ऑनलाइन शॉपिंग के दौर में एक क्लिक पर सब कुछ मंगवाने की सुविधा ने जहां ग्राहकों की जिंदगी आसान बनाई है, वहीं अब ई-कॉमर्स कंपनियों की लापरवाही पर सरकार सख्त होती नजर आ रही है। अवैध वॉकी-टॉकी की बिक्री को लेकर सेंट्रल कंज्यूमर प्रोटेक्शन अथॉरिटी (CCPA) ने बड़ा एक्शन लिया है। अमेजन, फ्लिपकार्ट और मीशो समेत कई प्लेटफॉर्म्स पर नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए लाखों रुपये का जुर्माना लगाया गया है।
CCPA ने स्वतः संज्ञान लेते हुए ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर बिक रहे अनधिकृत वॉकी-टॉकी और पर्सनल मोबाइल रेडियो (PMR) डिवाइसेज की जांच की। जांच में सामने आया कि कई प्लेटफॉर्म्स पर ऐसे वॉकी-टॉकी बेचे जा रहे थे, जो लाइसेंस-फ्री फ्रीक्वेंसी बैंड के बाहर काम करते हैं और जिनके पास जरूरी इक्विपमेंट टाइप अप्रूवल (ETA) सर्टिफिकेशन भी नहीं था। यह न सिर्फ उपभोक्ता संरक्षण कानून 2019 बल्कि टेलीकॉम नियमों का भी उल्लंघन है।
44 लाख का जुर्माना
इस मामले में CCPA ने कुल आठ कंपनियों के खिलाफ अंतिम आदेश जारी किए और कुल 44 लाख रुपये का जुर्माना लगाया। Amazon, Flipkart, Meesho और Meta Platforms (Facebook Marketplace) पर 10-10 लाख रुपये का भारी जुर्माना ठोका गया है। वहीं चिमिया, जियोमार्ट, टॉक प्रो और मास्कमैन टॉयज पर 1-1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया। उपभोक्ता मामलों की सचिव निधि खरे के मुताबिक मीशो, मेटा, जियोमार्ट, चिमिया और टॉक प्रो ने जुर्माने की राशि जमा भी कर दी है, जबकि बाकी से भुगतान का इंतजार है।
भ्रामक लिस्टिंग का खुलासा
जांच में यह भी खुलासा हुआ कि कुछ प्लेटफॉर्म्स पर हजारों ऐसे प्रोडक्ट लिस्ट थे, जिनमें फ्रीक्वेंसी रेंज या लाइसेंस से जुड़ी कोई जानकारी नहीं दी गई थी। कई विक्रेताओं ने इन्हें 100% लीगल और लाइसेंस-फ्री बताकर भ्रामक विज्ञापन भी किए। CCPA ने ई-कॉमर्स कंपनियों की यह दलील भी खारिज कर दी कि वे सिर्फ इंटरमीडियरी हैं और थर्ड पार्टी सेलर्स की जिम्मेदारी नहीं ले सकते।
सुरक्षा पर खतरा
CCPA ने साफ कहा कि इतने बड़े प्लेटफॉर्म्स से यह उम्मीद की जाती है कि वे अपनी तकनीकी क्षमता के अनुसार उचित जांच-पड़ताल करें। अवैध रेडियो डिवाइस न सिर्फ ग्राहकों को कानूनी जोखिम में डालती हैं, बल्कि नेशनल सिक्योरिटी और इमरजेंसी कम्युनिकेशन सर्विसेज के लिए भी खतरा बन सकती हैं।
नए सख्त नियम लागू
अब CCPA ने 2025 के नए दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं, जिसके तहत ई-कॉमर्स कंपनियों को ऐसे प्रोडक्ट्स की लिस्टिंग से पहले सख्त जांच, सर्टिफिकेशन की पुष्टि और पारदर्शी जानकारी देना अनिवार्य होगा। यह कार्रवाई ई-कॉमर्स सेक्टर के लिए एक कड़ा संदेश मानी जा रही है कि नियमों से समझौता अब भारी पड़ सकता है।


