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हार्ट के मरीजों के लिए खुशखबरी, अब TAVI तकनीक से बिना सीना चीरे बदला जाएगा वाल्व

TAVI तकनीक के जरिए हार्ट वाल्व को बदला जा सकता है। वो भी बिना सर्जरी के। कानपुर के डॉक्टर्स ने इस तकनीक में हार्ट वाल्व बदलने में कामयाबी पाई है।

Edited By: Mangal Yadav @MangalyYadav
Published : Jan 22, 2026 09:10 pm IST, Updated : Jan 22, 2026 09:30 pm IST
सांकेतिक तस्वीर- India TV Hindi
Image Source : FREEPIK सांकेतिक तस्वीर

कानपुरः कानपुर में हृदय रोगियों के लिए एक बड़ी राहत व ख़ुशी प्रदान करने वाली खबर सामने आई है। जिसके तहत अब हृदयरोगियों की पारंपरिक ओपन हार्ट सर्जरी की जगह आधुनिक TAVI (Transcatheter Aortic Valve Implantation) तकनीक से ऑर्टिक वाल्व को सिर्फ जांघ की नस के रास्ते बदला जा सकता है। यह कम जोखिम वाली, न्यूनतम इनवेसिव प्रक्रिया उन मरीजों के लिए वरदान साबित हो रही है, जिनके लिए बड़ी सर्जरी का खतरा ज्यादा होता है।

TAVI क्या है और कैसे काम करती है?

कानपुर कार्डियोलॉजी संस्थान के जाने-माने विशेषज्ञ और एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. संतोष कुमार सिन्हा (LPS इंस्टीट्यूट ऑफ कार्डियोलॉजी, कानपुर) ने बताया कि TAVI एक कैथेटर-बेस्ड तकनीक है, जिसमें एक नया बायोप्रोस्थेटिक वाल्व जांघ की बड़ी नस (फेमोरल आर्टरी) के रास्ते हृदय तक पहुंचाया जाता है। यह वाल्व फोल्डेड अवस्था में डाला जाता है और हृदय में पहुंचकर खुद-ब-खुद खुलकर पुराने खराब ऑर्टिक वाल्व को रिप्लेस कर देता है। पूरी प्रक्रिया में महज 30-35 मिनट लगते हैं। मरीज को सामान्य या लोकल एनेस्थीसिया दिया जाता है, और ज्यादातर केस में 1-2 दिन में ही अस्पताल से डिस्चार्ज हो जाते हैं।

ओपन हार्ट सर्जरी बनाम TAVI: बड़ा फर्क

पहले गंभीर ऑर्टिक स्टेनोसिस (ऑर्टिक वाल्व का सिकुड़ना) के मरीजों को ओपन हार्ट सर्जरी से गुजरना पड़ता था। इसमें सीने को चीरकर हृदय तक पहुंचा जाता था, हार्ट-लंग मशीन का इस्तेमाल होता था, और रिकवरी में हफ्तों-महीनों लग जाते थे। संक्रमण, रक्तस्राव, सांस की तकलीफ और अन्य जटिलताओं का जोखिम काफी अधिक होता था। विशेष रूप से बुजुर्ग, कमजोर फेफड़ों वाले, किडनी रोगी या पहले से कई बीमारियों से ग्रस्त मरीजों के लिए यह प्रक्रिया जानलेवा साबित हो सकती थी।

वहीं TAVI में कोई बड़ा चीरा नहीं लगता, इसलिए रक्तस्राव और संक्रमण का खतरा न्यूनतम रहता है। बेहोशी से जुड़ी जटिलताएं भी कम होती हैं। डॉ. संतोष कुमार सिन्हा के अनुसार, ऐसे मरीजों में जहां सर्जरी का जोखिम 15-20% तक मौत का होता है, TAVI से सफलता दर बहुत बेहतर है और रिकवरी तेज होती है। मरीज जल्दी सामान्य जीवन में लौट आते हैं।

TAVI के प्रमुख लाभ

- संक्रमण और रक्तस्राव का जोखिम बहुत कम  

- कोई बड़ा चीरा या सीना खोलना नहीं  

- छोटी प्रक्रिया: सिर्फ 30-35 मिनट  
- अस्पताल में कम समय: 1-2 दिन में डिस्चार्ज  
- बुजुर्ग और हाई-रिस्क मरीजों के लिए सुरक्षित विकल्प  
- बेहतर जीवन गुणवत्ता और लंबी उम्र  

भारत में TAVI का नया अध्याय: OneKria ट्रायल

डॉ. संतोष कुमार सिन्हा ने खास हमारे संवाददाता से बात करते हुए जानकारी दी कि भारत में इस तकनीक को और सुलभ बनाने के लिए अमेरिकी कंपनी OneKria  के सहयोग से एक क्लिनिकल ट्रायल चल रहा है। इस ट्रायल में देशभर के 7 प्रमुख अस्पताल शामिल हैं, जिनमें कानपुर का LPS इंस्टीट्यूट ऑफ कार्डियोलॉजी भी प्रमुख भूमिका निभा रहा है। शुरुआती चरण में कुल 30 मरीजों पर यह प्रक्रिया की जाएगी, और इन सभी मरीजों का इलाज पूरी तरह निशुल्क होगा। आमतौर पर TAVI की लागत 15-20 लाख रुपये तक होती है, इसलिए यह ट्रायल उन गरीब और मध्यम वर्ग के मरीजों के लिए सुनहरा अवसर है जो इस महंगी लेकिन जीवन रक्षक तकनीक से वंचित रह जाते हैं।

ट्रायल के तहत मरीजों की सख्त स्क्रीनिंग की जा रही है, और प्रक्रिया के बाद लंबे समय तक फॉलो-अप किया जाएगा ताकि भारत में इस तकनीक की सुरक्षा और प्रभावशीलता को और मजबूत प्रमाण मिले। डॉ. सिन्हा ने कहा, "यह ट्रायल न केवल मरीजों को मुफ्त इलाज देगा, बल्कि भारतीय संदर्भ में TAVI को और बेहतर बनाने में मदद करेगा।"

कानपुर से संवाददाता अनुराग श्रीवास्तव की रिपोर्ट

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