नई दिल्ली: हर गांव-शहर में होली के पर्व से जुड़ी कुछ रंगीन यादें और खास परंपराएं, रस्में होती हैं। हमीरपुर जिलें में एक विशेष परंपरा सबके लिए आकर्षण व आश्चर्य का केंद्र है। यहां पर कोई भी पुरुष होली नहीं खेलता है। इस दिन पुरुष रोजमर्या के काम निपटाते है।
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इस दौरान गांव में सिर्फ महिलाएं ही रहती हैं और वे रंगोत्सव का आनंद लेती हैं। दिनभर गांव में किसी भी पुरुष का प्रवेश वर्जित रहता है। अगर कोई पुरुष भूलकर भी यहां पर आ जाता है तो उसे खूब रंग लगाया जाता है। साथ ही पिटाई भी की जाती है। इसलिए धुलंडी के दिन कोई भी पुरुष यहां आने की हिम्मत नहीं करता। जी हां चौक गए न कि ऐसा कैसे हो सकता है, लेकिन यह बात सच है।
उत्तरप्रदेश का एक ऐसा गांव जहां पर सिर्फ महिलाएं ही होली के रंग में सराबोर होती है। हमीरपुर के कुंडरा गांव में यह एक अनूठी परंपरा है। जोकि कई सालों से चली आ रही है। यहां पर रहने वाले पुरुष अपने रोजमर्या के काम जैसे कि खेती करते है। और वहीं छोटे लड़के एक साफ-सुथरे घर पर रहते है। इस गांव में रहने वाली महिलाएं रामजानकी नामक मंदिर में एकत्रित होती है और फाग गाकर जमकर होली खेलती है।
इस कारण पुरुष नहीं खेलते होली
इस अनूठी परंपरा के पीछे यहां रहने वाले ग्रामीण अपना तर्क देते है कि तीन साल पहले राजजानकी मंदिर में गांव के सभी पुरुष एकत्र होकर फाग गा रहे थे और रंग के सराबोर में मग्न थे।
तभी क्षेत्र का इनामी डाकू मेम्बर सिंह ने आया और सभी को एक लाइन में खड़ा करके रजपाल पाल(50) को गोली मारके हत्या कर दी। और सभी गांव वालो के कपड़े उतरवा दिए। डकैत को शक था कि रजपाल पुलिस का मुखबिर है। इस घटना से बेइज्जत होकर गांव वालों ने कसम खाई कि अब इस गांव में होली कभी नहीं खेली जाएगी।
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