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फोन पर आने वाले फर्जी कॉल्स और SMS का कैसे लगाएं पता? सरकार ने बताई ये आसान ट्रिक

आपके फोन पर आने वाले इनकमिंग कॉल्स और SMS सही हैं या फर्जी इसका पता लगाना अब बेहद आसान हो गया है। साथ ही, आप अपने फोन पर आने वाले इन फर्जी कॉल्स को आसानी से रिपोर्ट भी कर सकते हैं।

Written By: Harshit Harsh @HarshitKHarsh
Published : Oct 12, 2025 04:04 pm IST, Updated : Oct 12, 2025 04:04 pm IST
how to identify fake calls and SMS- India TV Hindi
Image Source : UNSPLASH फर्जी कॉल्स और मैसेज कैसे पहचानें

स्मार्टफोन पर आने वाले फर्जी कॉल्स और मैसेज की पहचान करना अब बेहद आसान हो गया है। यही नहीं, फोन पर आने वाले फर्जी कॉल्स और मैसेज को भी आप आसानी से रिपोर्ट कर सकते हैं। भारत सरकार ने इसके लिए संचार साथी पोर्टल और ऐप लॉन्च किया है। इस पोर्टल और ऐप के चक्षु सेक्शन में जाकर आप फर्जी कॉल्स और मैसेज आदि को रिपोर्ट कर सकते हैं। इसके बाद जिस नंबर से कॉल या मैसेज किए गए हैं उन्हें ब्लॉक किया जाएगा।

फर्जी कॉल्स कैसे पहचानें?

सरकार ने बैंकिंग, इंश्योरेंस और वित्तीय कॉल्स के लिए नई 160 नंबर सीरीज जारी की है। अगर, आपके पास कोई भी बैंकिंग या फिर अन्य वित्तीय सेवाओं के लिए कोई भी कॉल 160 से शुरू होने वाले नंबर से नहीं आते हैं तो वो फर्जी हो सकते हैं।

कैसे पहचाने सही और फर्जी मैसेज?

सही और फर्जी SMS की पहचान करने के लिए आपको कुछ कोड्स का ध्यान रखना होगा। अगर, आप इन कोड्स के बारे में जान लेते हैं तो अपने साथ होने वाले फ्रॉड से बच सकते हैं। आपके फोन पर आने वाले मैसेज के सेंडर के आखिर में '-' के बाद S, G या फिर P लिखा होगा। ऐसे मैसेज सही होते हैं और इन मैसेज में दी गई जानकारियां फर्जी नहीं होगी। वहीं, अन्य नंबरों से आने वाले मैसेज फर्जी हो सकते हैं।

क्या हैं इन कोड्स का मतलब?

S - बैंकिंग सर्विस, ट्रांजैक्शन, टेलीकॉम सेवाओं आदि से जुड़े मैसेज के अंत में S लिखा होता है। इसका मतलब है कि यह मैसेज किसी सर्विस से जुड़ा है, जो आपने लिया हुआ है।

G - सरकारी योजना, सरकार द्वारा भेजे जाने वाले अलर्ट्स आदि वाले मैसेज के आखिर में आपको G यानी गवर्मेंट दिखेगा।

P - व्हाइटलिस्ट की गई कंपनियों के प्रमोशनल मैसेज के आखिर में आपको P यानी प्रमोशन दिखाई देगा। ये वो मैसेज होंगे, जिनके भेजने वालों को दूरसंचार विभाग द्वारा व्हाइटलिस्ट किया गया है।

आम तौर पर आपके नंबर पर आने वाले प्रमोशनल मैसेज, बैंक, ई-कॉमर्स कंपनी, टेलीकॉम ऑपरेटर, सरकारी संस्थानों आदि द्वारा भेजे जाते हैं। साइबर अपराधी इन मैसेज से मिलता-जुलता मैसेज लोगों को भेजकर उनके साथ फ्रॉड करते हैं। फर्जी मैसेज में वायरस वाले ऐप के लिंक शेयर करते हैं, जिस पर क्लिक करते ही आपके फोन में ये वायरस पहुंच जाते हैं और आपकी निजी जानकारियां चुरा लेते हैं। क्रिमिनल्स इन जानकारियों का इस्तेमाल करके आपके साथ फ्रॉड कर सकते हैं।

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