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सावधान! अगर बॉडी में दिखे ये लक्षण तो हो सकती है गठिया की बीमारी

Written by: India TV Lifestyle Desk Published : Jan 16, 2018 12:08 pm IST, Updated : Jan 16, 2018 12:10 pm IST

ऑस्टियो आर्थराइटिस मतलब घुटने के जोड़ो में दर्द। अगर आप इस बीमारी को शुरुआत में इग्नोर कर देंगे तो आगे जाकर आपके लिए समस्या पैदा कर सकती है।

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हेल्थ डेस्क: ऑस्टियो आर्थराइटिस मतलब घुटने के जोड़ो में दर्द। अगर आप इस बीमारी को शुरुआत में इग्नोर कर देंगे तो आगे जाकर आपके लिए समस्या पैदा कर सकती है। ऑस्टियो आर्थराइटिस में सबसे बड़ी समस्या यह है कि आप आपने अपनी लाइफस्टाइल में सुधार नहीं किया तो आने वाले समय में समस्या पैदा हो सकती है।

ऑस्टियोआर्थराइटिस जोड़ों में दर्द और जकड़न पैदा करने वाली बीमारी है। यूं तो इसका कोई पूर्ण उपचार संभव नहीं है परंतु अगर समय रहते रोग पकड़ में आ जाये तो अनेक प्रकार के उपचारों द्वारा इसकी रोकथाम की जा सकती है। यह रोग मुख्यत: जोड़ों की हड्डियों के बीच रहने वाली आर्टिकुलर कार्टिलेज को नुकसान देता है।

आर्टिकुलर कार्टिलेज हड्डियों के बीच में एक प्रकार के मुलायम कुशन की तरह काम करता है। धीरे-धीरे जब यह कार्टिलेज नष्ट होने लगती है, तब जोड़ों के मूवमेंट के वक्त हड्डियां एक दूसरे से टकराने लगती हैं। इस टकराहट से जॉइंट बेहद कष्टकारी हो जाता है। यह रोग अक्सर पचास साल या उससे अधिक आयु में लोगों को प्रभावित करता है। वैसे तो यह किसी भी जॉइंट को नुक्सान दे सकता है पर घुटने के जॉइंट के रोगी सबसे अधिक पाए जाते हैं।

ऑस्टियोआर्थराइटिस (Osteoarthritis) के सामान्य प्रारम्भिक उपचार

कई अन्य गठिया रोगों की तरह ऑस्टियोआर्थराइटिस भी अपनी प्रारम्भिक अवस्था में सामान्य उपचारों द्वारा नियंत्रित किया जा सकता है। आपका डॉक्टर एक्स-रे या MRI से पता कर सकता है की जोड़ों को कितना नुक्सान हुआ है। गंभीरता और दर्द की पुरानी प्रकृति को जानने के बाद, तदनुसार, किसी इलाज की सिफारिश की जा सकती है।

लाइफस्टाइल में कुछ बदलाव है जरूरी
अपनी जीवन शैली में परिवर्तन आपके घुटने की रक्षा और गठिया की प्रगति को धीमा कर सकते हैं। कम वजन घुटने पर तनाव कम कर देता है, जिससे दर्द कम हो सकता है और रोग की गति भी धीमी हो जाती है। ऐसे कार्य जिनमें घुटने का अधिक प्रयोग होता हो, जैसे सीडियां चड़ना, ना करें। ऐसे व्यायाम (जैसे जॉगिंग) के स्थान पर तैराकी या साइकिलिंग किया जा सकता है, जिससे घुटने पर कम दवाब पड़े.

फिजियोथेरेपी
फिजियोथेरेपी गति और लचीलेपन की सीमा को बढ़ाने के साथ ही पैर की मांसपेशियों को मजबूत बनाने में मदद करती है। फिजियोथेरेपिस्ट रोग का पूरी तरह मूल्यांकन करने के पश्चात, रोगी की हालत, उम्र और जीवन शैली के अनुसार एक व्यक्तिगत व्यायाम कार्यक्रम का सुझाव देते हैं।

घुटने के गठिया रोग के लिए फिजियोथेरेपी चिकित्सा का मुख्य उद्देश्य हैं:

घुटने के दर्द और सूजन को कम करना।
घुटने के मूवमेंट और लचीलेपन को सामान्य करना।
घुटने की quadriceps (क्वाडरीसेपस) और hamstring (हैमस्ट्रिंग) मसल्स को मजबूत बनाना।
शारीर के निचले भाग को मजबूत बनाना: पिंडली की मांसपेशियों, कूल्हे इत्यादि
Kneecap के दर्द में कमी और मूवमेंट में सुधार।
मसल्स को मजबूत बनाना।
संतुलन में सुधार।
बैठने, चलने की तकनीक में सुधार।

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