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परफ्यूम लगाने वाली लड़कियां आवारा होती हैं... टेलर को नाप देने वाली भी जहन्नुम में जायेंगी- शाकिर अली नूरी

Reported By : Namrata Dubey Edited By : Swayam Prakash Published : Dec 01, 2023 09:46 pm IST, Updated : Dec 01, 2023 09:46 pm IST

मौलाना आलम शाकिर अली नूरी ने कहा कि परफ्यूम लगाने वाली लड़कियां आवारा होती हैं। वे परफ्यूम लगाकर गैर मर्दों को अपने पास बुलाती हैं। मौलाना ने कहा कि जींस और टी शर्ट पहनने वाली लड़कियां जिस्म की नुमाइशी करवाती हैं और ऐसी औरते जहन्नुम में जाती हैं।

shakir ali noori- India TV Hindi
Image Source : FACEBOOK मौलाना आलम शाकिर अली नूरी

मुंबई के आजाद मैदान में आज सुन्नी इज्तिमा का आयोजन किया गया जो 3 दिनों तक चलेगा। आज पहले दिन महिलाओं के लिए कार्यक्रम रखा गया, जहां तमाम मुस्लिम मौलवी और स्कॉलर ने आकार शरीयत और कुरान की बात कीं। इस दौरान मौलाना आलम शाकिर अली नूरी ने कहा कि जींस और टी शर्ट पहनने वाली लड़कियां गलत हैं। टाइट कपड़े पहने वाली लड़कियां जिस्म की नुमाइशी करवाती हैं और ऐसी औरते जहन्नुम में जाती हैं। ऐसी औरतों को जन्नत की खुशबू भी नसीब नहीं होती। इस्लाम आपको नंगापन जाहिर करने से रोकता है। जिनकी कपड़ों में पीठ नजर आती है, उन्हे शर्म आनी चाहिए। 

"परफ्यूम लगाकर गैर मर्दों को पास बुलाती हैं लड़कियां"

मौलाना आलम शाकिर अली नूरी ने आगे कहा कि जो महिलाएं टेलर को नाप देती हैं वो भी गलत हैं और जहन्नुम में जायेंगी। उन्होंने कहा कि परफ्यूम लगाने वाली लड़कियां आवारा होती हैं। वे परफ्यूम लगाकर गैर मर्दों को अपने पास बुलाती हैं। वहीं इस दौरान इंडिया टीवी से बातचीत में उन्होंने कहा कि मदरसों में पढ़ा बच्चा कभी आतंकवादी नहीं बनता। बाहर के कॉलेज-स्कूलों में बच्चे टीचर की इज्जत नहीं करते लेकिन मदरसे में देखिए उस्ताद की कितनी इज्जत होती है। शाकिर अली ने कहा कि मदरसे से बड़ी शिक्षा कहीं नही मिलती है। 

"पूरे बदन से ढके हुए कपड़े पहनने चाहिए"

बात है लड़के-लड़कियों की तो उन्हे पूरे बदन से ढके हुए कपड़े पहनने चाहिए। ताकि उनका मन भी सही रहे और दूसरों की निगाह छोड़िए अपनी नजर सही रखिए। आजादी की लड़ाई में कितने उलेमाओं को फांसी पर चढ़ाया गया। मुसलमानों ने और मदरसों के लोगो ने कितनी ज्यादा कुर्बानी दी है।

इज्तिमा क्या है और इसमें क्या होता है?

बता दें कि इज्तिमा अरबी भाषा का एक शब्द है जिसका मतलब कई लोगों का एक जगह पर इकट्ठा होना है। इज्तिमा कई तरह के होते हैं, जिनमें ज़िले से लेकर देश और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर होने वाले इज्तिमा शामिल होते हैं। इज्तिमा के दौरान उन बातों पर चर्चा होती है जिनसे एक मुसलमान दीन के रास्ते पर बेहतर ढंग से चल सके। मुंबई में हुए इसी प्रोग्राम के दौरान बड़ी संख्या में निकाह भी संपन्न कराए गए जिनमें किसी तरह का कोई दहेज नहीं लिया दिया गया। इस दौरान कुछ इस तरह की चर्चाएं होती हैं कि इस्लाम के मुताबिक़ किसी को अपना रोज़ाना का जीवन कैसे जीना चाहिए।

मुंबई के आजाद मैदान में तीन दिन चलेगा कार्यक्रम

गौरतलब है कि मुंबई के आजाद मैदान में सुन्नी दावते इस्लामी के 31वें इज्तिमा कार्यक्रम का आयोजन किया गया है। तीन दिनों तक चलने वाले इस कार्यक्रम में कुरान की शिक्षा, मुस्लिम समाज की शिक्षा और इस पर AI (artificial intelligence) को भी धर्म से जोड़कर गाइड किया जायेगा। आज पहले दिन सिर्फ महिलाओं के लिए कार्यक्रम रखा गया, जहां 50 हजार के करीब महिलाएं पहुंची थीं। यहां आज स्पीकर मुफ्ती निजामुद्दीन रजवी और आलम शाकिर अली नूरी की तरफ से मुस्लिम महिलाओं को संबोधित किया गया।

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