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UGC के नए नियमों के खिलाफ याचिका दायर, जानें मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा

 Reported By: Atul Bhatia, Edited By: Akash Mishra
 Published : Jan 28, 2026 11:37 am IST,  Updated : Jan 28, 2026 11:49 am IST

UGC के नए नियमों के खिलाफ याचिका दायर की गई है। मामले में याचिकाकर्ता के वकील ने जल्द सुनवाई की मांग की है।

सांकेतिक फोटो- India TV Hindi
सांकेतिक फोटो Image Source : PTI (FILE)

उच्च शिक्षा संस्थानों को लेकर जारी UGC के नए नियमों के खिलाफ याचिका दायर की गई है। याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने जल्द सुनवाई का आश्वासन दिया। CJI सूर्यकांत ने कहा कि हमें पता है कि क्या हो रहा है। सुनिश्चित करें कि याचिका की सभी कमियां दूर हो जाएं। उन्होंने कहा कि हम इसे सूचीबद्ध करेंगे। याचिका में सुप्रीम कोर्ट से मांग की गई है कि वो UGC रेगुलेशन 2026 के रेगुलेशन 3(c) को लागू करने पर रोक लगाए। 2026 के नियमों के अंतर्गत बनाई गई व्यवस्था सभी जाति के व्यक्तियों के लिए लागू हो।

याचिककर्ता के वकील ने आज सुप्रीम कोर्ट से जल्द सुनवाई की मांग की। याचिकाकर्ता ने कहा कि सामान्य वर्ग के खिलाफ भेदभाव की संभावना है। याचिका में कहा गया है कि ये नियम सामान्य वर्ग के लिए भेदभावपूर्ण है। उनके मौलिक अधिकारों का हनन करने वाले हैं। 

मामले पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का बयान 

इस बीच हाल में ही केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का भी एक बयान सामने आया था। उन्होंने कहा था, "मैं अत्यंत विनम्रतापूर्वक यह स्पष्ट करना चाहता हूं कि यूजीसी के नए नियमों से किसी के साथ भेदभाव या उत्पीड़न नहीं होगा। कानून का दुरुपयोग किसी के द्वारा नहीं किया जाएगा।"  उन्होंने आगे कहा, 'चाहे वह यूजीसी हो, केंद्र सरकार हो या राज्य सरकार, इसका दुरुपयोग न होने देना हमारी जिम्मेदारी होगी।"

13 जनवरी को अधिसूचित किए गए थे नियम

बता दें कि UGC द्वारा 'उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने के विनियम, 2026' नियम को 13 जनवरी को अधिसूचित किया गया था, जो 15 जनवरी से लागू हुए। हायर एजूकेशन में जातिगत भेदभाव को जड़ से खत्म करने के नाम पर लाए गए नियम का विरोध पूरे देश में हो रहा है। हालांकि यूजीसी ने कहा है कि  कि ये नियम 2012 के पुराने एंटी-डिस्क्रिमिनेशन फ्रेमवर्क को मजबूत करने के लिए लाए गए हैं। 

जानिए विवाद की जड़

  • हर कॉलेज और विश्वविद्यालय में Equity Committee, Equity Squad और Equal Opportunity Cell (EOC) बनाना अनिवार्य।
  • SC, ST और OBC छात्रों-कर्मचारियों के खिलाफ जातिगत भेदभाव की शिकायतों पर तुरंत जांच।
  • 24×7 हेल्पलाइन, नियमित मॉनिटरिंग और रिपोर्टिंग।
  • भेदभाव साबित होने पर संस्थान की फंडिंग रोकी जा सकती है, डिग्री/कोर्स पर रोक या UGC मान्यता रद्द हो सकती है।
  • भेदभाव की परिभाषा को विस्तार दिया गया, जिसमें OBC को स्पष्ट शामिल किया गया।
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