कि विस्थापित होने के बाद लोग कैसे रेलगाड़ियों, पैदल और दूसरे साधनों से आए। खट्टर ने दावा किया कि बंटवारे के बाद जो किसान भारत आए उन्हें बंजर जमीन के टुकड़े आवंटित किए गए थे। मुख्यमंत्री ने कहा,‘‘उन्होंने अपनी कड़ी मेहनत से ऐसी जमीन को ऊपजाऊ बना दिया। लेकिन दुर्भाग्य से आजादी के 75 साल होने के बाद भी उन्हें उन जमीनों पर अपना अधिकार नहीं मिला।’’ उन्होंने कहा कि उनकी सरकार इस मुद्दे को देखेगी। खट्टर ने कहा, ‘‘हम इस पर विचार करेंगे। कम से कम जो ऐसी जमीनों को 75 सालों से जोत रहे हैं, उनके उन जमीनों पर कुछ अधिकार बनते हैं।’’ 

भेष बदलकर आए थे खट्टर के पिता और चाचा  
इस मौके पर एक डॉक्यूमेंट्री फिल्म भी प्रदर्शित की गई जिसमें कई वरिष्ठ नागरिक जो हरियाणा के विभिन्न हिस्सों में बस गए हैं, ने विभाजन के दौरान हुई पीड़ा और संघर्ष को याद किया है। इस डॉक्यूमेंट्री फिल्म में खट्टर भी अपनी कहानी बताते नजर आ रहे हैं। उन्होंने बताया कि कैसे उनके पिता और चाचा भेष बदलकर सहनेवाल से रेलगाड़ी के जरिये लुधियाना आए, जहां वे परिवार के अन्य सदस्यों से मिले जो पहले ही भारत आ चुका था। 

कहानी बताते हुए सीएम खट्टर हुए भावुक 
खट्टर ने बताया, ‘‘अपनी बेटियों और बहनों की इज्जत बचाने के लिए कुछ परिवारों ने अपने ही हाथों से परिवार की महिलाओं की हत्या कर दी थी।’’ उन्होंने कहा, ‘‘जिस तरह से जलियांवाला बाग में अपनी जान बचाने के लिए कई लोग कुएं में कूद गए थे, उसी तरह कई महिलाओं ने अपनी इज्जत बचाने के लिए कुएं में छलांग लगा दी थी।’’ उन्होंने कहा, ‘‘जब मैं स्कूल और कॉलेज में पढ़ रहा था, तब मेरी दादी उन दिनों की कहानियां सुनाती थी जिसका मेरे जीवन पर असर पड़ा।’’ खट्टर उस समय भावुक हो गए जब उन्होंने बताया कि उनके दादाजी ने विभाजन के दौरान कितना संघर्ष किया था।

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