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मथुरा कृष्ण जन्मभूमि विवाद: कोर्ट ने खारिज की याचिका, कहा- मंदिर-ईदगाह के स्थान में नहीं होगा कोई बदलाव

Written by: IndiaTV Hindi Desk Published : Sep 30, 2020 04:16 pm IST, Updated : Sep 30, 2020 05:52 pm IST

उत्तर प्रदेश के मथुरा में कृष्ण जन्मभूमि के विवाद को लेकर सुनवाई पूरी हो चुकी है। कोर्ट ने आदेश रिजर्व कर लिया है और शाम तक फैसला आने की उम्मीद की जा रही है।

Shri Krishna Janmabhoomi plea Mathura Court Decision likely soon- India TV Hindi
Image Source : FILE PHOTO Shri Krishna Janmabhoomi plea Mathura Court Decision likely soon

मथुरा। कृष्ण जन्मभूमि-ईदगाह मामले में मथुरा के सिविल कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि मंदिर-ईदगाह के स्थान में कोई बदलाव नहीं होगा। याचिका में मंदिर के पास बनी ईदगाह को हटाने की मांग की गई थी। अदालत ने याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया है। मथुरा सिविल जज सीनियर डिवीजन में श्रीकृष्ण विराजमान का वाद दायर करने वाले हरिशंकर जैन, विष्णु जैन व रंजना अग्निहोत्री ने कृष्ण जन्मभूमि-ईदगाह मामले में याचिका दाखिल की थी।  

1968 में हुए समझौते को रद्द करने की मांग

श्रीकृष्ण विराजमान, स्थान श्रीकृष्ण जन्मभूमि और कई लोगों की ओर से पेश किए दावे में कहा गया है कि 1968 में श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संघ (जो अब श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान के नाम से जाना जाता है) और शाही ईदगाह मस्जिद के बीच जमीन को लेकर समझौता हुआ था। इसमें तय हुआ था कि मस्जिद जितनी जमीन में बनी है, बनी रहेगी। यदि अदालत याचिका को स्वीकार कर लेती है तो इस संबंध में सभी विपक्षियों को समन जारी कर अग्रिम न्यायिक प्रक्रिया प्रारंम्भ हो जाएगी। 

जानिए किसने दाखिल की है याचिका

सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता हरीशंकर जैन और विष्णु शंकर जैन ने मथुरा की सीनियर सिविल जज छाया शर्मा की अदालत में याचिका दाखिल की है। भगवान श्रीकृष्ण विराजमान की ओर से दाखिल की गई इस याचिका में न्यायालय से 13.37 एकड़ की जन्मभूमि का मालिकाना हक मांगा गया है। भक्तों ने श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान और शाही ईदगाह प्रबंध समिति के बीच पांच दशक पूर्व हुए समझौते को अवैध बताते हुए उसे निरस्त करने और मस्जिद को हटाकर पूरी जमीन मंदिर ट्रस्ट को सौंपने की मांग की है। लखनऊ की रहने वाली रंजना अग्निहोत्री और अन्य कई लोगों ने मिलकर मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मस्थान परिसर में बनी शाही ईदगाह मस्जिद को जमीन देने को गलत बताते हुए सिविल जज सीनियर डिवीजन छाया शर्मा की कोर्ट में दावा पेश किया।

अधिवक्ता द्वारा बीते शुक्रवार को मथुरा की अदालत में दायर की गई याचिका में कहा गया था कि 1968 में श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान और शाही ईदगाह प्रबंध समिति के बीच हुआ समझौता पूरी तरह से गलत है और भगवान कृष्ण एवं उनके भक्तों की इच्छा के विपरीत है। हालांकि 12 अक्तूबर 1968 को कटरा केशव देव की जमीन का समझौता श्रीकृष्ण जन्मस्थान सोसाइटी द्वारा किया गया। जिसके तहत 20 जुलाई 1973 को यह जमीन डिक्री की गई। याचिका में डिक्री को खारिज करने की मांग की गई है।

बड़ी बात ये है कि मथुरा श्रीकृष्ण जन्मस्थान और शाही मस्जिद ईदगाह के विवाद को लेकर 136 साल तक केस चला, जिसके बाद अगस्त 1968 में महज ढाई रूपये के स्टांप पेपर पर समझौता किया गया। तत्कालीन डीएम व एसपी के सुझाव पर श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संघ और शाही मस्जिद ईदगाह कमेटी ने दस प्रमुख बिदुओं पर समझौता किया था। बता दें कि कृष्ण जन्मस्थान परिसर में मुगल शासक औरंगजेब के कार्यकाल में निर्मित ईदगाह मस्जिद को वहां से हटाने की मांग की जा रही है। इतिहासकारों का मानना है कि इस जगह पर औरंगजेब ने केशवनाथ मंदिर को नष्ट कर दिया था और वहां शाही ईदगाह मस्जिद का निर्माण करा दिया था। साल 1935 में इलाहाबाद कोर्ट ने वाराणसी के हिंदू राजा को जमीन के कानूनी अधिकार सौंप दिए थे, जहां आज मस्जिद खड़ी है।

इतिहासकारों का मानना है कि सिकंदर लोदी के शासन काल में तीसरी बार बने मंदिर को नष्ट कराया गया था और फिर चौथी बार औरंगजेब ने मंदिर को तोड़वा दिया था। अब फिर से कृष्ण जन्मभूमि में मंदिर बनाने की बात जोरों से उठी है जो अदालत तक पहुंची है। राम मंदिर निर्माण की अनुमति के बाद यहां भी मंदिर निर्माण की आस लगाए लोग बैठे हैं।

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