चीन में एक कंपनी का रॉकेट प्रक्षेपण विफल हो गया है। मिशन विफल होने की वजह से तीन उपग्रह भी नष्ट हो गए हैं। रॉकेट का पहला, दूसरा और तीसरा चरण सामान्य रूप से प्रक्षेपित हुआ, लेकिन चौथे चरण में गड़बड़ी आ गई थी।
आदित्य एल1 भारत का पहला सूर्य मिशन है। इस मिशन के पीछे इसरो के कई उद्देश्य हैं। जिस तरह पृथ्वी पर भूकंप आते हैं उसी तरह सौर भूकंप भी होते हैं जिन्हें कोरोनल मास इजेक्शन कहा जाता है। सौर कंपन का अध्ययन करने के लिए सूर्य की निगरानी जरूरी है।
चीन में एक रॉकेट लॉन्च किया गया तो उसके कुछ देर बाद ही उसका एक हिस्सा जमीन पर आकर गिर गया। रॉकेट का हिस्सा नीचे गिरता देख लोग जान बचाकर भागते हुए दिखाई दिए। मामले का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
नासा के बोइंग स्टारलाइनर कैप्सूल ने सफलता पूर्वक अंतरिक्ष का सफर तय कर लिया है। इस दल के साथ जाने वाली भारतीय मूल की अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स भी शामिल हैं। सुनीता ने अपने साथियों के साथ जैसे ही अंतरिक्ष में कदम रखा, वैसे ही वह खुशी के मारे झूमने लगीं।
अंतरिक्ष स्टार्टअप अग्निकुल कॉसमॉस ने सफलतापूर्वक 30 मई को अपने रॉकेट अग्निबाण सॉर्टेड 01 मिशन को सफलतापूर्वक लॉन्च किया है। इस लॉन्च की जानकारी देते हुए इसरो ने कहा कि स्पेस सेक्टर में यह सफलता मील का पत्थर है।
रूस ने संयुक्त राष्ट्र में एक प्रस्ताव पेश किया जो अंतरिक्ष में हथियारों की तैनाती संबंधित था। फिलहाल, इस मामले में अमेरिका के विरोध की वजह से रूस को झटका लगा है।
अमेरिका के बोइंग स्पेस मिशन के विमान में खराबी आ जाने से अंतरिक्ष की उड़ान को कम से कम एक हफ्ते के लिए टाल दिया गया है। बताया जा रहा है कि विमान के वॉल्व में खराबी आने के कारण इस मिशन को टालना पड़ा है।
भारतीय मूल की अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स एक बार फिर से स्पेस में जाने को तैयार हैं। इससे पहले सुनीता साल 2006 और 2012 में दो बार अंतरिक्ष में जा चुकी हैं।
तीसरे विश्वयुद्ध के लगातार बढ़ रहे खतरे और अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा के चलते कई ताकतवरों देशों की ओर से अंतरिक्ष में हथियारों की तैनाती की जाने लगी है। यह पूरी दुनिया के लिए अच्छा संकेत नहीं है। ऐसे में रूस ने इस पर रोक लगाने के लिए संयुक्त राष्ट्र का दरवाजा खटखटाया है।
जमीनी युद्ध, हवाई युद्ध और समुद्री युद्ध में उलझी दुनिया के बीच चीन ने नए जंग की तैयारी शुरू कर दी है। चीन ने अंतरिक्ष में भी अपनी सैन्य तैनाती कर दी है। अब साइबर युद्ध इकाई का गठन करके अमेरिका समेत दुनिया के तमाम देशों के लिए चीन ने चिंता पैदा कर दी है।
जल, थल और वायुसेना के बाद चीन ने अपनी अंतरिक्ष सेना भी तैयार कर दी है। इससे अमेरिका ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए बड़ा खतरा पैदा हो गया है। ब्रिटिश अखबार द गार्जियन ने नासा चीफ बिल नेल्सन के हवाले अंतरिक्ष में चीन की स्पेस मिलिट्री मौजूद होने का दावा किया है। इस खबर ने पूरी दुनिया में खलबली मचा दी है।
अमेरिका ने क्रांतिकारी रूप से अंतरिक्ष पर्यटन की शुरुआत कर दी है। यानि भविष्य में आप भी अब अंतरिक्ष की सैर कर सकेंगे। अमेरिका का अंतरिक्ष यान जल्द ही 6 यात्रियों के साथ अंतरिक्ष की सैर करने जा रहा है। भारत की ओर से गोपी थोटाकुरा पहले अंतरिक्ष पर्यटक होंगे। वह पेशे से उद्यमी और पायलट हैं।
अंतरिक्ष के क्षेत्र में जिस तरह से इसरो के कदम बढ़ रहे हैं उससे दुनियाभर में भारत की साथ बढ़ी है। चंद्रयान 3 मिशन से जुड़ी टीम को एक और उपलब्धि मिली है। टीम को जॉन एल ‘जैक’ स्विगर्ट जूनियर पुरस्कार मिला है।
अंतरिक्ष में हर समय लगातार लाखों गतिविधियां होती रहती हैं। कई बार ये गतिविधियां हमारे सौरमंडल और पृथ्वी पर भी प्रभाव डालती हैं। ऐसी ही एक घटना हुई है। भू-चुंबकीय तूफान पृथ्वी से टकराया है।
इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन (इसरो) की सफलताओं ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी तरफ आकर्षित किया है। दुनिया के कई थिंक टैंक अब खुले तौर पर यह मानने को विवश हो गए हैं कि भारत दुनिया के तमाम देशों के लिए अंतरिक्ष का अगुवा बन चुका है। भारत की सफलताओं ने उसे अंतरिक्ष के शीर्ष में ला खड़ा किया है।
रूस ने मॉस्को में बड़े आतंकी हमले के बावजूद अंतरिक्ष में अपने तीन वैज्ञानिकों को भेजकर नई कामयाबी हासिल की है। इस मिशन में नासा के अंतरिक्ष यात्री लोरल ओ'हारा, मैथ्यू डोमिनिक, माइक बैरेट और जेनेट एप्स के साथ-साथ रूसी ओलेग कोनोनेंको, निकोलाई चूब और अलेक्जेंडर ग्रीबेनकिन शामिल हैं।
वैज्ञानिकों ने आकाश गंगा में तारों के सबसे पुराने समूह का पता लगाकर सबको हैरान कर दिया है। खगोलविदों के अनुसार आकाशगंगा छोटी मंदाकिनियों के विलय से बनी, जिससे तारों के बड़े समूहों के निर्माण का मार्ग प्रशस्त हुआ था। ये तारे 13 अरब वर्ष पुराने हैं।
हरियाणा में जन्मी कल्पना चावला भारतीय मूल की महान वैज्ञानिकों में से एक हैं। कल्पना चावल को उनके जीवन काल में न केवल एक बार बल्कि दो बार स्पेस में जाने का मौका मिला। लेकिन दूसरी बार जब स्पेस से उनका यान लौट रहा था, तो वह दुर्घटनाग्रस्त हो गया।
रूस ने अंतरिक्ष में एक और रिकॉर्ड अपने नाम कर लिया है। रूसी अंतरिक्ष यात्री ओलेग कोनोनेंको ने रविवार को अंतरिक्ष में 878 दिन से अधिक समय बनाने का रिकॉर्ड अपने नाम किया है। उन्होंने अपने ही देश के एक अंतरिक्ष यात्री का रिकॉर्ड तोड़ा है। अभी उम्मीद है कि वह 1100 दिन से अधिक समय बिताने के बाद धरती पर वापस लौटेंगे।
जापान के स्पेसक्राफ्ट कागुया ने चांद की सतह से एक वीडियो रिकॉर्ड किया है जो कि सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। इस वीडियो में चांद की सतह से पृथ्वी अस्त होते हुए दिख रही है।
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