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जम्मू कश्मीर: साल 2024 में नाव पलटने के बाद लापता हुए शख्स का शव 2 साल बाद बरामद, कटे हुए पैर से हुई पहचान

 Written By: Rituraj Tripathi @riturajfbd
 Published : Jan 20, 2026 08:55 am IST,  Updated : Jan 20, 2026 02:57 pm IST

श्रीनगर में एक ऐसे शख्स का शव बरामद हुआ है, जो साल 2024 में नाव पलटने के बाद से लापता था। शव की पहचान उसकी पत्नी ने की है।

शौकत अहमद शेख- India TV Hindi
शौकत अहमद शेख का शव बरामद Image Source : MANZOOR MIR/INDIA TV

श्रीनगर: जम्मू कश्मीर के श्रीनगर के पास से एक चौंकाने वाली खबर है। यहां साल 2014 में लापता हुए शख्स का शव 2 साल बाद बरामद किया गया है। इस मामले को सुनकर हर कोई हैरान है।

क्या है पूरा मामला?

16 अप्रैल, 2024 को लासजान के पास गंदबल में झेलम नदी में एक दर्जन से अधिक लोगों को ले जा रही एक नाव पलट गई थी। इस हादसे में नौ लोग डूब गए थे, जबकि पांच अन्य रेस्क्यू कर लिए गए थे। इस घटना में कुल 8 शव बरामद कर लिए गए थे लेकिन एक व्यक्ति का पता नहीं लग सका था। इस लापता व्यक्ति की पहचान शौकत अहमद शेख के रूप में हुई थी। 

करीब 2 साल बीत गए लेकिन शौकत का कुछ पता नहीं लग पाया। बीते हफ्ते रेत खनन के दौरान एक कटा हुआ पैर बरामद हुआ। इस कटे पैर को जूते की वजह से शेख की पत्नी ने अपने पति के पैर के रूप में पहचान लिया। इसके बाद सर्च ऑपरेशन चलाया गया और सोमवार को स्थानीय लोगों ने श्रीनगर के लासजान के पास शौकत अहमद शेख का शव बरामद किया। 

हैरानी की बात ये रही कि बीते 21 महीनों तक शेख लापता रहा।

SDRF Kashmir ने एक्स पर पोस्ट करके दी जानकारी

SDRF Kashmir ने एक्स पर पोस्ट करके बताया, "आज, 19/01/2026 को, लगभग 22 महीनों की लंबी अवधि के बाद, दुखद नाव पलटने की घटना में डूबकर जान गंवाने वाले शौकत अहमद शेख पुत्र अब्दुल गनी शेख निवासी गंदबल, जिनकी उम्र 40 वर्ष थी, के पार्थिव शरीर को बरामद कर लिया गया।"

जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष डॉक्टर आदिल फारुक मीर ने जताया दुख

जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष डॉक्टर आदिल फारुक मीर ने इस मामले पर दुख जताया और कहा, "गांदबल त्रासदी में हमारे भाई शौकत अहमद शेख के परिवार के प्रति गहरी संवेदनाएं, जिनके पार्थिव शरीर को लगभग दो दर्दनाक सालों के बाद आज झेलम नदी से आखिरकार बरामद किया गया। स्थानीय लोगों को काफी समय से लग रहा था कि शव ज़्यादा दूर नहीं गया होगा। अगर खोज ज़्यादा प्रोफेशनलिज़्म, लगन और दृढ़ता से की जाती, तो इस लंबे दर्द, रातों की नींद खराब होने और अंतहीन दुख से बचा जा सकता था। फिर भी, ईश्वर की मर्ज़ी से, वह पल आ गया है। आज वे उन्हें स्नान, अंतिम संस्कार और दफ़नाने जैसे सम्मानजनक तरीके से विदाई दे सकते हैं। इससे टूटे हुए दिलों, रिश्तेदारों और गांडबल के दुखी समुदाय को कुछ शांति मिलेगी। अल्लाह उन्हें जन्नत-उल-फिरदौस में नेक लोगों के बीच ऊंचा मकाम दे, उनकी कब्र को रहमत से भर दे और उनके प्रियजनों को सब्र और बेहिसाब सवाब अता करे। यह त्रासदी हमारे समय की एक कड़वी सच्चाई है कि ज़रूरी इंफ्रास्ट्रक्चर, खासकर गांडबल पुल में लंबी देरी के कारण लोगों की जान गई है, लोगों को सदमा लगा है और परिवार टूट गए हैं। कमज़ोर लोगों की सुरक्षा के लिए कब लापरवाही की जगह तेज़ी से काम किया जाएगा? अधिकारी ऐसे प्रोजेक्ट्स को वह अहमियत कब देंगे जिसके वे हकदार हैं? लोगों की ज़िंदगी दांव पर लगी है।"

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