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देशभर में ब्लैक फंगस के 5,500 मामले, 126 लोगों की मौत

कोरोना महमारी के बीच ब्लैक फंगस भी धीरे-धीरे पूरे देशभर में पांव पसार रहा है। देशभर में इस बीमारी ने अबतक साढ़े पांच हजार लोगों को अपनी गिरफ्त में लिया है।

Written by: IndiaTV Hindi Desk
Published : May 21, 2021 09:22 am IST, Updated : May 21, 2021 09:22 am IST
देशभर में ब्लैक फंगस के 5,500 मामले, 126 लोगों की मौत- India TV Hindi
Image Source : PTI देशभर में ब्लैक फंगस के 5,500 मामले, 126 लोगों की मौत

नई दिल्ली: कोरोना महमारी के बीच ब्लैक फंगस भी धीरे-धीरे पूरे देशभर में पांव पसार रहा है। देशभर में इस बीमारी ने अबतक साढ़े पांच हजार लोगों को अपनी गिरफ्त में लिया है। ब्लैक फंगस से बुधवार तक 126 लोगों की मौत हो चुकी है। इस बीमारी से सबसे ज्यादा प्रभावित राज्य महाराष्ट्र है जहां अबतक 1500 मामले सामने आए हैं जबकि 90 लोगों की मौत हुई है। हरियाणा में ब्लैक फंगस के 14 मामले सामने आए हैं जबकि दिल्ली में 8 मामले आए हैं। 

इस बीच केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से ब्लैक फंगस संक्रमण (म्यूकरमाइकोसिस) को महामारी रोग अधिनियम 1897 के तहत अधिसूच्य बीमारी बनाकर सभी मामलों की सूचना देने आग्रह किया है। इसने यह भी कहा है कि इस संक्रमण से कोविड-19 रोगियों में दीर्घकालिक रुग्णता और मौतों की संख्या में वृद्धि हो रही है। 

मंत्रालय ने एक पत्र में कहा कि हालिया समय में कई राज्यों से कोविड रोगियों में फंगस संक्रमण ‘म्यूकरमाइकोसिस’ के रूप में एक नयी चुनौती सामने आई है। इसने कहा कि यह बीमारी खासकर ऐसे कोविड रोगियों में देखने को मिल रही है जिन्हें स्टेरॉइड पद्धति उपचार मिला है और जिनका शर्करा स्तर अनियंत्रित है। स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को लिखे पत्र में कहा है, ‘‘फंगस संक्रमण का परिणाम कोविड रोगियों में दीर्घकालिक रुग्णता और मौतों की संख्या में वृद्धि के रूप में सामने आ रहा है।’’ उन्होंने कहा कि इस संक्रमण के उपचार के लिए विभिन्न नजरियों पर ध्यान दिए जाने की जरूरत है जिसमें आंखों के सर्जन, कान-नाक-गला विशेषज्ञों, सामान्य सर्जन और अन्य का दृष्टिकोण शामिल हो तथा कवक रोधी दवा के रूप में एंफोटेरिसिन-बी इंजेक्शन का इस्तेमाल किया जा सकता है।

 पत्र में कहा गया है, ‘‘आपसे आग्रह है कि म्यूकरमाइकोसिस को महामारी रोग अधिनियम 1897 के तहत अधिसूच्य बीमारी बनाएं, जिसमें सभी सरकारी और निजी स्वास्थ्य प्रतिष्ठान, मेडिकल कॉलेज म्यूकरमाइकोसिस संबंधी निगरानी, निदान, प्रबंधन के लिए स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय और भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करेंगे।’’ केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने पत्र में यह भी कहा है, ‘‘और, सभी प्रतिष्ठानों के लिए यह आवश्यक बनाया जाए कि वे सभी संदिग्ध तथा पुष्ट मामलों की सूचना जिला स्तर के मुख्य चिकित्सा अधिकारी के माध्यम से स्वास्थ्य विभाग को और फिर एकीकृत रोग निगरानी कार्यक्रम (आईडीएसपी) निगरानी प्रणाली को दें।’’ 

इस बीच रसायन एवं उर्वरक राज्य मंत्री मनुसख मांडविया ने एक ट्वीट में कहा, ‘‘ब्लैक फंगस (म्यूकरमाइकोसिस) की दवा एम्फोटेरिसिन बी की कमी का जल्द समाधान कर दिया जाएगा। मौजूदा छह दवा कंपनियों के अतिरिक्त, तीन दिन के भीतर, पांच और दवा कंपनियों को भारत में इस दवा के उत्पादन की मंजूरी मिली है।’’ वहीं, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा कि यदि जरूरत पड़ी तो ब्लैक फंगस या म्यूकरमाइकोसिस को महामारी घोषित किया जाएगा। उन्होंने अस्पतालों से आग्रह किया कि वे कोविड-19 के उपचार में स्टेरॉइड दवाओं का नियंत्रित तरीके से इस्तेमाल करें। केजरीवाल ने यह भी कहा कि दिल्ली में सरकार संचालित तीन अस्पतालों में ब्लैक फंगस के उपचार के लिए समर्पित केंद्र स्थापित किए जाएंगे। 

इनपुट-भाषा

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