बैंक के विफल होने की स्थिति में जमाकर्ताओं की सुरक्षा के लिए डिपॉजिट इंश्योरेंस एंड क्रेडिट गारंटी कॉरपोरेशन यानी DICGC नाम की एक यूनिट है जो बैंक जमाराशियों का बीमा करती है।
आरबीआई ने मुंबई स्थित न्यू इंडिया को-ऑपरेटिव बैंक पर कई तरह के प्रतिबंध लगा दिये हैं। साथ ही आरबीआई ने बैंक के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स को 12 महीने के लिए भंग कर दिया है।
RBI के निर्देशों के मुताबिक, न्यू इंडिया को-ऑपरेटिव बैंक 14 फरवरी से बिना प्री-अप्रूवल के कोई भी लोन या एडवांस नहीं देगा। इसके अलावा, ये बैंक आज से न तो किसी ग्राहक का डिपॉजिट स्कीकार करेगा और न ही उनके खाते से पैसे निकालकर देगा।
13 फरवरी, 2025 को कारोबार बंद होने के बाद से बैंक बिना पूर्व स्वीकृति के कोई भी लोन या अग्रिम राशि नहीं देगा या उसका रिन्युअल नहीं करेगा, कोई निवेश नहीं करेगा।
पिछले साल अप्रैल में आरबीआई ने कहा था कि 2022 और 2023 के लिए बैंक की आईटी जांच से पैदा हुई महत्वपूर्ण चिंताओं और व्यापक और समयबद्ध तरीके से इन चिंताओं को दूर करने में बैंक की तरफ से निरंतर विफलता के आधार पर कार्रवाई आवश्यक थी।
साइबर क्राइम को अंजाम देने वाले अपराधी लगातार नए-नए तरीकों से लोगों को ठग रहे हैं। इसी कड़ी में डिजिटल अरेस्ट के भी काफी मामले सामने आ रहे हैं। भारतीय रिजर्व बैंक ने लोगों को डिजिटल अरेस्ट से सतर्क रहने की अपील करते हुए चेतावनी दी है।
उन्होंने कहा कि आरबीआई ने अगले वित्त वर्ष के लिए आर्थिक वृद्धि और मुद्रास्फीति अनुमानों पर काम करते समय मौजूदा रुपया-डॉलर दर को ध्यान में रखा है।
भारतीय रिजर्व बैंक गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि मौद्रिक नीति समिति ने रेपो दर में 0.25 प्रतिशत की कटौती की घोषणा करते समय बजट प्रावधानों सहित सभी कारकों पर विचार किया।
Home Loan Interest rate : आरबीआई ने रेपो रेट में 0.25 फीसदी की कटौती की है। इसके बाद अब बैंक्स भी जल्द ही लोन पर ब्याज दरों को घटा सकते हैं।
भारतीय उद्योग जगत ने आरबीआई द्वारा रेपो दर में 25 आधार अंकों की कटौती करने के फैसले का स्वागत किया और कहा कि यह कदम इस मोड़ पर अर्थव्यवस्था को बहुत जरूरी सपोर्ट करेगा।
रुपये में इस साल अभी तक करीब 2 प्रतिशत की गिरावट आई है। 6 नवंबर, 2024 को अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के नतीजे घोषित होने के बाद से डॉलर के मुकाबले रुपये में 3.2 प्रतिशत की गिरावट आई है जबकि इस दौरान डॉलर इंडेक्स में 2.4 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
आईबीआई ने आखिरी बार मई 2020 में ब्याज दरों में कटौती की थी। आरबीआई ने उस समय कोविड के दौरान देश की अर्थव्यवस्था को बूस्ट देने के लिए रेपो रेट में 0.40 प्रतिशत (40 बेसिस पॉइंट्स) की कटौती की थी। जिसके बाद आज करीब 5 साल बाद रेपो रेट में किसी तरह की कटौती की गई है।
RBI MPC meeting : हर दो महीने में होने वाली आरबीआई एमपीसी की बैठक शुरू हो गई है। इस बार 5 साल बाद रेपो रेट में कटौती की जा सकती है।
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की तीन दिवसीय बैठक पांच फरवरी से शुरू होगी। एमपीसी सात फरवरी को अपने नीतिगत निर्णयों की घोषणा करेगी।
विशेषज्ञों का अनुमान है कि अगर ऐसा होता है तो यह बजट में खपत को बढ़ावा देने के लिए उठाये गये कदमों को मजबूती देगा। हालांकि रुपये में गिरावट अभी भी चिंता का विषय बनी हुई है।
आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक के नतीजों की घोषणा के एक दिन बाद वित्त मंत्री सीतारमण का संबोधन होगा। माना जा रहा है कि एमपीसी मीटिंग में केंद्रीय बैंक प्रमुख नीतिगत दर को घटाने का फैसला कर सकता है।
एक्सपर्ट का कहना है कि यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या आरबीआई वित्त वर्ष 2026 में वृद्धि के लिए कोई पूर्वानुमान जारी करेगा, हालांकि आमतौर पर इसे अप्रैल की नीति में प्रकाशित किया जाता है।
आर्थिक सर्वेक्षण में उम्मीद जताई गई है कि मार्च में समाप्त होने वाली चौथी तिमाही में खाद्य मुद्रास्फीति में कमी आएगी, जो कि मौसमी रूप से सब्जियों की कीमतों में कमी और खरीफ की फसल की आवक के साथ-साथ रबी की अच्छी पैदावार के कारण संभव हो पाएगा। आरबीआई ने वित्त वर्ष 2025 में मुद्रास्फीति 4.8% रहने का अनुमान लगाया है।
आरबीआई ने बताया कि उसने सोमवार को एविओम इंडिया हाउसिंग फाइनेंस के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स को प्रशासनिक चिंताओं और अलग-अलग भुगतान दायित्वों को पूरा करने में चूक के कारण भंग कर दिया।
दिसंबर 2024 के आखिर में क्रेडिट कार्ड की संख्या दिसंबर 2019 की तुलना में दोगुनी से अधिक बढ़कर लगभग 10. 80 करोड़ हो गई है। एसबीआई रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि पिछले दशक में भारत में डिजिटल भुगतान में तेजी से बढ़ोतरी हुई है।
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