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भारत में 500 साल पहले कोई भी आलू नहीं खाता था, क्या आपको पता है इसकी वजह?

 Published : Feb 01, 2026 08:16 am IST,  Updated : Feb 01, 2026 08:16 am IST

अगर हम आपसे कहें कि आज से 500 साल पहले भारत में कोई आलू खाता ही नहीं था तो क्या आपको यकीन होगा? आइए, आज हम आपको आलू के दिलचस्प इतिहास के बारे में बताते हैं।

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भारत में बड़े पैमाने पर आलू की खेती की जाती है। Image Source : PIXABAY REPRESENTATIONAL

Potato Interesting Facts: आज हम रोज आलू की सब्जी, समोसा, आलू पराठा या फ्रेंच फ्राइज़ खाते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि 500 साल पहले भारत में किसी ने भी आलू नहीं खाया था? इस बात पर भले ही आपको हैरानी हो रही हो लेकिन यह 100 फीसदी सच है! दरअसल, आज भले ही हम आलू के बगैर अपने किचन की कल्पना भी नहीं कर सकते, लेकिन यह मूल रूप से भारतीय नहीं है। आज हम आपको आलू से जुड़ी कई दिलचस्प बातें बताने जा रहे हैं।

यूरोप में पहले आलू को जहरीला मानते थे लोग

आलू की असली जन्मभूमि दक्षिण अमेरिका के एंडीज पर्वत हैं, खासकर पेरू और बोलिविया के इलाके। इन इलाकों में करीब 7 से 8 हजार साल पहले लोगों ने आलू को उगाना शुरू किया था। आलू की फसल को वे 'धरती का सोना' कहते थे। हालांकि इसके सैकड़ों साल बाद तक भारत या एशिया में इसका नामोनिशान नहीं था।16वीं सदी में जब क्रिस्टोफर कोलंबस ने अमेरिका की खोज की, तो 'कोलंबियन एक्सचेंज' शुरू हुआ। यूरोपीय नए-नए पौधे और फसलें अपने साथ ले आए। स्पेनिश लोगों ने आलू को यूरोप पहुंचाया, जहां शुरू में कुछ लोग इसे जहरीला या बीमारी का कारण मानते थे। हालांकि धीरे-धीरे यह यूरोप में लोकप्रिय हो गया।

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Image Source : PUBLIC DOMAINदुनिया में अलग-अलग तरीके के आलू होते हैं।

17वीं सदी में भारत में शुरू हुई आलू की खेती

भारत में आलू पुर्तगाली और डच व्यापारियों के साथ आया। पुर्तगाल के लोग 15वीं सदी के अंत में समुद्र के रास्ते भारत आना शुरू हुए और 17वीं सदी की शुरुआत में उन्होंने पश्चिमी तट के मालाबार क्षेत्र में आलू की खेती शुरू की। वे इसे 'बटाटा' कहते थे और आज भी आलू को इस इलाके में इसी नाम से बुलाया जाता है। हालांकि आने वाले कई सालों तक इसकी खेती छोटे इलाके में ही होती रही। फिर ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी ने 18वीं सदी में आलू को बड़े पैमाने पर फैलाया। उन्होंने किसानों को मुफ्त या सस्ते में आलू के बीज दिए और इसकी खेती को बढ़ावा दिया। इस तरह आलू धीरे-धीरे पूरे भारत में फैलता गया।

500 साल पहले समोसे में भी नहीं था आलू!

आलू की खेती बंगाल से लेकर बाड़मेर तक होने लगी। 18वीं सदी के अंत तक यह उत्तरी पहाड़ी इलाकों में फैल गया, और 19वीं सदी में यह पूरे भारत में लोकप्रिय हो गया। तो 500 साल पहले यानी कि लगभग 1526 के आसपास भारत में आलू था ही नहीं इसलिए यहां के किसी भी शख्स ने इसका स्वाद नहीं चखा था। पुराने भारतीय ग्रंथों या रेसिपी में समोसे के कई प्रकार बताए गए हैं, लेकिन किसी में आलू का नाम नहीं है। दोसा में भी पुराने जमाने में केले या अन्य चीजें भरी जाती थीं, आलू नहीं। आज आलू बिना भारत की रसोई अधूरी लगती है, लेकिन सच यही है कि यह विदेश से आया है और वक्त बीतने के साथ हमारे जीवन का अहम हिस्सा बन गया।

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