एंप्लॉयर (कंपनी) के साइज और बाकी कॉस्ट के आधार पर H-1B वीजा फीस अभी तक लगभग 2,000 अमेरिकी डॉलर से 5,000 अमेरिकी डॉलर तक था।
ट्रंप प्रशासन की घोषणा उन लोगों पर लागू नहीं होती है जो "उद्घोषणा की प्रभावी तिथि से पहले दायर किये गये आवेदनों के लाभार्थी हैं, वर्तमान में स्वीकृत आवेदनों के लाभार्थी हैं, या जिनके पास वैध रूप से जारी एच-1बी गैर-आप्रवासी वीज़ा हैं।
ट्रंप के नए आदेश के मुताबिक, कंपनियों को H-1B वीजा के जरिए विदेशी कर्मचारियों को हायर करने के लिए मोटा शुल्क चुकाना होगा। इस आदेश से दुनियाभर में हड़कंप मचा हुआ है।
एच-1बी वीजा धारकों में 70 प्रतिशत से अधिक भारतीय हैं, और डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा इन वीजा के लिए शुल्क में भारी वृद्धि की घोषणा के बाद खलबली मची है। अब अमेरिकी अधिकारी ने कहा है, भारतीयों को घबराने की जरूरत नहीं।
रणधीर जायसवाल ने कहा, "सरकार ने अमेरिकी H1B वीज़ा कार्यक्रम पर प्रस्तावित प्रतिबंधों से संबंधित रिपोर्ट देखी हैं। इससे क्या-क्या असर पड़ सकता है इसका अध्ययन सभी संबंधित पक्षों द्वारा किया जा रहा है।
अमेरिका के संघीय आंकड़ों के अनुसार, भारत की टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) 2025 तक 5000 से ज्यादा स्वीकृत H-1B वीजा के साथ इस प्रोग्राम की दूसरी सबसे बड़ी लाभार्थी है।
पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडन के कार्यकाल के दौरान उनके सलाहकार रहे और इमिग्रेशन पॉलिसी पर एशियाई-अमेरिकी समुदाय के नेता अजय भुटोरिया ने H-1B वीजा फीस बढ़ाने संबंधी ट्रंप की नई योजना से अमेरिकी आईटी सेक्टर की प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त पर संकट मंडराने की चेतावनी दी।
अमेरिका का वाणिज्य सचिव हॉवर्ड लुटनिक ने H-1B वीजा, ग्रीन कार्ड सिस्टम में बड़े बदलाव की बात कही है। उन्होंने कहा कि H-1B वीज़ा कार्यक्रम से भारतीय पेशेवरों को ज्यादा लाभ है, जो H-1B धारकों में सबसे ज़्यादा हैं।
प्रस्तावित वेज-बेस्ड सिस्टम के तहत जॉब के आवेदनों में सैलरी के आधार पर ऐप्लिकेंट्स को प्राथमिकता दी जाएगी।
USCIS ने चाइल्ड स्टेटस प्रोटेक्शन एक्ट के तहत आयु गणना से जुड़ी अपनी पॉलिसी को अपडेट किया है। इसके अलावा, विदेश विभाग ने H-1B वीजा और अन्य नॉन-इमिग्रेंट वीजा नियमों में भी बड़े बदलाव किए हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि उन्हें H-1B वीजा पर दोनों पक्षों की बहस पसंद है, लेकिन वह देश में 'बहुत सक्षम लोग' लाना चाहते हैं। माना जा रहा है कि H-1B वीजा को लेकर ट्रंप की नीतियों का भारत जैसे देशों पर काफी असर होगा।
टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, इन्फोसिस, विप्रो और एचसीएल टेक्नोलॉजीज जैसी प्रमुख भारतीय आईटी सेवा कंपनियां लगातार एच1बी वीजाधारकों के लिए शीर्ष नियोक्ताओं में शुमार रही हैं। इस बार विप्रो 1,634 वीजा के साथ निचले स्थान पर रही है।
अमेरिका के उद्योगपति एलन मस्क ने एच-1बी वीजा को लेकर बड़ा ऐलान किया है। उनका कहना है कि इस कार्यक्रम को बचाने के लिए जरूरत पड़ी तो वह युद्ध तक कर सकते हैं।
अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सत्ता में आने से पहले जो बाइडेन ने एच-1बी वीजा प्रोग्राम में बड़े बदलाव का ऐलान किया है। इससे भारतीयों को अमेरिका में रहना और नौकरी पाना सबसे अधिक आसान हो जाएगा।
एक साल में 65,000 एच -1बी वीजा जारी किये जाते हैं, जिसका एक बड़ा हिस्सा भारतीयों को मिलता है। ट्रंप सरकार में H-1B वीजा के कड़े नियमों की वापसी हो सकती है।
भारत सरकार के विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को विदेशों में पढ़ रहे भारतीय छात्रों का आंकड़ा जारी किया है। इन आंकड़ों के मुताबिक वर्तमान में करीब 13, 35, 878 भारतीय छात्र विदेश में पढ़ाई कर रहे हैं।
अमेरिका में एच1-बी वीजा पॉलिसी घोटाले ने हर किसी को हैरान कर दिया है। इसमें भारतीय मूल के कंडी श्रीनिवास रेड्डी का नाम सामने आया है। कंडी ने अमेरिका में अपनी फर्म बना रखी थी, जिसके जरिये वह वीजा की लॉटरी पॉलिसी में हेरफेर को अंजाम दे रहा था।
अमेरिका की सरकार ने एच 1बी वीजा के रीन्युल की प्रक्रिया को और आसान बनाया है। इसके लिए पायलट प्रोजेक्ट के तहत इस प्रोग्राम को शुरू किया गया है। इससे 10 लाख से अधिक भारतीयों को फायदा होगा।
शाहरुख खान की एक फिल्म सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है। इस फिल्म का नाम है Dunki। यह फिल्म Donkey Route के ऊपर बनी हुई है। लेकिन क्या आपको पता है कि डंकी रूट क्या है और क्यों इसपर अधिकांश लोगों की मौत हो जाती है।
अमेरिकी सरकार के एक फैसले से वहां काम कर रहे भारतीयों को काफी फायदा होने जा रहा है। यह फायदा खासकर अमेरिका में रह रहे भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स को काफी होगा। इसके लिए अमेरिकी सरकार एक खास पायलेट प्रोग्राम शुरू करने जा रही है।
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