जिन कैंडिडेट्स का सपना एक IAS बनने का होता है, उन्हें इसके लिए UPSC CSE (सिविल सर्विस एग्जाम) क्लियर करना होता है। इसके लिए उन्हें तीन स्टेज – प्रीलिम्स, मेन्स और इंटरव्यू से गुजरना होता है। इसमें मेन्स परीक्षा डिस्क्रिप्टिव होती है, जो कई कैंडिडेट्स को मुश्किल लगती है। UPSC मेन्स एग्जाम में 9 पेपर होते हैं, जिनमें सभी में डिस्क्रिप्टिव आंसर वाले सवाल होते हैं। अब सवाल आता है कि ये यूपीएससी में 7-5-3 नियम क्या है? आइए इस खबर के जरिए इस सवाल के जवाब को जानते हैं।
7-5-3 नियम, आंसर-राइटिंग से कनेक्ट है। आंसर राइटिंग के 7-5-3 रूल को समझने से पहले, कैंडिडेट को UPSC मेन्स एग्जाम में पूछे जाने वाले सवालों, जैसे इवैल्यूएट/क्रिटिकली इवैल्यूएट, डिस्कस, इलुसिडेट, क्रिटिकली एग्ज़ामिन और कमेंट से खुद को परिचित कर लेना चाहिए। कैंडिडेट के लिए पिछले सालों के पेपर देखना मददगार होता है ताकि वे सबसे ज़्यादा पूछे जाने वाले सवालों को समझ सकें और उन्हें अपनी आंसर राइटिंग प्रैक्टिस में शामिल कर सकेंगे।
क्या है 7-5-3 रूल?
आंसर लिखने का 7-5-3 रूल कई मार्शल आर्टिस्ट के डिसिप्लिन कोड पर आधारित है। इस रूल को फॉलो करना काफी आसान है, क्योंकि इसमें तीन नंबर होते हैं:
सात – कैंडिडेट को हर सवाल का जवाब 7 मिनट के अंदर देना चाहिए।
पांच – अपने जवाबों में कीवर्ड से जुड़े 5 पॉइंट लिखें।
तीन – सवाल में दी गई जरूरतों के हिसाब से हर पॉइंट को 3 डाइमेंशन में डिटेल में बताएं, और नीचे दिए गए जरूरी पॉइंट पर ध्यान दें:
- सोशल, इकोनॉमिकल, पॉलिटिकल और ज्योग्राफिकल नजरिया
- पक्ष, विपक्ष और निष्कर्ष
- क्या/क्यों/कैसे
UPSC CSE परीक्षा भारत के सबसे कठिन एग्जाम में से एक है। यह देश की टॉप सर्विसेज़, जिसमें इंडियन एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विस (IAS), इंडियन फॉरेन सर्विस (IFS), इंडियन पुलिस सर्विस (IPS), और कई दूसरी सर्विसेज़ शामिल हैं, में एंट्री पॉइंट का काम करता है। बता दें कि इसकी प्रारंभिक परीक्षा में वस्तुनिष्ठ प्रकार के प्रश्नों के साथ दो पेपर होते हैं, जबकि मुख्य परीक्षा में नौ वर्णनात्मक पेपर होते हैं। इन दोनों में पास होने वाले उम्मीदवारों को फिर इंटरव्यू के लिए बुलाया जाता है, जिसके बाद फाइनल सेलेक्शन होता है।
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