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जातिगत जनगणना को राहुल गांधी ने बताया "एक्स-रे रिपोर्ट," कहा- दर्द समझने के लिए है जरूरी

Edited By: Swayam Prakash @swayamniranjan_ Published : Nov 09, 2023 05:17 pm IST, Updated : Nov 09, 2023 05:17 pm IST

मध्य प्रदेश के अशोक नगर में एक चुनावी जनसभा को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने कहा कि जातिगत जनगणना को मैं ‘‘एक्स-रे रिपोर्ट’’ की तरह मानता हूं। उन्होंने कहा जैसे एक्स-रे से हड्डी में सही जगह चोट का पता लगता है, वैसे ही जातिगत जनगणना से इन समुदायों की वास्तविक आबादी पता चल सकेगी।

Rahul Gandhi- India TV Hindi
Image Source : PTI एक चुनावी सभा को संबोधित करते राहुल गांधी

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने जातिगत जनगणना को ‘‘एक्स-रे रिपोर्ट’’ की तरह बताया है। गुरुवार को राहुल ने मध्य प्रदेश के अशोक नगर में एक जनसभा को संबोधित करते हए कहा कि अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के लोगों, दलितों और आदिवासियों की वास्तविक आबादी के अनुपात में सरकार में उनकी भागीदारी पक्की करने के लिए इस तरह की गिनती जरूरी है। बता दें कि मध्य प्रदेश में जातिगत जनगणना कराना कांग्रेस के चुनावी वादों में शुमार है। 

"मैं जातिगत जनगणना को एक्स-रे कहता हूं"

राहुल गांधी ने अशोक नगर में आयोजित एक चुनावी सभा में कहा,‘‘किसी व्यक्ति को जब चोट लगती है, तो हम यह पता लगाने के लिए उसका एक्स-रे कराते हैं कि उसकी हड्डी टूटी है या नहीं। इसी तरह, मैं जातिगत जनगणना को भी एक्स-रे (रिपोर्ट) कहता हूं।’’ उन्होंने कहा कि ओबीसी के लोगों, दलितों और आदिवासियों को बेरोजगारी और महंगाई के कारण जबर्दस्त कष्ट हो रहा है। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ने कहा कि जातिगत जनगणना से इन समुदायों की वास्तविक आबादी पता चल सकेगी जिसके अनुपात में सरकार में इनकी भागीदारी सुनिश्चित हो सकेगी। 

"मोदी खुद को ओबीसी बताते हैं लेकिन..."

कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने दावा किया कि जातिगत जनगणना के मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी मौन बने हुए हैं। उन्होंने कहा,‘‘मोदी अपने आप को ओबीसी बताते हैं, पर जब भी जातिगत जनगणना की बात आती है, तो वह कहते हैं कि हिंदुस्तान में केवल एक जाति है और वह है गरीब।’’ उन्होंने दावा किया कि देश चलाने वाली केंद्र सरकार के 90 शीर्ष अफसरों में केवल तीन अधिकारी ओबीसी वर्ग के हैं। गांधी ने कहा,‘‘अगर हिंदुस्तान का बजट 100 रुपये का है, तो ओबीसी के अफसर केवल पांच रुपये के खर्च का निर्णय लेते हैं, जबकि आदिवासी अफसर केवल 10 पैसे के व्यय का फैसला लेते हैं।’’ 

विनिवेश और निजीकरण को लेकर मोदी सरकार को घेरा

इतना ही नहीं राहुल गांधी ने नरेन्द्र मोदी सरकार पर सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों में विनिवेश और निजीकरण को बढ़ावा देने का आरोप लगाते हुए कहा कि इन कदमों के कारण ओबीसी, दलित और आदिवासी वर्ग के लोग सरकारी भर्तियों से दूर हो गए हैं। माल एवं वस्तु कर (जीएसटी) को उक्त तीनों वर्गों के हितों के खिलाफ बताते हुए उन्होंने कहा इन तबकों के लोगों की जेब से जीएसटी वसूला जा रहा है और इस रकम से बड़े उद्योगपतियों को सरकारी बैंकों के जरिये भारी-भरकम कर्ज दिया जा रहा है।

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