JEE एडवांस्ड एग्जाम को बेहतर और कम स्ट्रेसफुल असेसमेंट बनाने के मकसद से IIT काउंसिल ने एक महत्वूर्ण कदम उठाया है। Career 360 की एक रिपोर्ट के अनुसार, IIT कानपुर और IITs के जॉइंट एडमिशन बोर्ड (JAB) को "क्वांटिटेटिव और रीजनिंग स्किल्स के एडेप्टिव टेस्टिंग" पर स्विच करने के एक प्रपोजल का मूल्यांकन करने का काम सौंपा गया है, जिसमें एग्जाम "स्टूडेंट के परफॉर्मेंस के आधार पर डायनामिक रूप से सवाल जेनरेट करता है"।
IIT काउंसिल के मिनट्स के अनुसार, बदलाव का प्रस्ताव IIT कानपुर के डायरेक्टर मनिंद्र अग्रवाल की तरफ से आया था, जिन्होंने JEE एडवांस्ड के "मौजूदा स्ट्रक्चर" और "बड़ी कोचिंग इंडस्ट्री के फैलाव और परिवारों पर पड़ने वाले बड़े इमोशनल और फाइनेंशियल स्ट्रेस" के बारे में चिंता जताई थी। इसका मकसद IIT में BTech एडमिशन की दो-स्टेप प्रोसेस का दूसरा स्टेप, IIT JEE को ज़्यादा "स्टूडेंट फ्रेंडली" और "कम स्ट्रेसफुल" बनाना है।
क्रिटिकल थिंकिंग, कोचिंग नहीं
55वीं मीटिंग की रिपोर्ट के अनुसार, अग्रवाल ने तर्क दिया कि IIT JEE परीक्षा को "क्रिटिकल थिंकिंग और रीजनिंग स्किल्स का बेहतर आकलन करने की जरूरत है और इसे ऑपरेशनल दिक्कतों वगैरह के लिए और भी अधिक फूलप्रूफ बनाया जाना चाहिए।" उन्होंने "क्वांटिटेटिव और रीजनिंग स्किल्स के एडेप्टिव टेस्टिंग" का सुझाव दिया, जो स्टूडेंट के परफॉर्मेंस के आधार पर डायनामिक रूप से सवाल जेनरेट करता है।
अडेप्टिव टेस्टिंग क्या है और कैसे काम करेगा?
अडेप्टिव टेस्टिंग मॉडल है, जिसमें प्रश्न शुरुआत में आसान व सरल होंगे। फिर कैंडिडेट्स जैसे-जैसे प्रश्न के करेक्ट उत्तर देंगे, प्रश्नों का स्तर कठिन होता जाएगा। सरल भाषा में कहें तो एग्जाम की शुरुआत आसान सवालों से होगी और फिर सही जवाब मिलने पर सवालों का स्तर क्लिष्ट (कठिन) होता जाएगा यानी स्टूडेंट के परफॉर्मेंस के आधार पर डायनामिक रूप से सवाल जेनरेट होंगे।
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