बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में शेखपुरा विधानसभा सीट पर कांटे की टक्कर रहने वाली है। पहले यह सीट कांग्रेस का गढ़ मानी जाती थी। हालांकि, अब समीकरण बदल चुके हैं और इस बार जेडीयू और आरजेडी के बीच कांटे की टक्कर रहने की संभावना है। पिछले तीन चुनाव की बात करें तो दो बार जेडीयू और एक बार आरजेडी को इस सीट पर जीत मिली है। इस बार भी इन्हीं दोनों पार्टियों के बीच कड़ा मुकाबला होने के आसार हैं। इस बार यहां छह नवंबर को मतदान होना है।
प्रशांत किशोर की जनसुराज पार्टी यहां के समीकरण बिगाड़ सकती है। अगर जनसुराज के उम्मीदवार को ज्यादा वोट नहीं मिलते हैं या इंडिया गठबंधन के उम्मीदवार के वोट कटते हैं तो एनडीए की जीत तय है। 2024 लोकसभा चुनाव में भी यहां से एनडीए उम्मीदवार को बढ़त मिलनी तय है।
कब किसे मिली जीत?
शेखपुरा विधानसभा सीट पर 1951 से चुनाव होते आ रहे हैं। यह जमुई लोकसभा में शामिल छह विधानसभा सीटों में से एक है। यहां कुल 19 चुनाव हो चुके हैं, जिनमें दो उपचुनाव भी शामिल हैं। यहां सबसे ज्यादा 12 बार कांग्रेस को जीत मिली है, लेकिन 2005 के बाद से कांग्रेस यहां कोई चुनाव नहीं जीती है। 1967 से 72 के बीच सीपीआई ने भी लगातार तीन बार इस सीट पर कब्जा जमाया था। इसके बाद 33 साल तक राजो सिंह के परिवार ने यहां राज किया। उन्होंने पांच बार यहां से जीत हासिल की। वह निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में भी एक बार जीत हासिल कर चुके हैं। राजो सिंह के बेटे संजय और उनकी पत्नी सुनीला ने भी दो-दो बार यहां से जी हासिल की। 2010 में सुशीला की हार के साथ यहां से कांग्रेस और राजो सिंह के परिवार का दबदबा खत्म हुआ।
क्या हैं मौजूदा समीकरण?
कांग्रेस पार्टी यहां 2005 के बाद से कोई चुनाव नहीं जीत पाई है। 2010 और 2015 में यह सीट जेडीयू के खाते में गई थी, लेकिन 2020 में लोजपा की बगावत के चलते यहां पहली बार आरजेडी को जीत मिली। इसके बाद 2024 में एनडीए गठबंधन की एकता के चलते लोजपा उम्मीदवार ने यहां से बढ़त हासिल की। ऐसे में एनडीए उम्मीदवार की जीत की उम्मीद लगाई जा सकती है, लेकिन कांटे की टक्कर होना तय है।
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