अजित पवार के निधन के बाद सुनेत्रा पवार ने उनकी जगह डिप्टी सीएम पद की शपथ ले ली है। उन्हें विधायक दल का नेता भी चुन लिया गया है और पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाने की प्रक्रिया भी जारी है। इस बीच एनसीपी शदर पवार गुट के कई नेताओं ने कहा है कि पार्टी के दोनों गुटों का विलय करने की बात हो रही थी। इसके साथ ही कहा गया कि आने वाले समय में एनसीपी के दोनों गुटों का विलय हो जाएगा। इस पर देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि ऐसा नहीं है। उन्होंने एनसीपी नेताओं को गलत साबित करते हुए दो अहम बातें बताईं।
देवेंद्र फडणवीस ने कहा, "मैं इस पर केवल दो बातें कहूंगा। सच तो यह है कि अभी यह सब बोलने का समय नहीं है, लेकिन मैं सिर्फ दो बातें कहूंगा। अगर अजित पवार साहब इस तरह के किसी एकत्रीकरण (गठबंधन) की चर्चा कर रहे थे, तो क्या वे भाजपा से चर्चा किए बिना ऐसी कोई चर्चा करेंगे? इसलिए, अगर वे चर्चा कर रहे थे, तो उन्होंने भाजपा से चर्चा की होगी। अगर वे नहीं कर रहे थे, तो वह अलग बात है।" उन्होंने कहा कि अगर अजित पवार ऐसा कुछ कर रहे होते तो उन्हें जरूर बताते।
क्या एनडीए से बाहर निकलने वाले थे अजित पवार?
देवेंद्र फडणवीस ने कहा कि एनसीपी के गठबंधन और विलय का फैसला पूरी तरह से राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी का अधिकार क्षेत्र है, लेकिन गठबंधन में होने के नाते उन्हें बीजेपी से एक बार चर्चा करनी चाहिए। वह ऐसा करते थे और आगे भी करेंगे। ऐसे में अगर अजित पवार साहब इस तरह की चर्चा कर रहे थे, तो क्या वे चर्चा एनडीए से बाहर निकलने के लिए कर रहे थे? क्या वे सरकार से बाहर निकलने वाले थे? वे तो स्पष्ट रूप से सरकार में स्थिर थे। फडणवीस ने कहा, "रोजाना किसी तरह का भ्रम पैदा करना और फिर अपने 'इकोसिस्टम' का उपयोग करके उस भ्रम को बढ़ाना, यह तरीका गलत है। यह सही नहीं है। देखिए, बात ऐसी है कि वर्तमान स्थिति में हमें भी राजनीति नहीं करनी है। अन्यथा, मैं बहुत सी बातें बता सकता हूं। क्या हुआ, क्या हो रहा है। मुझे सब दिख रहा है। मैं इन सब बातों का साक्षी हूं। आप सभी जानते हैं कि मेरे और अजित दादा के जो संबंध थे, उसमें लगभग हर बात वे मुझसे साझा करते थे। उनकी दुर्भाग्यपूर्ण मृत्यु से एक दिन पहले, हम दोनों लगभग एक घंटे तक साथ बैठकर बातें कर रहे थे।"
यह निचले स्तर की राजनीति का समय नहीं
महाराष्ट्र सीएम ने कहा, "मुझे लगता है कि इस मामले में निचले स्तर की राजनीति करना उचित नहीं है। उनके दल ने निर्णय लिया। एक बात याद रखिए कि आज दो अलग-अलग दल बन चुके हैं। शरद पवार साहब का दल अलग है और अजित पवार साहब का दल अलग है। अब अजित पवार साहब के दल ने यह निर्णय लिया है कि हमारा नेतृत्व सुनेत्रा ताई करें। उन्होंने यह निर्णय लिया कि नेतृत्व करने के लिए सुनेत्रा ताई शपथ लें। उन्होंने सुनेत्रा ताई को बताया और उन्होंने वहां शपथ ली। इसलिए, यह निर्णय पूरी तरह से राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी का है। हमारी पहले दिन से यही भूमिका रही है कि हमारे साथी कौन हैं? राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (अजित पवार के नेतृत्व वाली।) इसलिए, हमारे साथियों ने जो निर्णय लिया है, उस निर्णय के पीछे खड़े रहना हमारी जिम्मेदारी है। वह जिम्मेदारी हम निभाएंगे।"
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