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मनुस्मृति दहन और महाभारत, मनुस्मृति में महिलाओं के खिलाफ क्या है?

 Written By: India TV News Desk
 Published : Mar 09, 2016 09:42 pm IST,  Updated : Mar 09, 2016 09:46 pm IST

नई दिल्ली: दिल्ली के जेएनयू के कैंपस से एक और विवाद उठा है हिंदू धर्म के सदियों पुराने ग्रंथ मनुस्मृति को लेकर मनुस्मृति को लेकर। जेएनयू में मनुस्मृति जलाए जाने के बाद मनुस्मृति पर नई

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नई दिल्ली: दिल्ली के जेएनयू के कैंपस से एक और विवाद उठा है हिंदू धर्म के सदियों पुराने ग्रंथ मनुस्मृति को लेकर मनुस्मृति को लेकर। जेएनयू में मनुस्मृति जलाए जाने के बाद मनुस्मृति पर नई बहस छिड़ गई है। खास बात ये है कि जेएनयू में मनुस्मृति के पन्ने जलाने वालों में एबीवीपी के जुडे छात्र भी शामिल थे। उन्होंने भी मनुवाद मुर्दाबाद के नारे लगाए।

मनुस्मृति में महिलाओं के खिलाफ क्या है ?

ये जेएनयू कैंपस से उठी ये नए ललकार की मुनादी है। जिस वक्त पूरी दुनिया इंटरनेशनल वुमंस डे के रंग में डूबी हुई थी, हर तरफ महिलाओं की कामयाबी के किस्से सुनाए जा रहे थे उस वक्त जेएनयू में महिलाओं की बात कुछ इस अंदाज में सामने रखी गई। डफली और नारों की गूंज के साथ मनुस्मृति के पन्ने जलाए गए वो पन्ने जिनमें महिलाओं की आजादी के खिलाफ बहुत कुछ लिखा गया है।

मनुस्मृति जलाने की इत्तिला वसंत कुंज थाने को दे दी गई थी लेकिन छात्रों को प्रोग्राम की इजाजत नहीं मिली बावजूद इसके तय प्रोग्राम के मुताबिक साबरमती ढाबे के पास छात्र जुटे। मनुस्मृति के पन्नों को आग के हवाले किया गया, नारेबाजी हुई और पैगाम दिया गया कि महिलाओं की बेइज्जती बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मनुस्मृति के खिलाफ बहुत लोग हैं। हर साल दिसंबर 25 के आसपास इसे पूरे भारत में जलाया जाता है तो ऐसा कुछ नहीं है कि इसके समर्थन में बहुत ज्यादा लोग हैं। अगर कुछ ऑर्थोडॉक्स सेक्शन इसके विरोध में है तो हम बताना चाहते हैं कि ये प्रोटेस्ट ऑफ आइडियाज नहीं है।

बाबा साहेब ने जलाई थी मनुस्मृति

मनुस्मृति में ऐसा क्या है कि महिला दिवस के मौके पर ही उसके पन्ने जलाए गए और क्यों दशकों से एक तबका करता आया है मनुस्मृति दहन की हिमायत। करीब 89 साल पहले 25 दिसंबर 1927 को खुद हिंदुस्तान का संविधान लिखने वाले डॉक्टर भीमराव आंबेडकर ने पहली बार मनुस्मृति के पन्नों को आग के हवाले किया था। अंबेडकर भी मानते थे मनुस्मृति सामाजिक बंटवारे और भेदभाव की बुनियाद तैयार करती है। महिलाओं और दलितों को दबाने की बात करती है। यही वजह है कि जेएनयू में जब मनुवाद के विरोध के साथ ही बाबा साहब के जयकार के नारे भी गूंज रहे थे।

महिलाओं और दलितों के बारे में क्या कहती है मनुस्मृति ?

जेएनयू में मनुस्मृति जलाए जाने के बाद मनुस्मृति पर नई बहस छिड़ गई है। खास बात ये है कि जेएनयू में मनुस्मृति के पन्ने जलाने वालों में एबीवीपी के जुडे छात्र भी शामिल थे लेकिन बड़ा सवाल ये है कि मनुस्मृति में महिलाओं के खिलाफ ऐसा क्या क्या लिखा गया है, जिसपर महिलाओं को सख्त एतराज है ? मनुस्मृति में दलितों के बारे में ऐसा क्या है जिसका बरसों से विरोध होता आया है ?

आगे की स्लाइड में पढ़िए क्या है मनुस्मृति के श्लोकों का सच ?

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