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देश के करोड़ों यूजर्स की परेशानी खत्म, फर्जी कॉल पर लगेगी लगाम, TRAI और टेलीकॉम विभाग में बनी बात

 Published : Oct 29, 2025 01:43 pm IST,  Updated : Oct 29, 2025 01:43 pm IST

दोनों ही एजेंसियों ने कॉलिंग नेम प्रेजेंटेशन सर्विस को चरणबद्ध तरीके से लागू करने का फैसला लिया है और इसे 4जी और अपेक्षाकृत नए 5जी नेटवर्क से चालू किया जाएगा।

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कॉल Image Source : PIXABAY

अगर आप भी उन लोगों में से हैं जो अनजान कॉलर्स से परेशान होते हैं और इन कॉल्स से बचने के लिए ट्रूकॉलर्स जैसे थर्ड पार्टी ऐप का सहारा लेते हैं तो ये खबर आपके लिए ही है। दरअसल दूरसंचार नियामक टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया यानी TRAI और टेलीकॉम डिपार्टमेंट एक साझा नियम पर सहमत हो गए हैं जिसके बाद देश के करोड़ों यूजर्स को फायदा मिलने वाला है। ये दोनों मिलकर कॉलिंग नेम प्रेजेंटेशन (CNP) को लागू करने पर सहमत हो गए हैं जिसके बाद टेलीकॉम यूजर्स बिना किसी थर्ड पार्टी ऐप के अपने फोन में कॉल करने वाले का असली नाम देख सकते हैं। इसके जरिए कॉलर्स यानी कॉल करने वाले का नंबर और नाम दोनों आपके फोन पर दिखाई देंगे।

क्या है नियम का सीधा अर्थ

इसका अर्थ है कि कॉलर ने जो नाम और नंबर सिम लेते हुए लिया होगा वही असली नाम आपको दिखेगा. इस तरह फर्जी नाम से कॉल करने वालों और धोखाधड़ी वाले कॉल्स से आपके राहत मिल सकेगी क्योंकि आपको असली नाम कॉल के समय ही दिख सकेंगे।

डिफॉल्ट तरीके से लागू होगा नया नियम

ट्राई ने टेलीकॉम डिपार्टमेंट को दिए एक जवाब में कहा कि CNP को इसके सब्सक्राइबर्स के लिए डिफॉल्ट तरीके से लागू कर दिया जाए, जिससे कि सभी यूजर्स इस सुविधा का लाभ ले पाएंगे। हालांकि उनके पास इसे बंद करने का विकल्प हमेशा मौजूद रहेगा और वो कभी भी सेटिंग्स में जाकर इसे स्विच ऑफ कर सकते हैं। वहीं ट्राई ने ये साफ किया है कि ये एक सप्लीमेंट्री सर्विस के तौर पर जारी रहेगी और ये ग्लोबल टेलीकॉम मानकों के अनुरूप ही काम करेगी।

चरणबद्ध तरीके से लागू होगी ये सर्विस

दोनों ही एजेंसियों ने कॉलिंग नेम प्रेजेंटेशन सर्विस को चरणबद्ध तरीके से लागू करने का फैसला लिया है और इसे 4जी और अपेक्षाकृत नए 5जी नेटवर्क से चालू किया जाएगा। इसे 2जी पर लागू करने से पहले इसका टेक्नीकल ग्राउंडवर्क तैयार किया जाएगा। चूंकि 2जी-3जी की बैंडविथ कम होती है तो इस पर इसे लागू करने में शुरुआती दौर में परेशानी हो सकती है लेकिन जल्द ही इस नेटवर्क पर भी ये सुविधा चालू करने पर जोर रहेगा।

इन लोगों का नाम नहीं दिखेगा

जिन लोगों ने कॉलिंग लाइन आईडेंटिफिकेशन रेस्ट्रिक्शन (CLIR) की सुविधा ली हुई है, उन्हें इस नियम से राहत मिली हुई है क्योंकि इस नियम से वो बाहर हैं. मंत्री, सुरक्षा व खुफिया अधिकारी के साथ कई और जिम्मेदार शख्स को इस तरह से CLIR के दायरे में रखा जाता है जिससे कि वो इस नियम के दायरे में ना आएं क्योंकि उनकी पहचान राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी होने के चलते उजागर नहीं होनी चाहिए।

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