RBI के डिप्टी गवर्नर और MPC सदस्य एम राजेश्वर राव ने कहा कि मौजूदा समय में वैश्विक अनिश्चितताएं बहुत अधिक हैं, जिनके लिए लगातार सतर्कता और निगरानी की आवश्यकता है।
रजिस्ट्रार को बैंक को बंद करने और बैंक के लिए एक परिसमापक (लिक्विडेटर) नियुक्त करने का आदेश जारी करने का भी अनुरोध किया गया है।
इस साल बेहतर मानसून होने की उम्मीद से किसानों की आय बढ़ सकती है। साथ ही महंगाई को काबू करने में मदद मिलेगी।
बैंकों को यह सुनिश्चित करना होगा कि नाबालिगों के खाते, चाहे वे स्वतंत्र रूप से संचालित हों या अभिभावक के माध्यम से, उनसे अधिक निकासी न हो और ये हमेशा क्रेडिट बैलेंस में रहें।
बैंक एफडी और कॉरपोरेट एफडी दूसरा अंतर सुरक्षा होती है। बैंक एफडी में 5 लाख रुपये तक का इंश्योरेंस दिया जाता है। अगर बैंक डूब जाता है तो एफडी कराने वाले निवेशक को पैसा दिया जाता है।
बीते 4 अप्रैल को खत्म सप्ताह में कुल विदेशी मुद्रा भंडार 10.872 अरब अमेरिकी डॉलर बढ़कर 676.268 अरब अमेरिकी डॉलर हो गया। सितंबर 2024 में विदेशी मुद्रा भंडार 704.885 अरब अमेरिकी डॉलर के अब तक के सबसे टॉप लेवल को छू गया था।
भारतीय रिजर्व बैंक ने जमा और खाते पर जारी ‘मास्टर’ निर्देश में कहा कि पाकिस्तान के बाहर संचालित होने वाले पाकिस्तानी बैंकों की शाखाओं के नाम पर रुपया खाते खोलने के लिए रिजर्व बैंक से खास मंजूरी लेना बहुत जरूरी होगा।
तीनों बैंकों पर नियामकीय गाइडलाइंस को फॉलो न करने के लिए आरबीआई ने यह कदम उठाया है। बैंकों को अब मोटी राशि आरबीआई को चुकानी होगी।
रिजर्व बैंक ने कहा कि को-ऑपरेटिव बैंक द्वारा प्रस्तुत किए गए आंकड़ों के अनुसार, लगभग 98.51 प्रतिशत ग्राहक DICGC से अपनी जमा राशि की पूरी राशि प्राप्त करने के हकदार हैं।
रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि एआई और मशीन लर्निंग को ट्रांजैक्शन मॉनिटरिंग सिस्टम से जोड़ा जा सकता है।
4 अप्रैल को खत्म सप्ताह के लिए, विदेशी मुद्रा परिसंपत्तियां, जो भंडार का एक प्रमुख कम्पोनेंट है, 9.074 अरब अमेरिकी डॉलर बढ़कर 574.088 अरब अमेरिकी डॉलर हो गईं।
वित्त मंत्री ने कहा कि मंत्रालय कुछ नीतिगत फैसलों के साथ तालमेल बनाए हुए है और बजट में भी विकास को बढ़ावा देने के लिए कई घोषणाएं की गई हैं और अब दर में कटौती पर आना पूरी तरह से स्वागत योग्य है।
आरबीआई द्वारा दिन में अल्पकालिक ऋण दर (रेपो दर) में कटौती के बाद दरों में संशोधन किया गया है। दोनों सरकारी बैंकों के इस ऐलान का फायदा मौजूदा और नए उधारकर्ताओं को मिलेगा।
केंद्रीय बैंक की तरफ से रेपो रेट में कटौती का फायदा सभी बैंक ग्राहक को तुरंत नहीं देते हैं। इससे उनकी समान मासिक किस्तों यानी EMI में कमी नहीं आती है।
भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा रेपो रेट घटाए जाने से आम लोगों को सीधा फायदा होगा। अब जब बैंकों को आरबीआई से सस्ता लोन मिलेगा, तो आम लोगों को भी बैंकों से सस्ता लोन मिलेगा।
इससे पहले RBI ने फरवरी में रेपो दर 0.25% घटाकर 6.25% कर दिया था। यह मई, 2020 के बाद पहली कटौती और ढाई साल के बाद पहला संशोधन था।
आरबीआई द्वारा रेपो रेट घटाने जाने से देश में सेवाएं देने वाले सभी बैंक भी लोन की ब्याज दरें घटा देंगे। जिससे आपका लोन सस्ता हो जाएगा और आपको हर महीने कम ईएमआई चुकानी होगी।
जिस तरह आम लोग अपनी जरूरतों के लिए बैंकों से लोन लेते हैं, उसी तरह बैंक भी अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक से लोन लेते हैं। आरबीआई जिस ब्याज दर पर बैंकों को लोन देता है, उसे रेपो रेट के नाम से जाना जाता है।
आम लोग देश के किसी भी डाकघर से भारतीय डाक के माध्यम से 2000 रुपये के नोट को अपने बैंक खाते में जमा कराने के लिए आरबीआई के किसी भी कार्यालय में भेज सकते हैं।
अप्रैल महीने में दूसरी सौगात भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की ओर से मिल सकती है। आरबीआई रेपो रेट में 25 आधार अंक की कटौती कर सकता है।
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