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"बंगाल में नहीं रुकेगा SIR", डेटा में हेराफेरी के ममता बनर्जी के आरोप पर बरसे दिलीप घोष

दिलीप घोष ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर SIR प्रक्रिया को रोकने की कोशिश करने का आरोप लगाया है। बीजेपी नेता ने कहा कि उनका एकमात्र एजेंडा एसआईआर को रोकना है, लेकिन ऐसा नहीं होने वाला है।

Edited By: Malaika Imam @MalaikaImam1
Published : Feb 01, 2026 08:48 am IST, Updated : Feb 01, 2026 08:53 am IST
ममता बनर्जी के आरोप पर दिलीप घोष का पलटवार- India TV Hindi
Image Source : PTI ममता बनर्जी के आरोप पर दिलीप घोष का पलटवार

पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (Special Intensive Revision- SIR) को लेकर राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। बीजेपी के वरिष्ठ नेता दिलीप घोष ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर इस प्रक्रिया को रोकने की कोशिश करने का आरोप लगाया है। दूसरी ओर, मुख्यमंत्री ने मुख्य चुनाव आयुक्त को पत्र लिखकर इस पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठाए हैं।

"SIR को रोकना है एजेंडा"

शनिवार को मीडिया से बात करते हुए दिलीप घोष ने कहा, "उन्होंने (मुख्यमंत्री ममता बनर्जी) उनसे (मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से) कई बार मुलाकात की है और बैठकें की हैं। उनका एकमात्र एजेंडा एसआईआर को रोकना है, लेकिन ऐसा नहीं होने वाला है। विशेष गहन SIR पूरी हो जाएगी और उसके बाद चुनाव भी होंगे।"

"डेटा के साथ हो रही छेड़छाड़" 

इस बीच, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मुख्य चुनाव आयुक्त को लिखे पत्र में प्रक्रिया के संचालन पर चिंता जताई है। ममता बनर्जी ने सवाल उठाया कि केंद्र के 5 और बंगाल के 12 पर्यवेक्षकों के अलावा त्रिपुरा कैडर के 4 आईएएस अधिकारियों को पर्यवेक्षक क्यों बनाया गया है। पत्र में आरोप लगाया गया कि कुछ पर्यवेक्षक मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय से काम कर रहे हैं और उन्होंने बिना किसी कानूनी अधिकार के चुनाव आयोग के पोर्टल पर नियंत्रण कर लिया है। मुख्यमंत्री ने आशंका जताई कि डेटा में हेरफेरी करके बड़ी संख्या में पात्र मतदाताओं के नाम हटाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि हजारों माइक्रो-ऑब्जर्वर को बिना पर्याप्त प्रशिक्षण और विशेषज्ञता के इस संवेदनशील कार्य में लगाया गया है।

सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप

इससे पहले, सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु में चल रहे SIR प्रक्रिया को लेकर एक महत्वपूर्ण निर्देश दिया है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की पीठ ने आदेश दिया है कि तार्किक विसंगति सूची के तहत आने वाले मतदाताओं के नाम ग्राम पंचायत भवन, तालुका कार्यालय और शहरी वार्ड कार्यालयों में प्रदर्शित किए जाएं। जिन लोगों के नाम इस सूची में हैं, उन्हें अपने दस्तावेज जमा करने के लिए 10 दिन का समय दिया जाए। सूची में विसंगति का स्पष्ट कारण भी बताया जाना चाहिए।

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