1. Hindi News
  2. विदेश
  3. अमेरिका
  4. 'भारत अड़ा रहा तो अमेरिका भी अपना रुख नरम नहीं करेगा', टैरिफ पर ट्रंप के आर्थिक सलाहकार की चेतावनी

'भारत अड़ा रहा तो अमेरिका भी अपना रुख नरम नहीं करेगा', टैरिफ पर ट्रंप के आर्थिक सलाहकार की चेतावनी

 Published : Aug 28, 2025 07:50 am IST,  Updated : Aug 28, 2025 08:30 am IST

अमेरिका और भारत के संबंधों की जटिलता बढ़ती ही जा रही है। टैरिफ को लेकर दोनों देशों के संबंध बिगड़ने लगे हैं। ट्रंप और उनके अधिकारियों के बयान भी इस आग में घी डालने का काम कर रहे हैं।

 Kevin Hassett- India TV Hindi
अमेरिकी राष्ट्रीय आर्थिक परिषद के निदेशक Kevin Hassett Image Source : ANI

वाशिंगटन डीसी : अमेरिका द्वारा बुधवार को भारतीय वस्तुओं पर 50 प्रतिशत टैरिफ लागू करने के बाद दोनों देशों के संबंध हाल के दिनों में अपने सबसे बुरे दौर से गुजर रहे हैं। वहीं दोनों देशों के बीच बयानों का सिलसिला भी जारी है। अमेरिकी राष्ट्रीय आर्थिक परिषद के निदेशक और व्हाइट हाउस के सलाहकार केविन हैसेट ने अमेरिका और भारत के संबंधों को जटिल बताते हुए कहा है कि अगर भारत नहीं मानता है तो अमेरिका अपना रुख नरम नहीं करेगा। उन्होंने कहा कि अमेरिकी उत्पादों के लिए अपने बाज़ार खोलने को लेकर भारत हठधर्मिता अपना रहा है। हैसेट ने भारत पर लगाए गए अमेरिकी टैरिफ को यूक्रेन संघर्ष को लेकर रूस पर दबाव बनाने के व्यापक जियो पॉलिटिक्स के प्रयासों से जोड़ा।

राष्ट्रपति ट्रंप नहीं देंगे रियायत

व्हाइट हाउस में एक बैठक के दौरान अमेरिकी मीडिया से बात करते हुए हैसेट ने कहा कि अगर भारत अपनी जिद से पीछे नहीं हटता है तो राष्ट्रपति ट्रंप भी कोई रियायत नहीं देंगे। उन्होंने कहा कि यह एक जटिल रिश्ता है और इसका एक हिस्सा रूस पर दबाव डालने की हमारी कोशिश से जुड़ा हुआ है, ताकि यूक्रेन-रूस को लेकर शांति समझौता हो सके और लाखों लोगों की जान बचाई जा सके। इसके साथ ही भारत का अपने बाजार खोलने में अड़ियल रवैया भी इसमें शामिल है।

रूस से तेल की खरीद बनी भारी टैरिफ की वजह?

हैसेट का यह बयान ऐसे समय में आया है जब वाशिंगटन ने भारतीय आयातों पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगा दिया है। यह टैरिफ अमेरिकी सीमा शुल्क एवं सीमा सुरक्षा (सीबीपी) द्वारा प्रकाशित एक ड्राफ्ट नोटिस के बाद लगाया गया है। नोटिस के अनुसार, ये अतिरिक्त शुल्क राष्ट्रपति के 6 अगस्त, 2025 के कार्यकारी आदेश 14329 को प्रभावी बनाने के लिए लगाए जा रहे हैं, जो भारत से आयातित वस्तुओं के आयात पर शुल्क की एक नई दर निर्धारित करता है। अमेरिका ने पहले 25 प्रतिशत का टैरिफ लगाया था जिसे बढ़ाकर 50 प्रतिशत कर दिया है। अमेरिका चाहता था कि भारत रूस से तेल नहीं खरीदे। लेकिन भारत ने अपने हितों को ख्याल रखते हुए रूस से सस्ता तेल खरीदना जारी रखा। 

अंतत: हम एक साथ आ जाएंगे: स्कॉट बेसेंट

बता दें कि इससे पहले भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर का तल्ख बयान सामने आया था। उन्होंने रूस से भारत के तेल खरीदे जाने के आरोपों पर कहा कि अगर अमेरिका को भारत द्वारा रूसी तेल खरीदने से समस्या है तो वह भारत से शोधित तेल खरीदना बंद कर दे। ट्रंप को लग रहा था कि 50 प्रतिशत टैरिफ लगाते ही भारत गिडडगिड़ाने लगेगा। लेकिन जयशंकर के इस तल्ख बयान से अमेरिका के होश उड़ गए हैं। इसके बाद अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट से जब इस संबंध में पूछा गया तो उनहोंने कहा-"खैर, भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और अमेरिका दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था। अंततः हम एक साथ आ ही जाएंगे।" अमेरिका के इस बयान से साफ है कि वह भारत से दुश्मनी मोल लेने का नुकसान अच्छी तरह से समझ रहा है।

 

Advertisement

India TV हिंदी न्यूज़ के साथ रहें हर दिन अपडेट, पाएं देश और दुनिया की हर बड़ी खबर। US से जुड़ी लेटेस्ट खबरों के लिए अभी विज़िट करें विदेश