तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) के सरगना नूर वली महसूद पाकिस्तान के लिए सबसे बड़ा खतरा बन गया है। यह ऐसा खतरा है जो पाकिस्तान में सत्ता की जड़ों को हिला रहा है। चलिए ऐसे में आपको महसूद के बारे में बताते हैं।
सीजफायर से ठीक पहले पाकिस्तान ने अफगानिस्तान पर ड्रोन अटैक किया था। अफगानिस्तान की तालिबान सरकार ने पाकिस्तान के इस हमले पर अब प्रतिक्रिया दी है।
सोशल मीडिया पर एक वीडियो जमकर वायरल हो रहा है। वीडियो को लेकर दावा किया जा रहा है कि तालिबान के लड़ाकों ने पाकिस्तानी टैंकों पर कब्जा कर लिया है। आइए जानते हैं पूरा मामला।
अफगानिस्तान ने पाकिस्तान को कड़ा सबक सिखाया है। हाल ही में हुए संघर्ष के दौरान तालिबान लड़ाकों ने पाकिस्तनी आर्मी को धूल चटा दी है। अब ऐसे भी वीडियो सामने आए हैं जिनमें पाक फौजियों की पतलूनों को दिखाया गया है।
पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच मंगलवार को हुई भीषण झड़पों के बाद पाकिस्तान ने कहा है कि उसने तालिबान शासन के साथ 48 घंटे का सीजफायर समझौता किया है।
अफगानिस्तान में हुकूमत कर रहे तालिबान लड़ाकों और पाकिस्तान के बीच फिर गोलीबारी हुई है। पाकिस्तान का दावा है कि कुर्रम जिले में झड़पों में अफगान टैंकों और सैन्य चौकियों को नुकसान पहुंचा है।
अफगानिस्तान के विदेश मंत्री आमिर खान मुत्तकी ने कहा कि सिर्फ पाकिस्तान से ही क्यों झगड़ा होता है, पाकिस्तान को यह सोचना चाहिए। उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान में TTP का कोई मरकज नहीं है।
अफगान विदेश मंत्री अमीर खान मुत्ताकी का भारत दौरा क्षेत्रीय कूटनीति और भू-राजनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण है। यह तालिबान और भारत के बीच रिश्तों को मजबूत करने का संकेत है, जिससे पाकिस्तान की चिंताएं बढ़ सकती हैं।
तालिबान नेता और अफगानिस्तान के विदेश मंत्री शनिवार को देवबंद का दौरा किया। दरअसल तालिबान मदरसों औऱ इस्लामी विचार के लिहाज से दारुल उलूम को अपना आदर्श मानता है।
अफगान विदेश मंत्री अमीर खान मुत्ताकी ने दिल्ली में पाकिस्तान को कड़ी चेतावनी दी और कहा कि अफगानिस्तान की हिम्मत को न परखा जाए। उन्होंने भारत के साथ रिश्ते मजबूत करने की बात कही और चाबहार पोर्ट से व्यापार बढ़ाने पर जोर दिया।
अफगानिस्तान में तालिबानियों की सत्ता आने के बाद से भारत ने काबुल से अपने संबंध को सीमित कर दिया था। मगर अब बदली हुई परिस्थितियों में भारत और अफगानिस्तान के संबंधों में फिर से बहाली की उम्मीदें जाग गई हैं।
अफगानिस्तान में तालिबान सरकार ने इंटरनेट पर पूरी तरह से बैन लगाने की खबरों को खारिज कर दिया है। तालिबान सरकार ने इसे अफवाह बताया है।
अफगानिस्तान में तालिबान ने इंटरनेट पर पूरी तरह से बैन लगा दिया है। इंटरनेट पर बैन की वजह से दैनिक जीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। इससे टेलीकॉम सेवाओं पर भी व्यापक असर पड़ा है।
अफगानिस्तान में बंदूक के बदल पर सरकार बनाने वाले आतंकी संगठन तालिबान ने अपनी छवि सुधारने के प्रयासों को तेज कर दिया है। तालिबान ने महीनों से अगवा किए गए 2 ब्रिटिश नागरिकों को बिना शर्ता रिहा कर दिया।
तालिबानी शासन ने पूरे अफगानिस्तान में इंटरनेट सेवाओं पर बैन लगा दिया है। तालिबान ने इंटरनेट और फाइबर-ऑप्टिक सेवा को अनैतिकता की वजह बताया है।
त्रिपक्षीय बैठक में अफगानिस्तान में सक्रिय आतंकवादी संगठनों की मौजूदगी और बढ़ते सुरक्षा खतरे भी अहम विषय होंगे। अफगानिस्तान में तालिबान की सत्ता में वापसी के बाद से कई आतंकी संगठनों की गतिविधियां बढ़ी हैं, जिससे पाकिस्तान और चीन दोनों को चिंता है।
ब्रिटेन की रक्षा मंत्रालय से जुड़ी कंपनी "द जेट सेंटर" में डेटा लीक से 3,700 लोगों की निजी जानकारी खतरे में है। इनमें अफगान नागरिक, ब्रिटिश सैनिक और पत्रकार शामिल हैं। लीक हुई जानकारी के कारण अफगानों की जान को तालिबान से गंभीर खतरा हो सकता है।
तालिबानी शासन में महिलाओं और लड़कियों के साथ बेहद बुरा बर्ताव हो रहा है। तालिबान ने महिला मामलों के मंत्रालय को भी भंग कर दिया है। अल्पसंख्यक जातीय और धार्मिक समूहों की हालत भी यहां अच्छी नहीं है।
तालिबान शासन के 4 सालों में अफगानिस्तान में औरतों, अल्पसंख्यकों और मानवाधिकारों का गंभीर हनन हुआ है। महिलाओं की शिक्षा, रोजगार और आजादी पर पाबंदियां लगी हैं। अंतरराष्ट्रीय अदालतें कार्रवाई कर रही हैं, लेकिन हालात लगातार बिगड़ रहे हैं। अफगान जनता तालिबान के सख्त शासन में सिसक रही है।
अफगानिस्तान में तालिबान राज चल रहा है। तालिबानी शासन के तहत अफगानिस्तान में महिलाओं और लड़कियों पर अत्याचार किया जा रहै है। संयुक्त राष्ट्र के एक स्वतंत्र जांचकर्ता ने इससे संबंधित रिपोर्ट संयुक्त राष्ट्र महासभा को सौंपी है।
संपादक की पसंद
लेटेस्ट न्यूज़