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डिजिटल अरेस्ट को लेकर केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की स्टेटस रिपोर्ट, हाई-लेवल इंटर-डिपार्टमेंटल कमेटी बनी

 Reported By: Atul Bhatia Edited By: Subhash Kumar
 Published : Jan 13, 2026 10:46 am IST,  Updated : Jan 13, 2026 11:57 am IST

केंद्र सरकार की ओर से डिजिटल अरेस्ट के मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में स्टेटस रिपोर्ट की गई है। सरकार ने बताया है कि उनकी ओर से एक हाई-लेवल इंटर-डिपार्टमेंटल कमेटी का गठन किया गया है।

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डिजिटल अरेस्ट को लेकर सुप्रीम कोर्ट में होगी सुनवाई। (फाइल फोटो) Image Source : PTI

डिजिटल अरेस्ट मामलों में केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपनी स्टेटस रिपोर्ट दाखिल कर दी है। केंद्र सरकार ने कोर्ट को बताया है कि इस मामले की जांच अब CBI को सौंप दी गई है।CBI ने अब इस मामले में नई FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।सरकार ने कोर्ट से कहा है कि डिजिटल अरेस्ट जैसे मामलों से निपटने के लिए एक ठोस और असरदार योजना बनाने में थोड़ा समय लगेगा। इसी वजह से केंद्र ने अदालत से एक महीने का समय मांगा है।

हाई-लेवल इंटर-डिपार्टमेंटल कमेटी का गठन

केंद्र सरकार ने यह भी जानकारी दी कि गृह मंत्रालय ने डिजिटल अरेस्ट की समस्या से निपटने के लिए एक हाई-लेवल इंटर-डिपार्टमेंटल कमेटी बनाई है। यह कमेटी अलग-अलग विभागों के साथ मिलकर काम कर रही है और लोगों से मिले सुझावों पर भी विचार कर रही है।

कमेटी में क्या होगा खास?

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एक स्टेटस रिपोर्ट दाखिल की है और बताया है कि गृह मंत्रालय ने देश में डिजिटल अरेस्ट के मुद्दे के सभी पहलुओं की पूरी तरह से जांच करने के लिए एक हाई-लेवल इंटर-डिपार्टमेंटल कमेटी का गठन किया है। इस कमेटी की अध्यक्षता गृह मंत्रालय के विशेष सचिव (आंतरिक सुरक्षा) कर रहे हैं, जो इसके चेयरपर्सन हैं। सदस्यों में MeitY, DoT, MEA, वित्तीय सेवा विभाग, कानून और न्याय मंत्रालय, उपभोक्ता मामले मंत्रालय, RBI के संयुक्त सचिव स्तर के अधिकारी, CBI, NIA, दिल्ली पुलिस के IG रैंक के अधिकारी और भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र के सदस्य सचिव शामिल हैं।

योजना तैयार करने के लिए समय जरूरी- सरकार

सरकार का कहना है कि सभी सुझावों को ध्यान में रखते हुए एक मजबूत योजना तैयार करने के लिए समय जरूरी है, ताकि आगे चलकर लोगों को ऐसे ऑनलाइन धोखाधड़ी और डराने वाले मामलों से बचाया जा सके। इस मामले में आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होनी है। बता दें कि पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने डिजिटल अरेस्ट मामलों की जांच सीबीआई से करवाने के आदेश दिए थे।

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